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हैरिस सुल्तान: जानिए आखिर क्यों उन्होंने इस्लाम को छोड़ा|

धर्म कोई भी हो, उसका जीवन में होना आवश्यक है। फिर आखिर क्यों हैरिस सुल्तान ने अपने धर्म को छोड़ दिया? ऐसे कौन से तर्कों ने उनके मस्तिष्क में जन्म लिया?

हैरिस सुल्तान (Harris Sultan) ने एक पुस्तक की रचना की है, जिसका नाम है “The Curse Of God: Why I Left Islam” (NewsGramHindi, साभार: सोशल मीडिया)

आज हम बात करेंगे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में, जिनका मुस्लिम धर्म से संबंध होने के बावजूद उन्होंने अपने धर्म को त्याग दिया और एक पुस्तक की रचना भी की, जिसका नाम है “द कर्स ऑफ गॉड: वाय आई लेफ्ट इस्लाम” (The Curse Of God: Why I Left Islam) 

हैरिस सुल्तान, पाकिस्तान (Pakistan) मूल के एक ऑस्ट्रेलियाई पूर्व मुस्लिम हैं। हैरिस लाहौर, पाकिस्तान से हैं। उनका जन्म एक पारंपरिक और मुस्लिम परिवार में हुआ। हैरिस बचपन से ही एक धर्मनिष्ठ मुसलमान थे। नियमित रूप से दिन में पांच बार नमाज अदा करना। रमजान के महीनों में रोजे रखना आदि| वह मुस्लिम धर्म से संबंधित सभी नियमों का पूरी निष्ठा और ईमानदारी से पालन करते थे। 


लेकिन धीरे – धीरे उनके तर्कों और सवालों ने उनके अन्दर एक गहरी समझ को जन्म दिया। जिसके बाद अंततः उन्होंने अपना धर्म त्याग दिया। हम सभी जानते हैं, धर्म कोई भी हो, उसका जीवन में होना आवश्यक है। धर्म के माध्यम से ही हमें अपनी वास्तविक पहचान मिलती है। फिर आखिर क्यों हैरिस सुल्तान ने अपने धर्म को छोड़ दिया? ऐसे कौन से तर्कों ने उनके मस्तिष्क में जन्म लिया? 

हैरिस सुल्तान (Harris Sultan) ने एक पुस्तक की रचना की है, जिसका नाम है “The Curse Of God: Why I Left Islam” यह पुस्तक सामान्य रूप से धर्म और विशेष रूप से इस्लाम धर्म का आलोचनात्मक विश्लेषण है। इस पुस्तक में इस्लाम के बारे में हैरिस की गहरी समझ, सरलतम शैलियों और तर्क सहित इस्लाम की खामियों को समझाने की कोशिश की गई है। 

हैरिस बताते हैं कि, जब वह 9 या 10 साल के थे, तभी से उन्होंने इस्लाम धर्म की व्यावहारिकता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था। वह अपनी मां से ईश्वर के बारे में पूछा करते थे। जैसे ईश्वर कहाँ से आये हैं? उन्होंने संसार की रचना क्यों की? लेकिन उनकी मां हमेशा बोलती थीं कि यह सब अल्लाह का दिया हुआ है। इसके अतिरिक्त उनके पास और कोई जवाब नहीं था। मुस्लिम (Muslim) बहुल समाज में सवाल पूछना जितना आसान है, जवाब मिलना उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण। इस्लाम के विषय में तर्क – वितर्क करने वालों को अक्सर गंभीर परिणामों को भी भुगतना पड़ता है। लेकिन हैरिस ने अपनी पुस्तक में चतुराई, बुद्धिमत्ता और ईमानदारी के साथ इस्लाम का आलोचनात्मक विश्लेषण किया है। 

हैरिस ने रिचर्ड डॉकिन्स (Richard Dawkins) का भी उल्लेख किया है कि, उन्होंने उनकी किताब “The God Delusion” को पढ़ा और बताया कि, कैसे इस पुस्तक ने मुझे धार्मिक रूप से इतर तर्क के रूप में सोचने के लिए प्रेरित किया। (NewsGramHindi, साभार: Wikimedia Commons)

जब हैरिस को उनके सवालों के जवाब नहीं मिले तो उन्होंने विज्ञान का रास्ता अपनाया। “मल्टीपल यूनिवर्स थ्योरी” के बारे में पढ़ना शुरू किया। ईश्वर को विज्ञान के माध्यम से समझने का प्रयास किया और हैरिस ने विज्ञान को ईश्वर की धारणा के खिलाफ एक सबूत और तर्क के रूप में देखा। हैरिस ने रिचर्ड डॉकिन्स (Richard Dawkins) का भी उल्लेख किया है कि, उन्होंने उनकी किताब “The God Delusion” को पढ़ा और बताया कि, कैसे इस पुस्तक ने मुझे धार्मिक रूप से इतर तर्क के रूप में सोचने के लिए प्रेरित किया। हैरिस कहते हैं, धर्म का केवल एक विकल्प है, “विज्ञान” जो धर्म द्वारा बताई गई प्राकृतिक दुनिया और प्रक्रियाओं को रहस्यमयी बनाने के बजाय हमें हमारे प्रश्नों के जवाब देती है। 

