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व्यवसाय

बच्चों से संबंधित उत्पादों की मांग का उच्चतम स्तर

भारत ने पिछले 60 दिनों में कोविड की दूसरी लहर के साथ जो अनुभव किया है, उसे देखते हुए, सामान्य भारतीय परिवार भयभीत और चिंतित है।

कोरोना के दौर में बच्चों में पढ़ाई की ललक बनी रहे इसके अभिभावक कर रहे हैं तयारी।(Pixabay)

भारत में प्रचलित बी.1.617.2 सार्स-सीओवी2 स्ट्रेन की प्रकृति को देखते हुए घर से काम करना और घर पर अधिक समय बिताना साल 2021 के लिए एक हकीकत बन गया है। ये नतीजा लोकलसर्किल के एक सर्वे में सामने आया है। कई उपभोक्ताओं और परिवारों ने इसे महसूस किया है कि वो एक ऐसा सेट अप चाहते हैं जिससे वे घर से प्रभावी ढंग से सभी तरह के काम कर सकें। इस प्रवृति को देखते हुए घरेलू सामान, उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोबाइल फोन, लैपटॉप, डेस्कटॉप, कम लागत वाले प्रिंटर, राउटर, वाई-फाई एक्सटेंडर, वीडियो या वेब कैमरा आदि की मांग बढ़ने की संभावना है। लोकलसर्किल ने कहा, ” व्हाइट गुड्स जैसे एयर कंडीशनर, कूलर आदि के लिए भी डिमांड बढ़ने की संभावना है क्योंकि घर में रहकर काम करने के लिए लोग आरामदायक स्थान चाहते हैं । जैसे ही अनलॉकिंग शुरू होती है वैसे ही रिटेल स्टोर, ऑनलाइन खुदरा आपूर्ति फिर से शुरू हो जाएगी, उन्हें उपरोक्त क्षेत्रों में ऑर्डर में बढ़ोतरी होने की संभावना है।”

भारत ने पिछले 60 दिनों में कोविड की दूसरी लहर के साथ जो अनुभव किया है, उसे देखते हुए, सामान्य भारतीय परिवार भयभीत और चिंतित है। पिछले 60 दिनों के दौरान, कई और परिवारों ने, जिन्होंने 2020 में जरूरत की वस्तुओं की खरीद के लिए होम डिलीवरी मॉडल का उपयोग नहीं किया था, लेकिन अब इसे अपना लिया। चाहे वह ई-कॉमर्स ऐप या स्थानीय रिटेलर वेबसाइट, व्हाट्सएप या फोन पर ऑर्डर देने के लिए हो, उन्हें चीजों को डिलीवर कराने की आदत हो गई है। जैसे ही भारत भर में अनलॉकिंग शुरू होती है, 3 में से 2 घरों के लिए, कम से कम अगले 3 महीनों के लिए जिस चैनल से चीजें खरीदना है, उसमें संपर्क रहित वितरण और सामाजिक दूरियों के मानदंडों का पालन करना अहम साबित होगा। चूंकि स्टोर खोलने की अनुमति है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सभी वस्तुओं के लिए ऑर्डर स्वीकार करना शुरू कर देते हैं। इसलिए बच्चों से संबंधित उत्पादों जैसे कि किताबें, स्टेशनरी, ऑनलाइन क्लास उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप, व्हाइटगुड्स, उपकरणों जैसे घरेलू उपकरणों, घरेलू साज-सामान आदि से काम के उच्चतम स्तर की मांग बढ़ने की संभावना है। ये निष्कर्ष इस क्षेत्र में काम कर रहे एमएसएमई और खुदरा विक्रेताओं के लिए कुछ आशा प्रदान करते हैं क्योंकि राज्य और जिले अनलॉक होंगे और वे व्यवसाय में वापस आ जाएंगे।


बच्चों के लिए घरेलु सामान की मांग तेज हो गई है। (Pixabay)

लोकलसर्किल सर्वे के अनुसार, 3 में से 2 भारतीय परिवारों के लिए, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कॉन्टैक्टलेस होम डिलीवरी अगले 3 महीनों में उनकी खरीदारी के लिए शीर्ष मानदंड होगा। अगले 3 महीनों में 51 प्रतिशत परिवारों के बच्चों के सामान जैसे किताबें, स्टेशनरी, परिधान, ऑनलाइन क्लास उपकरण पर खर्च करने की संभावना है। निष्कर्ष बताते हैं कि 51 प्रतिशत परिवारों के पास अगले 3 महीनों में बच्चों के लिए विभिन्न वस्तुओं को खरीदने की आवश्यकता है। वैकल्पिक रूप से, अगर हम अलग-अलग ‘जरूरी’ उत्पादों के प्रतिशत पर गौर करें तो परिवारों को लगता है कि उन्हें अपने बच्चों के लिए खरीदारी करने की आवश्यकता है। जिसमें 39 प्रतिशत ने कहा कि ‘स्कूल की किताबें, ऑनलाइन कक्षाओं के लिए स्टेशनरी और उपकरण’, 30 प्रतिशत ने कहा ‘अन्य बच्चों की जरूरतें जैसे कि घर में बच्चों को व्यस्त रखने के लिए खिलौने, शौक, आपूर्ति, आदि’, और 27 प्रतिशत ने कहा ‘बच्चों के परिधान, जूते, रेनकोट, आदि’ की जरूरत है।

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इससे पता चलता है कि 40 प्रतिशत परिवारों का मानना है कि उन्हें अगले 3 महीनों में बच्चों के लिए स्कूल की किताबें, स्टेशनरी और ऑनलाइन क्लास के उपकरण खरीदने होंगे। अगले 3 महीनों में 45 प्रतिशत परिवारों के डब्ल्यूएफएच गैजेट्स (मोबाइल फोन, लैपटॉप, आदि), उपकरण, घरेलू सामान आदि पर खर्च करने की संभावना है।(आईएएनएस-SHM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
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ओला इलेक्ट्रिक के स्कूटर।(IANS)

ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि कंपनी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ओला एस1 स्कूटर बेचे हैं। ओला इलेक्ट्रिक का दावा है कि उसने पहले 24 घंटों में हर सेकेंड में 4 स्कूटर बेचने में कामयाबी हासिल की है। बेचे गए स्कूटरों का मूल्य पूरे 2डब्ल्यू उद्योग द्वारा एक दिन में बेचे जाने वाले मूल्य से अधिक होने का दावा किया जाता है।

कंपनी ने जुलाई में घोषणा की थी कि उसके इलेक्ट्रिक स्कूटर को पहले 24 घंटों के भीतर 100,000 बुकिंग प्राप्त हुए हैं, जो कि एक बहुत बड़ी सफलता है। 24 घंटे में इतनी ज्यादा बुकिंग मिलना चमत्कार से कम नहीं है। इसकी डिलीवरी अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और खरीदारों को खरीद के 72 घंटों के भीतर अनुमानित डिलीवरी की तारीखों के बारे में सूचित किया जाएगा।

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अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (IANS)

केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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