Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

क्या बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है?

भारत में जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए लोगों को शिक्षित करना अति अवश्यक।

Unsplash

भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।


control population, trouble, census सड़क पर घूमते लोग।(Pixabay)

भारत में कुछ समय के लिए जनसंख्या नियंत्रण बिल लाने की आवश्यकता है। जनसंख्या बढ़ने से बहुत सी दिक्कतों का सामना भारत को करना पड़ता है। ज्यादा जनसंख्या होने के कारण बेरोजगारी दर में भी बढ़ोतरी होती है जिसकी वजह से देश के युवाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जनसंख्या में तेजी से वृद्धि स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, आवास, जल आपूर्ति, स्वच्छता जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे पर भारी बोझ डालती है। भारत में कितने ही ऐसे गांव है जहां लोगों को साफ पानी नसीब नहीं होता।

यह भी पढ़ें: ऊदा देवी जिन्होंने कई ब्रिटिश सैनिकों को मारा

भारत में जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए लोगों को शिक्षित करना अति अवश्यक है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोगों को इन सब के बारे में कम ज्ञान होता है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिक्षित करना एक मात्र समाधान हो सकता है। बहुत से ऐसे देश है जिन्होंने जनसंख्या पर नियंत्रण करने के लिए नियम बनाए थे। लेकिन वह पूरी तरह से विफल रहे। क्योंकि जनसंख्या नियंत्रण कानून से देश में युवाओं की संख्या कम हो जाती है और बूढ़े लोगों की संख्या ज्यादा हो जाती है। ऐसे में देश में काम करने वाले कम और पेंशन लेने वाले ज्यादा हो जाते हैं, जिसकी वजह से देश का विकास रुक जाता है। चीन में भी ऐसी पॉलिसी लागू की गई थी लेकिन उसे इसके दुष्प्रभाव झेलने पड़े। और दो बच्चे करने वाली नीति को खत्म करना पड़ा।

अगर भारत में भी जनसंख्या नियंत्रण के लिए नीति लाई जाती है तो बहुत सोच समझ कर और उसके दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए ही लानी होगी।

Popular

Wikimedia Commons

बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

Keep Reading Show less
(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

Keep Reading Show less
Pixabay

आप हरे-भरे इलाकों में रहते हैं तो आपको हृदय का रोग विकसित होने की संभावनाएं कम होती हैं।

अगर आप हरे-भरे इलाकों में रहते हैं तो आपको हृदय का रोग विकसित होने की संभावनाएं कम होती हैं। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। ईएससी कांग्रेस 2021 में प्रस्तुत किए गए निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि पूरे अध्ययन के दौरान उच्च हरे भरे वाले ब्लॉकों के निवासियों में कम हरे भरे वाले ब्लॉकों की तुलना में किसी भी नई कार्डियोवैस्कुलर स्थितियों को विकसित करने की 16 प्रतिशत कम संभावनाएं थीं।

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी, अमेरिका के विलियम ऐटकेन ने कहा, "जब कोई क्षेत्र उच्च हरापन बनाए रखता है और जब हरापन बढ़ता है, तो समय के साथ हरेपन के उच्च स्तर हृदय की स्थिति और स्ट्रोक की कम दरों से जुड़े होते हैं।"

एटकेन ने कहा, "यह उल्लेखनीय था कि ये संबंध केवल पांच वर्षों में दिखाई दिए, पॉजिटिव पर्यावरणीय प्रभाव के लिए अपेक्षाकृत कम समय में।" अध्ययन के लिए, टीम में 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के 2,43,558 यूएस मेडिकेयर लाभार्थी शामिल थे जो 2011 से 2016 तक मियामी के एक ही क्षेत्र में रहते थे।

पांच साल के अध्ययन के दौरान दिल का दौरा, आलिंद फिब्रिलेशन, दिल की विफलता, इस्केमिक हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक / क्षणिक इस्केमिक हमले सहित नई हृदय स्थितियों की घटनाओं को प्राप्त करने के लिए मेडिकेयर रिकॉर्ड का उपयोग किया गया था।

Heart टीम ने ब्लॉक-स्तरीय हरेपन के आधार पर किसी भी नए हृदय रोग के विकास की बाधाओं और नई हृदय स्थितियों की संख्या का विश्लेषण किया। Pixabay

Keep reading... Show less