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संस्कृति

Guru Nanak Jayanti 2020 : जब गुरुनानक देव ने हरिद्वार में सूर्य को जल अर्पित करने से किया इनकार

इस वर्ष गुरु नानक जयंती 30 नवंबर को है। गुरु नानक देव की जयंती के अवसर पर उनके द्वारा दिए गए एक सन्देश को कहानी के रूप से समझने का प्रयास करते हैं।

गुरु नानक देव ब्राह्मणों को उपदेश दे रहे हैं। (Wikimedia Commons)

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की जयंती मनाई जाती है। इस साल उनकी जयंती 30 नवंबर को है। उनकी जयंती के अवसर पर मैं आप लोगों को उनसे जुड़ी एक कहानी के बारे में बताना चाहूंगा। यह उस समय की बात है जब…

गुरु नानक देव जी अलग अलग जगहों की यात्रा कर लोगों को मानवता की सीख दे रहे थे। ऐसे ही एक दिन, उन्होंने अपना रास्ता हरिद्वार की ओर किया। हरिद्वार; जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है, जहाँ के लोगों पर निराकारी शिव, परम सत्य विष्णु और परम पिता ब्रह्मा की असीम कृपा है।


सुबह का समय था। सूर्य उदय हो रहा था। हर दिशा, मंत्रों और प्राथनाओं के सामंजस्य से पावन हो रही थी। ब्राह्मणों का एक गुट, गंगा मईया में उतर कर उगते सूरज को अर्घ्य दे रहा था। गुरु नानक जी भी नदी में जाकर अर्घ्य देने लगे। मगर बाकियों के अर्घ्य देने के तरीके और इनके तरीके में एक असमानता थी।

हर ब्राह्मण, सूर्य की दिशा में जल अर्पित कर रहा था। पर गुरु नानक उसकी उल्टी दिशा में पानी को हथेली में लेकर, आगे की ओर बहा दे रहे थे। जब वहां खड़े पुजारियों ने यह देखा तो उनसे रहा ना गया। पुजारियों की भीड़ ने गुरु नानक को घेर लिया। उनमें से एक ब्राह्मण क्रोधित होते हुए बोला – “अगर तुम हिन्दू नहीं हो, तो यहाँ हिन्दुओं की जगह पर क्या कर रहे हो?” – “हाँ” – दूसरे ने सिर हिलाया और कहा – “अरे मुर्ख! किसने तुम्हें यह सब सिखाया है?”, तीसरे ने उसके तुरंत बाद बोला – “भगवान के नाते रुक जा पापी, यह उल्टी दिशा में बहना बंद कर।”

यह भी पढ़ें – हनुमान भक्त हैं या भगवान और क्या उन्हें मंकी गॉड कहना उचित है ?

गुरु नानक जी ने मात्र पांच साल की उम्र में अपना पहला संदेश दिया था। (Wikimedia Commons)

गुरु नानक ने उस ब्राह्मण की तरफ देखा और पूछा – “आप सूर्य को जल अर्पित क्यों करते हैं?”, पुजारी ने गर्व से कहा – “हम अपने पूर्वजों का सम्मान करने के लिए सूर्य को जल चढ़ाते हैं, इससे उन्हें सुख, आशीर्वाद और समृद्धि मिलती है।” – “आपके पूर्वज यहाँ से कितनी दूर हैं?” – गुरु नानक ने पूछा। तीसरे ब्राह्मण को लगा कि यह इंसान उनके ज्ञान की परीक्षा लेना चाह रहा है। इसलिए उसने कहा – “हमारे पूर्वज करोड़ों मील दूर रहते हैं।”

