Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

उत्तराखंड में बढ़ते गैर-हिन्दू भूमि अतिक्रमण से मची हुई खलबली

पडोसी राज्यों से भारी संख्या में मुसलमान प्रवासियों का अन्तर्वाह राज्य के स्थानीय लोगों की चिंता का मुख्य कारण बन गया है।

नैनीताल में मुस्लिम प्रवासियों की उमड़ रही है भीड़ ।(Wikimedia Commons)

उत्तराखंड में बढ़ते भूमि अतिक्रमण की समस्या ने राज्य को चिंता में डाल दिया है। पड़ोसी राज्यों से लगातार भारी संख्या में मुसलमानों का अन्तर्वाह भूमि अतिक्रमण का मुख्य कारण बन गया है जिसकी वजह से राज्य की गैर-हिन्दू जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य के स्थानीय निवासी इस अन्तर्वाह और इसके प्रभाव से परेशान हो रहे हैं। कोविड में उन्हें ऐसे ही बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा था और उसमे अब जनसंख्या में वृद्धि उनके लिए बड़ी मुसीबत बन गयी है।

रिपोर्ट्स की माने तो उत्तर भारत के लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक नैनीताल में मुस्लिम प्रवासी वहां के स्थानीय लोगों के जीवन में दखलंदाजी कर रहे हैं और साथ ही प्रवासियों के आने से उनका कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। सरकार की खुफिया एजेंसियों के मुताबिक घोड़ों, टैक्सियों, फेरी, टूरिस्ट न्यूज जॉब और रिसॉर्ट को लीज पर देने में मुस्लिम प्रवासियों का दखल नाटकीय रूप से बढ़ा है। इस दखलंदाजी से स्थानीय लोग अपनी नौकरियां गंवा रहे हैं।


रिपोर्ट्स यह भी दावा कर रहीं हैं की मुस्लिम प्रवासी सीआरएसटी कॉलेज के पीछे उच्च पहाड़ी और बारापाथर सहित प्रतिबंधित क्षेत्रों में बने अपने कच्चे घरों को अवैध रूप से पक्के घरों में बदल रहे हैं। स्थानीय लोग लगातार इसकी शिकायत कर रहे की ये मुस्लिम प्रवासी स्थानीय अधिकारियों द्वारा बिना ध्यान दिए जमीन पर अवैध कब्जा करने की भी कोशिश कर रहे हैं। मनमानी इतनी बढ़ गई है की ये प्रवासी नैनीताल में स्थानीय लोगों द्वारा चलाई जा रही छोटी कंपनियों को बार-बार छीन रहे हैं।


land enroachment , muslim emigrants, uttarakhand प्रवासी स्थानीय जमीन पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे।(Wikimedia Commons)


बताया जा रहा की पहाड़ों में जमीन खरीदने और बेचने की उनकी दिलचस्पी भी बढ़ी है और इसलिए उन्होंने अवैध तरीके से जमीन खरीदना शुरू कर दिया है। स्थानीय पुलिस प्रशासन भी उन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही है जिससे उनका दुशाहस और बढ़ता जा रहा।

भूमि जिहाद पर चिंता जताते हुए उत्तराखंड भाजपा नेता अजेंद्र अजय ने भी सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा था। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा पहाड़ियों के भीतर हो रहे भूमि अधिग्रहण और पूजा स्थलों के आयोजन पर आपत्ति जताई थी। एक आधिकारिक सूचना में भाजपा प्रमुख ने कहा था, "राज्य के कुछ क्षेत्रों में तेजी से जनसंख्या वृद्धि के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव आया था, जिसका दुष्प्रभाव कुछ समुदायों के लोगों के प्रवास के रूप में दिखना शुरू हो गया था"।

लैंसडाउन के बीजेपी विधायक दिलीप सिंह रावत ने यहां तक दावा किया कि उत्तराखंड राज्य में हिंदुओं के खिलाफ मुस्लिम प्रवासी आबादी द्वारा 'सांस्कृतिक युद्ध' छेड़ा जा रहा है। सभी की दलीलें सुनने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने इस मुश्किल का संज्ञान लेते हुए एक कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी राज्य में भूमि अतिक्रमण के संबंधित मामले से नजर रखेगी।

यह भी पढ़ें : 28वें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री ने किया देश को सम्बोधित।

मामले के तूल पकड़ने पर नैनीताल के डीएम धीरज गेब्रियल ने यह भरोसा दिलाया कि जनसांख्यिकी में बदलाव और प्रवास की जानकारी के बारे में सरकार के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा और भूमि रजिस्ट्री पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

