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राजनीतिक भ्रष्टाचार को गाने के माध्यम से उजागर करने वाला यह गीत, क्या कभी आपने सुना है?

क्या आपने कभी राजनीति से जुड़ा कोई गाना सुना है? ऐसा गाना जो सत्ताधारियों की असली तस्वीर को शब्दों में पिरो कर बखूबी बयान कर सके?

“ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता” वेब सीरीज का नया गीत एलबम| (Transparency)

हम सभी की जिंदगी में गीत – संगीत का अपना महत्व है। यह हमारे जीवन में एक अभिन्न और आवश्यक भूमिका निभाता है। कुछ लोग पढ़ाई के दौरान गाने सुनते हैं। घूमते – फिरते, यात्रा के दौरान, घरों में काम करने के दौरान सभी लोग किसी न किसी तरीके से गाने को सुनते हैं और आनंद लेते हैं। 

गीत या गाने भी कई प्रकार के होते हैं। शास्त्रीय गीत, पॉप गाने, रॉक गाने, रैप गाने, नृत्य गाने, प्रेम गीत आदि। आप सभी ने इन सभी प्रकार के गानों को सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी राजनीति से जुड़ा कोई गाना सुना है? ऐसा गाना जो सत्ताधारियों की असली तस्वीर को शब्दों में पिरो कर बखूबी बयान कर सके? राजनीतिक भ्रष्टाचार को गाने के माध्यम से उजागर करने वाला गीत। क्या कभी सुना है आपने? तो चलिए आज जानते हैं ऐसे ही कुछ गीतों के बारे मेंं। 


डॉ मुनीश रायज़ादा (Dr. Munish Raizada) द्वारा निर्मित और निर्देशित “ट्रांसपरेंसी: पारदर्शिता” वेब सीरीज (Transparency: Pardarshita web series) 2020 में रिलीज हुई एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज है। जिसमें दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी, आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली का गहन विश्लेषण किया गया है। कैसे पार्टी सत्ता में आई। जनता से कई झूठे वादे किए। जहां पार्टी ने कहा था, हम एक – एक पैसे का हिसाब देंगे। वहीं आगे चलकर सत्ता के लालच में पार्टी ने “चंदे की लिस्ट” को वेबसाइट से हटा दिया। चंदे की पारदर्शिता के नाम पर सारा चंदा निगल बैठी। जिसका जवाब या हिसाब तक नहीं दिया। जहां पार्टी ने कहा था हम दिल्ली को हर स्तर पर एक बेहतर राज्य बनाएंगे। दिल्ली की यमुना नदी को लंदन झील सा बनाएंगे। आज वो सभी बातें केवल बातें भर रह गई हैं। जनता को और समाज को आइना दिखाने वाले इस वेब सीरीज में ऐसे तीन सुंदर गीतों को स्थान दिया गया। जो दिल्ली और दिल्लीवासियों के साथ हुए छल को बखूबी बयान करते हैं। 

ट्रांसपरेंसी: पारदर्शिता वेब सीरीज के लिए जो पहल गाना लिखा गया वह “चंदे” पर आधारित है। यह गान राजनीतिक फंडिग और कैसे आम आदमी पार्टी ने चंदे के नाम पर घोटाला किया है, उसके बारे में बताता है। इस गाने को जाने – माने संगीतकार उदित नारायण (Udit Narayan) जी द्वारा अपनी आवाज दी गई है। इस गाने को प्रवेश मल्लिक (Pravesh Mallik) द्वारा कंपोज किया गया है और अन्नू रिज़वी ने इसे लिखा है। 

वेब सीरीज के लिए जो अगला गाना लिखा गया वो दिल्ली की तस्वीर को दिखाता है। दिल्ली के दर्द से उसकी दयनीय स्थिति से अवगत कराता है। राष्ट्रीय राजधानी होने के बावजूद भ्रष्टाचार के चलते कैसे उसका बुरा हाल है इन सभी को गाने में बयान किया गया है। और दिल्ली वालों को नींद से जगाने के लिए कैलाश खेर (Kailash Kher) ने इस गीत को अपनी आवाज दी जिसका नाम है “बोल रे दिल्ली बोल।” इस गाने को भी प्रवेश मल्लिक ने कंपोज किया है और अन्नू रिज़वी (Annu Rizvi)  ने इसे लिखा है। 

यह भी पढ़ें :- TRANSPARENCY WEB SERIES : स्वराज से लेकर भ्रष्टाचार तक का सफर

अगला और अंतिम गीत जो वेब सीरीज के लिखा गया उसका संबद्ध “गांधी” जी है। गांधी जी से प्रेरणा लेते हुए इस गीत को वेब सीरीज में स्थान दिया गया है। नरसी मेहता का अमर गीत “वैश्णव जन तो” वेब सीरीज में इस गीत को शास्त्रीय संगीत में माहिर सवानी मुद्गल (Sawani Mudgal) ने अपनी सुरीली आवाज दी है। और इस गीत को भी प्रवेश मल्लिक द्वार कंपोज किया गया है। 

तो आइए सुनते है इन तीनों गीतों को “ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता” वेब सीरीज के नए गीत एल्बम (Song Album) के माध्यम से। जिसमें पूर्णिमा खरे भी हमें इन गीतों के अद्भुत सफर से रूबरू कराती हैं।

YouTube Video Link: https://youtu.be/Ta_RMPN4-mc 

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
जैसा की आपको पता है कि इस साल होने वाले 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव सभी पार्टियों की नाक की बात बन गई है, जिस वजह से हर कोई अपने-अपने तरीके से लोगों को जुटाने में और चीजों को भुनाने में जुटा हुआ है। चाहे वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हो या 'मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ', किन्तु आज भी हम यह कह सकते हैं कि किसी भी प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा का ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसी तरह भ्रष्टाचार और पैसों की जमाखोरी पर किसी भी सरकार को निर्दोष करार दे देना समझदारी का काम नहीं होगा। आपको बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यह स्वीकारा था कि समाजवादी पार्टी के सरकार में भ्रष्टाचार होता था।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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