यह सुन कर गुरु नानक जी ने और तेजी के साथ उस उलटी दिशा में पानी फेंकना शुरू कर दिया। पंडितों का क्रोध बढ़ने लगा। उन्हें यह अपना अपमान लग रहा था। भीड़ एक साथ गुरु नानक जी पर चिल्लाने लगी – “रुक जा मुर्ख, अब बस कर” – “रुक जा…”, थोड़ी देर बाद गुरु नानक ने कहा – “देखिये पंजाब में मेरे पास एक खेत है, इसी दिशा में है जिस दिशा में मैं पानी दे रहा हूँ। मेरे खेतों को सच में पानी की बहुत ज़रूरत है, खासकर साल के इस समय। अगर देर हुई, तो मेरी फसल खराब हो जाएगी।”

ब्राह्मणों को लगा कि उनका सामना किसी सनकी आदमी से हो गया है। भीड़ में से एक पंडित तो यह बात सुनते ही वहां से प्रस्थान कर गया। बाकी जो बचे वो सभी गुरु नानक जी को घूरने लगे। एक ने कहा – “समझाने का प्रयास करें, यह पानी आपके खेतों तक कैसे जा रहा है?” – “जैसे यह पानी आपके पूर्वजों तक जा रहा है…,आपके पूर्वज तो मीलों दूर हैं, मेरा खेत यहाँ से इतनी दूर नहीं!”

अंग्रेज़ी में खबर पढ़ने के लिए – Guru Nanak Jayanti: Some of the Interesting Facts that You Must Know about Guru Nanak

18 वीं शताब्दी की काल्पनिक पेंटिंग जहाँ गुरु गोबिंद सिंह (पक्षी के साथ), गुरु नानक देव से मिलने आते हैं। (Wikimedia Commons)

ब्राह्मणों को यह बात समझ नहीं आई। हर कोई एक दुसरे को देखने लगा। तभी गुरु नानक ने एक पंडित की ओर इशारा करते हुए कहा – “पंडित जी आप अभी यहां आने वाले भक्तों द्वारा होने वाली अपनी कमाई के बारे में सोच रहे हैं, है ना?” – “और आप महाराज, घर जाकर अपनी बकरियों को चराने ले जाना होगा, इस विषय में सोच रहे हैं।” दोनों की आँखें बड़ी हो गई। यह सच था। यह दोनों इसी विषय में सोच रहे थे। उन्हें लगा कि, गुरु नानक जी कोई महान आत्मा हैं जो लोगों का मन पढ़ सकते हैं। दोनों ने हाथ जोड़ लिए – “आप कौन हैं? और आपको कैसे ज्ञात हुआ कि हम क्या सोच रहे थे?”

गुरु नानक जी ने उनके हाथों को पकड़ा और कहा – “आवश्यक यह जानना नहीं कि मुझे कैसे ज्ञात हुआ, ज़रूरी यह है कि आप कितने सच्चे मन से ईश्वर की सेवा में खुद को प्रस्तुत करते हैं। मन में पैसा, लोभ,अन्य चिंताओं के होते हुए ईश्वर में ध्यान कैसे लग सकता है?”

ब्राह्मण स्तब्ध खड़े थे। किसी के पास कहने को कुछ ना था। गुरु नानक देव ने जाते हुए कहा – “लोगों की सेवा में उपस्थित रहें, ईश्वर आपका भला करेगा”, गुरु नानक देव को जाता देख ब्राह्मणों की आँखों में आसूं आ गए।

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
जैसा की आपको पता है कि इस साल होने वाले 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव सभी पार्टियों की नाक की बात बन गई है, जिस वजह से हर कोई अपने-अपने तरीके से लोगों को जुटाने में और चीजों को भुनाने में जुटा हुआ है। चाहे वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हो या 'मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ', किन्तु आज भी हम यह कह सकते हैं कि किसी भी प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा का ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसी तरह भ्रष्टाचार और पैसों की जमाखोरी पर किसी भी सरकार को निर्दोष करार दे देना समझदारी का काम नहीं होगा। आपको बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यह स्वीकारा था कि समाजवादी पार्टी के सरकार में भ्रष्टाचार होता था।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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