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स्वास्थ्य

हिमाचल ने औषधीय पौधों की खेती पर दिया जोर

प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ हिमाचल प्रदेश, समृद्ध जैविक विविधता के साथ, किसानों की आय के लिए औषधीय पौधों की खेती को सहयोग कर रहा है।

(NewsGram Hindi)

प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ हिमाचल प्रदेश, समृद्ध जैविक विविधता के साथ, किसानों की आय के लिए औषधीय पौधों की खेती को सपोर्ट कर रहा है, जो बड़े पैमाने पर छोटे जोत वाले हैं। आयुष विभाग के तहत राज्य के औषधीय पौधे बोर्ड किसानों को उनकी आय के पूरक के लिए खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत औषधीय पौधों की खेती के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

इसके लिए विभिन्न किसानों के ग्रूप तैयार किए गए हैं। वित्तीय सहायता का फायदा पाने के लिए एक क्लस्टर के पास कम से कम दो हेक्टेयर भूमि होनी चाहिए। प्रत्येक क्लस्टर में 15 किलोमीटर के दायरे में तीन आसपास के गांव शामिल हैं। गिरवी रखी गई भूमि का उपयोग औषधीय पौधों की खेती के लिए भी किया जा सकता है। जनवरी 2018 से 318 किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए 99.68 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।


राष्ट्रीय आयुष मिशन ने साल 2019-20 में राज्य में औषधीय पौधों के घटक के लिए 128.94 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसमें से ‘अतिस’, ‘कुटकी’, ‘कुठ’, ‘शतावरी’, ‘स्टीविया’ और ‘सरपगंधा’ की खेती के लिए 54.44 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। राज्य ने मंडी जिले के जोगिंदर नगर, हमीरपुर जिले के नेरी, शिमला जिले के रोहड़ू और बिलासपुर जिले के जंगल झलेरा में हर्बल गार्डन स्थापित किए हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इन हर्बल उद्यानों में विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों की पूर्ति करने वाले विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे उगाए जा रहे हैं।

आयुर्वेदिक पौधों के लिए जागरूकता फैलाने में जुटा है हिमाचल प्रदेश।(Canva)

आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड ने जोगिंदर नगर में भारतीय चिकित्सा प्रणाली में अनुसंधान संस्थान में उत्तरी क्षेत्र के क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र की स्थापना की है। यह केंद्र छह पड़ोसी उत्तरी राज्यों – पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है। जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए आयुष विभाग द्वारा वृक्षारोपण अभियान ‘चरक वाटिका’ चलाया गया। इस अभियान के तहत 11,526 पौधों के रोपण के साथ 1,167 आयुर्वेदिक संस्थानों में चरक वाटिका की स्थापना की गई। चरक वाटिका का दूसरा चरण 7 जून को शुरू हुआ था।

यह भी पढ़ें: आयुर्वेद से दूर होगी आयरन की कमी

विविध जलवायु परिस्थितियों वाला राज्य चार कृषि-जलवायु क्षेत्रों में वितरित औषधीय पौधों की 640 प्रजातियों का घर है। जनजातीय जिले जैसे किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू और कांगड़ा और शिमला जिलों के कुछ हिस्से, जो 2,500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हैं, अत्यधिक औषधीय पौधों का उत्पादन करते हैं। इनमें से कुछ में ‘पतिस’, ‘बत्सनाभ’, ‘अतिस’, ‘ट्रागेन’, ‘किरमाला’, ‘रतनजोत’, ‘काला जीरा’, ‘केसर’, ‘सोमलता’, ‘जंगली हींग’, ‘चार्मा’ ‘खुरसानी अजवाइन’, ‘पुष्कर मूल’, ‘हौवर’, ‘धोप’, ‘धमनी’, ‘नेचनी’, ‘नेरी’, ‘केजावो’ और ‘बुरांश’ शामिल हैं।(आईएएनएस-SHM)

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कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। (IANS)

वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी और कप्तान विराट कोहली ने गुरूवार को घोषणा की कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ेंगे। उनका ये एलान करोड़ो दिलो को धक्का देने वाला था क्योंकि कोहली को हर कोई कप्तान के रूप में देखना चाहता है । कई दिनों से चल रहे संशय पर विराम लगाते हुए कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। कोहली ने बताया कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 के कप्तानी पद को छोड़ देंगे।

ट्वीट के जरिए उन्होंने इस यात्रा के दौरान उनका साथ देने के लिए सभी का धन्यवाद दिया। कोहली ने बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने वर्कलोड को मैनेज करने के लिए लिया है। उनका वर्कलोड बढ़ गया था ।

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मंगल ग्रह की सतह (Wikimedia Commons)

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मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अध्ययन में यह पता लगा है कि मानव रक्त से एक प्रोटीन, मूत्र, पसीने या आँसू से एक यौगिक के साथ संयुक्त, नकली चंद्रमा या मंगल की मिट्टी को एक साथ चिपका सकता है ताकि साधारण कंक्रीट की तुलना में मजबूत सामग्री का उत्पादन किया जा सके, जो अतिरिक्त-स्थलीय वातावरण में निर्माण कार्य के लिए पूरी तरह से अनुकूल हो।

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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली (instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री का लोहा इन दिनों हर जगह माना जा रहा है । इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने कहा है कि भारतीय कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री हाल के दिनों में टेस्ट क्रिकेट के महान समर्थक और प्रमोटर हैं। साथ ही उन्होंने कोहली की तारीफ भी की खेल को प्राथमिकता देते हुए वो वास्तव में टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं।"
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने इस बात पर अपनी चिंता व्यक्त की ,कि भविष्य में टेस्ट क्रिकेट कब तक प्राथमिकता में रहेगा। उन्होंने कहा, "चिंता यह है कि यह कब तक जारी रहेगा। उनका यह भी कहना है किइसमें कोई संदेह नहीं है कि जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं और नई पीढ़ी आती है, मेरे जैसे लोगों को जिस तरह टेस्ट क्रिकेट से प्यार है यह कम हो सकता है और यह हमारी पुरानी पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है।"

\u0930\u0935\u093f \u0936\u093e\u0938\u094d\u0924\u094d\u0930\u0940 भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और वर्तमान कोच रवि शास्त्री (wikimedia commons)

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