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ओपिनियन

Mother’s Day 2021: कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि “कुमाता” न भवति

पूरा विश्व इस एक दिन को मां के दिन के रूप में मना कर, मां के प्रति अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने की एक छोटी सी कोशिश करता है।

पूरा विश्व मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे के रूप में मनाता है। (NewsGramHindi)

कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति

(अर्थात: संतान बुरी हो सकती है। माता कुमाता (बुरी) नहीं हो सकती।)


कहा जाता है कि प्रेम जाहिर करने का कोई दिन नहीं होता है और मां का स्थान तो संसार में सबसे ऊंचा है। मां से प्यार करने का कोई एक दिन हो ही नहीं सकता है। परन्तु मां, जो निस्वार्थ भाव से हमें प्यार करती है। अपना हर दिन, हर पल बलिदान स्वरूप हम पर निछावर करती हैं और उनके प्रति इस प्रेम, आदर को व्यक्त करने के लिए कुछ प्रान्तों को छोड़ कर पूरा विश्व आज के दिन को मदर्स डे (Mother’s Day) के रूप में मना रहा है। मां के द्वारा किए गए हर दिन हर महीने हर साल के प्रेम और त्याग को एक दिन में समेट पाना तो नामुमकिन है। लेकिन पूरा विश्व इस एक दिन को मां के दिन के रूप में मना कर, मां के प्रति अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने की एक छोटी सी कोशिश जरूर करता है। 

माँ की ममता और उनके आंचल की महिमा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। कोई भी धर्म हो या संस्कृति हो उसमें मां के अलौकिक गुणों का उल्लेखनीय वर्णन मिलता है। हमारे हिन्दू धर्म में देवियों को मां कहकर संबोधित किया जाता है। हमारे वेद, पुराण, महाकाव्य आदि सब मां की अपार महिमा के गुणगान करते हैं। विद्वानों, ऋषियों, साहित्यकारों आदि सभी ने मां के प्रति अपनी अनुभूतियों को कलमबद्ध करने का सुंदर प्रयास किया है और करते आ रहे हैं।

माँ की ममता और उनके आंचल की महिमा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। (Pexels)

मां मात्र एक शब्द नहीं है। यह एक ऐसा मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से सभी पीड़ाओं का नाश हो जाता है। माना जाता है कि अमेरिका (America) में आधुनिक मदर्स डे की शुरुआत सबसे पहले हुई थी। जार्विस नाम की एक महिला चाहती थी कि इस एक दिन को माताओं के लिए याद किया जाए। यह इच्छा उनकी अपनी मां ने व्यक्त की थी। जार्विस ने अपनी माता के निधन के बाद इस दिन को मदर्स डे के रूप में मनाया। जार्विस द्वारा मां के सम्मान के रूप में इस दिन की शुरुआत की गई थी। जिसे आज देश – विदेश में हर जगह अलग – अलग रूप में मनाया जाता है। 

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दिवस एक मनाने के रूप अनेक!

अमेरिका व भारत सहित कई अन्य देशों में मई के दूसरे रविवार को “मातृ दिवस” मनाया जाता है।

नेपाल में वैशाख कृष्ण पक्ष में “माता तीर्थ उत्सव” के रूप में मनाया जाता है।

यूरोपीय देशों में “मद्रिंग सन्डे” के रूप में मनाया जाता है। 

इंडोनेशिया में 22 दिसंबर को मातृ दिवस मनाया जाता है।

यह दिन उस सच को स्मरण करने का है कि यदि आपके जीवन में सबसे अधिक कोई आपसे प्रेम करता है तो वो आपकी मां है। भाषाई दृष्टि से भले ही मां के विभिन्न रूप हैं। लेकिन वात्सल्य की दृष्टि से सभी एक समान होती हैं। 

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जैसा कि राष्ट्र ने 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस(National Girl Child Day) मनाया, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री(Union Minister of Women and Child Development) श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी(Smriti Zubin Irani) ने देशवासियों से देश की बेटियों की सराहना करने और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाकर उन्हें प्रोत्साहित करने और एक समावेशी निर्माण के लिए लिंग विभाजन को पाटने और समान समाज का संकल्प लेने का आह्वान किया।

"शिक्षित करें, प्रोत्साहित करें, सशक्त करें! आज का दिन हमारी लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का दिन है। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर, जैसा कि हम अपनी बेटियों की उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं, हम एक समावेशी और समान समाज के निर्माण के लिए लिंग भेद को पाटने का संकल्प लेते हैं”, ईरानी ने अपने ट्वीट संदेश में कहा।

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गणतंत्र दिवस समारोह(Republic Day Celebration) हमेशा संस्कृति का पर्याय होते हैं, क्योंकि इस दिन विभिन्न राज्यों की झांकियों को नई दिल्ली में राजपथ पर परेड के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। दर्शकों का स्वागत रंग-बिरंगे छींटों और देश की विविधता के प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व के साथ किया जाता है।

इस वर्ष, भारतीय गणराज्य के 73वें वर्ष के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) को दो अलग-अलग कपड़ों में देखा गया - जो देश के दो अलग-अलग राज्यों से संबंधित हैं - जिनका पारंपरिक महत्व है।

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पंजाब(Punjab) में जहां एक तरफ आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी(Aam Aadmi Party) एक बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर इसी पार्टी के एक पूर्व सदस्य ने एक वेब सीरीज के ज़रिये इस पार्टी के भीतर छिपे काले सच को बाहर लाने की कोशिश की है। वेब सीरीज का नाम है ट्रांसपेरेंसी : पारदर्शिता(Transparency : Paardarshita) है, जोकि डॉ मुनीष रायजादा(Dr Munish Raizada द्वारा निर्देशित और निर्मित है। डॉ रायजादा शिकागो में एक डॉक्टर के तौर पर कार्यरत हैं और कुछ समय पहले तक आम आदमी पार्टी के लिए काम भी करते थे, पर जैसे ही उन्होंने यह देखा की आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतो से भटक रही है तो उन्होंने इसके खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।

मीडिया एजेंसी IANS से फ़ोन पर बातचीत करते हुए डॉ रायजादा ने बताया, "पारदर्शिता एक राजनीतिक वेब सीरीज है, इसलिए हमने पहले इसके ज़्यादा प्रचार और प्रसार के बारे में नहीं सोचा, परंतु जब बात आई इसे समाज के हर तबके तक पहुंचाने की तो फिर हमें यूट्यूब का ख्याल आया।" पारदर्शिता वेब सीरीज का पहला एपिसोड 17 जनवरी को यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया था।

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