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इतिहास

“हिन्दी पत्रकारिता दिवस 2021”

हिंदी का प्रथम समाचार पत्र 30 मई 1826 में निकला था, जिसका नाम था "उदंत मार्तण्ड"। इसलिए हर साल 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वतन्त्रता के बाद से जनता के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को लेकर भारतीय पत्रकारिता ने एक नए युग में प्रवेश किया था। (NewsGramHindi)

पूरे विश्व में पत्रकार और मीडिया जगत के लोगों को जनता की आवाज माना जाता है। देश – दुनिया की खबरों को जनता तक पहुंचाने का काम पत्रकार, मीडिया, कई साप्ताहिक मैगज़ीन और समाचार पत्र करते हैं और जनता की आवाज को देश – दुनिया और वहां की सरकार तक पहुंचाने का काम भी यही लोग करते हैं। 

स्वतन्त्रता के बाद से जनता के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को लेकर भारतीय पत्रकारिता ने एक नए युग में प्रवेश किया था। आजादी के बाद से ही सरकार और प्रेस के संबंधों का एक नया अध्याय शुरू हुआ था। आजादी की लड़ाई के समय “प्रेस इमरजेंसी अधिनियम” के अंतर्गत राष्ट्रीय समाचार पत्रों को बुरी तरह कुचल दिया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पहली बार पत्रकारिता जगत ने खुली हवा में सांस ली थी। 


लेकिन अगर भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों के इतिहास की बात करें तो यह 1818 से प्रारंभ हो जाता है। बंगाली में निकले दो समाचार पत्र “दिग्दर्शन” और “समाचार दर्पण” थे| बंगाली भाषा के बाद गुजराती भाषा में भी समाचार पत्रों की शुरुआत की गई। जिसमें से पहला गुजरती पत्र “बंबई समाज” था, जो 1823 में प्रकाशित हुआ था। हिंदी भाषा की ओर रुख करेंगे तो हिंदी का प्रथम पत्र 30 मई 1826 में निकला था, जिसका नाम था “उदंत मार्तण्ड”। इसलिए हर साल 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस (Hindi Journalism Day) के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत पंडित जुगल किशोर ने कलकत्ता से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था।

उदंत मार्तण्ड का शाब्दिक अर्थ होता है “समाचार सूर्य” अपने नाम की भांति उदंत मार्तण्ड हिंदी की समाचार दुनिया के लिए सूर्य के समान था। यह समाचार पत्र एक ऐसे समय में प्रकाशित हुआ था, जब हिंदी भाषाओं की अपनी भाषा के एक समाचार पत्र की आवश्यकता थी। 

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हालांकि उदंत मार्तण्ड (Udant Martand) समाचार पत्र को कई उतार – चढ़ाव का सामना करना पड़ा था। बंगाल में हिंदी भाषा बोलने वालों की संख्या कम होने के कारण यह पत्र ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल पाया था। उस समय हिंदी भाषा क्षेत्रों तक इस समाचार पत्र को पहुंचाने के लिए डाक का इस्तेमाल किया जाता था, जिसका किराया काफी अधिक होता था। जिस वजह से उदंत मार्तण्ड समाचार पत्र ज्यादा लंबे समय तक कायम नहीं रह पाया था। 

परंतु इन सब के बावजूद भी उदंत मार्तण्ड समाचार पत्र ने समाज में चल रहे विरोधाभासों एवं अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आम जन की आवाज उठाने का कार्य किया था। 

आज हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर कई नेताओं ने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की है।

 

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ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि कंपनी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ओला एस1 स्कूटर बेचे हैं। ओला इलेक्ट्रिक का दावा है कि उसने पहले 24 घंटों में हर सेकेंड में 4 स्कूटर बेचने में कामयाबी हासिल की है। बेचे गए स्कूटरों का मूल्य पूरे 2डब्ल्यू उद्योग द्वारा एक दिन में बेचे जाने वाले मूल्य से अधिक होने का दावा किया जाता है।

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इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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