हैरिस बताते हैं कि, उनके जीवन में एक ऐसा समय आया जब “भगवान ने किया या बनाया” यह शब्द उनके लिए कोई मायने नहीं रखता था। अपने प्रश्नों को ढूंढने के लिए हैरिस ने बड़े पैमाने पर शोध करना शुरू किया। उन्होंने कई बार कुरान और तफसीर का अध्ययन किया और इस्लाम धर्म की वैधता को समझने के लिए उन्होंने तीन प्रश्न पूछे। 

पहला क्या उस ईश्वर के पक्ष में कोई प्रमाण है? दूसरा क्या इस धर्म में दर्शायी गई नैतिकता अच्छी है? तीसरा क्या इस धर्म में विज्ञान सही है यानी क्या यह विज्ञान के नियमों पर खरी उतरती है? 

इन तीनों ही सवालों ने हैरिस को इस्लाम धर्म से दूर कर दिया। इस्लाम की बुनियादी खामियों को स्पष्ट करते हुए हैरिस बताते हैं कि, अरबों आकाशगंगाओं के निर्माता अपने निजी जीवन में क्या करते हैं? अगर हम उनकी पूजा नहीं करते हैं, तो वह इतना क्रोधित क्यों हो जाते है, नरक में यातना देने की बात क्यों करते हैं? उसका स्वभाव एक बच्चे जैसे क्यों है? यह कैसे देवता है जो कहता है, मेरी पूजा करो नहीं तो मैं तुम्हें हमेशा के लिए नरक में जला दूंगा। आखिर उसे पूजा की आवश्यकता क्यों है? वो जो ईश्वर चाहता है कि, हम उस पर आंख मूंद विश्वास करें, उसके अस्तित्व का कोई परिमाण क्यों नहीं है?

हैरिस ने अपनी पुस्तक में बताया है कि, कुरान में विभिन्न निरर्थक दावे शामिल हैं, जिनका लोग बिना स्पष्टीकरण के पालन करते हैं। वह कहते हैं कि, कुरान (Quran) शराब पीना, सूअर का मांस खाना, संगीत सुनना, शादी से पहले सेक्स करना आदि का खंडन करता है। लेकिन इन दावों का समर्थन करने के लिए कोई तर्क नहीं देता है।

हैरिस सुल्तान बताते हैं कि, इस्लाम (Islam) के विषय में अपने विचारों को सार्वजनिक करना आसान नहीं था| (NewsGramHindi, साभार: सोशल मीडिया)

हैरिस बताते हैं कि, इस्लाम, मुस्लिम पुरुषों को यौन उत्पीड़न, बलात्कार, काफ़िर महिलाओं यानी गैर मुस्लिम महिलाओं को जबरन धर्म परिवर्तित कराने के लिए प्रोत्साहित करता है। महिलाओं का अपहरण कर, उनसे मांग करते हैं कि, वह या तो इस्लाम को अपना ले या उन्हें गुलामों के हाथ बेच दिया जायेगा। इस्लामिक परंपरा में सबसे प्रसिद्ध बयानबाजी यह मिलती है कि, इस्लाम ही एकमात्र धर्म है जो महिलाओं को सम्मान देता है। वहीं कुरान की आयतों में पुरुषों को महिलाओं से श्रेष्ठ बताया गया है। उन्हें महिलाओं का रक्षक बताया गया है। 

यह भी पढ़ें :- डॉ भीम राव अंबेडकर के ‘हिंदू धर्म’ और ‘स्वतंत्रता’ से जुड़े आखिर क्या राज़ हैं?

हैरिस सुल्तान बताते हैं कि, इस्लाम (Islam) के विषय में अपने विचारों को सार्वजनिक करना आसान नहीं था, लोग बोलते भी है कि, तुम जो सोचते हो उसे अपने तक क्यों नहीं रखते। मेरी मां भी नहीं चाहती थीं कि, मैं यह किताब लिखूं। उन्हें डर था कि, कोई मुझे मार डालेगा। हालांकि उनके साथ हुआ भी। ब्रिटेन के एक मुस्लिम ब्लॉगर ने उन्हें और उनके परिवार को मार डालने की धमकी भी दी थी। 

बहराल, हैरिस सुल्तान की यह किताब “The Curse Of God: Why I Left Islam” सामान्य तौर पर धर्म, विशेष रूप से इस्लाम की तीखी आलोचना है। यह मुसलमानों और गैर मुसलमानों दोनों में समान रूप से इस्लाम के बारे में कुछ गलतफहमियों को दूर करता है। इस पुस्तक का उद्देश्य उदारवादी धार्मिक लोगों तक पहुंचना है। 

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