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By: विवेक त्रिपाठी


किसानों की आय दोगुना करने के चल रहे प्रयासों के बीच यूपी की योगी सरकार अब ड्रैगन फ्रूट महोत्सव कराने की तैयारी कर रही है। अभी झांसी में स्ट्रॉबेरी महोत्सव कर चुकी है। ड्रैगन फ्रूट में जबरदस्त सेहत खजाना पाया जाता है। जो कि किसानों के मुकद्दर को बदलने में कारगर साबित होगा।

ड्रैगन फ्रूट फल के साथ दवा भी है। एंटीऑक्सीडेंट, बसा रहित, फाइबर से भरपूर ड्रैगन फ्रूट में कैल्शियम, मैग्नेशियम और आयरन के अलावा प्रचुर मात्रा में विटामिन सी एवं ए भी पाया जाता है। अपनी इन्ही खूबियों के नाते इसे सुपर फ्रूट भी कहा जाता है। मर्जी आपकी आप इसे सीधा खाइए या सलाद, जैम, जेली या जूस के रूप में। हर रूप में ये आपकी सेहत को सलामत रखेगा। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा। सुगर के नियंत्रण और रोकथाम में भी इसे प्रभावी पाया गया है। बाकी विटामिन्स और खनिजों के भी अपने लाभ हैं। इन खूबियों के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मुरीद हैं।

नवम्बर में मुख्यमंत्री ने ड्रैगन फ्रूट किसानों से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री की मंशा है कि खेतीबाड़ी से संबधित ऐसे उपयोगी फलों की खूबियों को लोग जानें। इनकी मांग निकले। किसान इनकी खेती करें। उनको अपने उत्पाद का वाजिब दाम मिले, इसके लिए वह उनका स्थानीय स्तर पर महोत्सव भी करवाना चाहते हैं। झांसी में स्ट्रॉबेरी महोत्सव हो चुका है। गोरखपुर में सुनहरी सकरकन्द महोत्सव होना है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ड्रैगन महोत्सव आयोजित करने का भी निर्देश दे चुके हैं। आने वाले दिनों में कुशीनगर में केला, प्रतापगढ़ में आंवला, प्रयागराज में अमरूद महोत्सव का आयोजन भी सरकार कर सकती है। ये सभी उत्पाद संबधित जिलों के एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) हैं।

ड्रैगन फ्रूट में जबरदस्त सेहत खजाना पाया जाता है।(Pixabay)

ड्रैगन फ्रूट, सुनहरी सकरकन्द ओर स्ट्रॉबेरी की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन की बात कार्यक्रम में भी कर चुके हैं। ड्रैगन फ्रूट को पिताया फल के नाम से भी जानते हैं, इसे ज्यादातर मेक्सिको और सेंट्रल एशिया में खाया जाता है। इसका टेस्ट काफी हद तक तरबूज जैसा होता है। देखने में यह नागफनी जैसा दिखता है।

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ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले सुलतानपुर जिले के लम्भुआ ग्राम कोयरा खुर्द के गया प्रसाद सिंह उर्फ मुरारी सिंह ने कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की थी। प्रधानमंत्री की मन की बात में भी इसकी चर्चा की थी। इसके बाद सुर्खियों में आए ड्रैगन फ्रूट की खेती बाराबंकी, कुशीनगर के भी कुछ प्रगतिशील किसान करने लगे हैं। गया प्रसाद सिंह के मुताबिक ड्रैगन फ्रूट की आर्गेनिक तरीके से प्रदेश में बड़े स्तर पर खेती की जा सकती है। इससे किसानों की आय 8 गुना तक बढ़ सकती है। वह खुद भी ऑर्गेनिक तरीके से इसकी खेती करते हैं। झांसी के हरदीप चावला, गुरुलीन चावला भी जैविक तरीके से ही स्ट्राबेरी की खेती करते हैं। मुख्यमंत्री की मंशा है भविष्य में आयोजित होने वाले महोत्सवों में संबधित उत्पादों के जैविक खेती पर ही जोर दिया जाए।

सब्जी वैज्ञानिक डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक इसकी खेती अधिकतम 40 डिग्री और न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर की जा सकती है। किंतु 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त होता है। ड्रैगन की खेती वाली भूमि पर उचित जल निकासी जरूरी है। प्रजाति के आधार पर ड्रैगन फ्रूट लाल-गुलाबी और पीले रंग का हो सकता है। इसकी लताओं का रोपड़ होता है। रोपड़ के समय लाइन से लाइन की दूरी 4 मीटर और पौध से पौध की दूरी तीन मीटर की रखी जाती है। उचित बढ़वार और फलत के लीए रोपड़ के पूर्व गड्ढा तैयार कर 10 किलो सड़ी गोबर की खाद एवं 50 ग्राम एन.पी.के. (नाइट्रोजन, फास्फोरस ओर पोटाश) प्रति गड्ढा में मिलाकर रोपाई करते हैं। ड्रैगन फ्रूट की रोपाई जून-जुलाई एवं सिंचाई का साधन होने पर फरवरी-मार्च में भी कर सकते हैं। इसका पौधा 20 से 25 साल तक फल देता है। इसकी खेती हेतु 7 से 8 फीट ऊंचे सीमेंट के खंभे गाड़ कर तार से मचान बनाया जाता है। रोपाई के दो साल बाद फल आता है।(आईएएनएस)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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