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इतिहास

क्या संस्कृति को बचाने पर ज़ोर केवल भाषणों में ही दिया जाएगा?

हिंदी शब्द एक जाल के समान है जिसमें जितना उलझोगे उतना ही सुख पाओगे। मगर आज के दौर में हिंदी को एक बोझ की तरह समझा जा रहा है और लोग इससे पीछा छुड़ाने की कोशिश में हैं।

हिंदी, मातृभाषा (सांकेतिक चित्र, Canva)

“साहित्य की महिमा गान सुनाने कई आए कई अमर हुए, इतिहास गवाही है सबकी कि साहित्य ने इनको जन्म दिए”

हिंदी ना केवल एक भाषा है बल्कि यह हर एक तबके तक अपने विचार पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण साधन है।


“हिन्द से हिंदुस्तान हुए, भारत भरत के नाम हुए, है कमाल इस भाषा का, वीर वीरांगनाओं के बखान हुए”

आज का यह दौर दोहरा मुखौटा लगाए घूम रहा है, एक तरफ तो स्कूलों की तरफ से कहा जाता है कि हम संस्कृति को बचाने की कोशिश कर रहे हैं मगर उन्ही स्कूलों में हिंदी बोलने पर जुर्माना लगाया जाता है। क्या हिंदी की यही महत्ता रह गई है? क्या उस भाषा पर भी अब जुर्माना लगाया जाएगा जिसे हमने मातृभाषा का दर्जा  दिया है? 

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हिंदी साहित्य में 10 रस के बखान किए गए हैं, जिन्हे श्रृंगार रस, रौद्र रस, हास्य रस, वीर रस आदि नामों से जाना जाता है और हर रस के अपने-अपने महत्व हैं। इन सभी का इस्तेमाल या तो भाषणों में किया जाता है या काव्य लेखन में। मगर आज के तथाकथित विद्वान अंग्रेजी से पीछा छुड़ा पाएँ तभी कुछ हो सकता है।  

माँ भारती कई वीरों और वीरांगनाओं की जन्मभूमि एवं मरणभूमि रहीं हैं और आगे भी रहेंगी, कई शौर्य गाथाओं की यहाँ गवाही दी गई है और हिंदी ही एक माध्यम है जिससे हम भगत सिंह और चंद्र शेखर आज़ाद जैसे वीरों के बलिदान और शौर्य को पुनः जीवित कर सकते हैं और कुछ चुनिंदा युवा एवं विद्वान इस प्रयास में रात दिन लगे हुए हैं।

हिंदी भाषा का सटीक आंकलन। (Twitter)

 दुःख इस बात का है कि हिंदी जैसे पवित्र भाषा को कुछ मूर्ख एवं ढोंगी कवियों ने अपनी जागीर समझ ली है। अपने लिखे वाहियात गालियों और घिनौनी पंक्तियों को कविता कहते हैं और सोशल मीडिया पर बड़े शान से खुद को कवि कहलाते हैं। 

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यह हमारा कर्तव्य है कि अपनी मातृभाषा की रक्षा में कोई कसर ना छोड़ें, नहीं तो केवल गालियाँ ही सुनने को मिलेंगी और शब्दों की हत्या हो चुकी होगी। 

दोस्तों! हिंदी के लिए कोई एक दिवस नहीं होता हिंदी स्वयं में त्यौहार है, जिसे जितना समझेंगे उतना ही आनंद मिलेगा।  

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प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन (wikimedia commons)

हमारे देश में लव जिहाद के जब मामले आते है , तब इस मुद्दे पर चर्चा जोर पकड़ती है और देश कई नेता और जनता अपनी-अपनी राय को वयक्त करते है । एसे में एक प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने सोमवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होनें कहा कि यह मुस्लिम समुदाय नहीं बल्कि ईसाई हैं जो देश में धर्मांतरण और लव जिहाद में सबसे आगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के सहयोगी और भारत धर्म जन सेना के संरक्षक वेल्लापल्ली नतेसन नें एक कैथोलिक पादरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी , जिसमे कहा गया था हिंदू पुरुषों द्वारा ईसाई धर्म महिलाओं को लालच दिया जा रहा है। नतेसन नें पाला बिशप जोसेफ कल्लारंगट की एक टिप्पणी जो कि विवादास्पद "लव जिहाद" और "मादक जिहाद" की भी जमकर आलोचना की और यह कहा कि इस मुद्दे पर "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है"।

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महंत नरेंद्र गिरि (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जांच के बाद सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा ''यह एक दुखद घटना है और इसी लिए अपने संत समाज की तरफ से, प्रदेश सरकार की ओर से उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए में स्वयं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। अखाड़ा परिषद और संत समाज की उन्होंने सेवा की है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के विकास को लेकर तत्पर रहते थे। साधु समाज, मठ-मंदिर की समस्याओं को लेकर उनका सहयोग प्राप्त होता था। उनके संकल्पों को पूरा करने की शक्ति उनके अनुयायियों को मिले''

योगी आदित्यनाथ ने कहा '' कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था। एक-एक घटना के पर्दाफाश होगा और दोषी अवश्य सजा पाएगा। मेरी अपील है सभी लोगों से की इस समय अनावश्यक बयानबाजी से बचे। जांच एजेंसी को निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने दे। और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा उसको कानून की तहत कड़ी से कड़ी सजा भी दिलवाई जाएगी।

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By: कम्मी ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार, हरियाणा

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