उत्तराखंड के सीएम ने कहा की राज्य में सांप्रदायिक माहौल बन गया है। राज्य में हुए इस जनसांख्यिकीय बदलाव की जाँच का आदेश देते हुए सीएम ने वादा किया है की यह जाँच निष्पक्ष होगा और यह आश्वासन दिया की किसी एक विशेष संप्रदाय को ध्यान में रखते हुए जाँच नहीं की जाएगी।

By: NewsGram Desk; Edited By: Manisha Singh

न्यूज़ग्राम के साथ Facebook, Twitter और Instagram पर भी जुड़ें!

Popular

गीत 'तेरी मिट्टी' के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का खिताब जीता है।(wikimedia commons)

67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में कई प्रतिभाशाली लोगों को पुरस्कारों से नवाजा गया एसे में बी प्राक ने 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अपने गीत 'तेरी मिट्टी' के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का खिताब जीता है। उन्होंने और भी विजेताओं के साथ इस पल को साझा किया है ये उनके लिए खास पल रहा। गायक ने अपनी बड़ी जीत के बारे में कहा, "यह साल बहुत अच्छा रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा यह पुरस्कार जीतने का पल खास हैं। मैं बहुत खुश हूं। मुझे लगता है कि मैं बहुत खुशनसीब हूं कि हमने एक टीम के साथ ऐसा गीत बनाया जो हमारे राष्ट्र के लिए गौरव के साथ गूंजता है।"

साथ हि वह कहते हैं कि इस पल को वह कभी नहीं भूलेंगे। "आज का दिन मेरे करियर के लिए अनमोल दिन है उन्होंने कहा। हर कलाकार चाहता है कि उसकी सराहना की जाए और राष्ट्रीय पुरस्कार से बड़ा सम्मान कोई नहीं हो सकता।"

 \u092b\u093f\u0932\u094d\u092e \u0915\u0947\u0938\u0930\u0940 2019 की फिल्म केसरी का मुख्य आकर्षण था(wikimedia commons)

Keep Reading Show less

वैश्विक डिजिटल सुरक्षा कंपनी नॉर्टनलाइफ लॉक की तरफ से जारी की गई है रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

वैश्विक डिजिटल सुरक्षा कंपनी नॉर्टनलाइफ लॉक की तरफ से एक रिपोर्ट पेश करी गई है जिसमें कई अहम दावे किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले भारत में पिछले एक तिमाही में औसतन 187,118 ब्लॉक प्रतिदिन 17,214,900 से अधिक साइबर सुरक्षा खतरों को सफलतापूर्वक रोका गया।

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तकनीकी सहायता (technical support) के घोटाले की प्रभावशीलता महामारी के दौरान बढ़ गई है, क्योंकि उपभोक्ताओं की हाइब्रिड वर्क शेड्यूल और पारिवारिक गतिविधियों को प्रबंधित करने के लिए अपने उपकरणों पर निर्भरता बढ़ गई है। साथ ही साथ रिपोर्ट में यह भी सचेत किया गया है कि आगामी छुट्टियों के मौसम के साथ-साथ खरीदारी और चैरिटी से संबंधित फिशिंग हमलों में तकनीकी सहायता घोटाले बढ़ने का अंदेशा है।

Keep Reading Show less

डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे पर रिचार्ज करने के लिए उपयोगकर्ताओं को देने होंगे शुल्क।(Wikimedia Commons)

भारत के टॉप डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे(PhonePe) ने अपनी एक घोषणा में कहा , "मोबाइल रिचार्ज के लिए फोनपे एक प्रयोग चला रहा है, जहां उपयोगकर्ताओं के एक छोटे से वर्ग से 51-100 रुपये के रिचार्ज के लिए 1 रुपये और 100 रुपये से अधिक के रिचार्ज के लिए 2 रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क लिया जा रहा है।"

हालांकि , कंपनी ने यह स्पष्ट किया कि उसके पेमेंट ऐप(PhonePe) पर सभी यूपीआई मनी ट्रांसफर, ऑफलाइन और ऑनलाइन भुगतान (यूपीआई, वॉलेट, क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर) सभी उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त हैं और वे जारी रहेंगे। कंपनी ने कहा कि फोनपे इन लेनदेन के लिए कोई शुल्क नहीं लेता है, और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगा।

Keep reading... Show less