Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
इतिहास

“हिंदको” : हिंद से निकली हुई भाषा एक महत्वपूर्ण पाकिस्तानी भाषा है।

आज पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी हिंदको को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। पाकिस्तान के साथ - साथ यह भाषा अफगानिस्तान में भी बोली जाती है।

हिन्द का अर्थ होता है “सिंध” और “को” का अर्थ होता है भाषा। हिंदको यानी हिंद से निकली हुई भाषा। (NewsGramHindi)

हिंदको (Hindko), जिसे हिंदकु या हिंको भी कहा जाता है। यह पाकिस्तान (Pakistan) और उत्तरी भारत में हिंदकोवन्स द्वारा बोली जाने वाली इंडो-आर्यन भाषाओं के लहंडा उपसमूह का हिस्सा मानी जाती है। हिंदको एक पूर्वी ईरानी भाषा का शब्द भी माना जाता है, जिसका मूल रूप से हिंदी की भाषा के रूप में अनुवाद किया गया था। यह भाषा हजारा, पंजाब (अटक) और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर सहित उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के क्षेत्रों में बोली जाती है। 

भारतीय भाषाई सर्वेक्षण के मार्गदर्शक जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन (George Abraham Grierson) ने कहा था कि, हिंदको हजारा डिवीजन की मुख्य भाषा थी और पेशावर में भी बोली जाती थी। आज पेशावर पाकिस्तान प्रांत खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) की राजधानी है और यहां पश्तो बोलने वालों का बोलबाला अधिक है। हालांकि विभाजन से पहले पेशावर शहर में हिंदको बोलने वालों का बोलबाला अधिक था। पेशावर शहर में हिंदको भाषा बोलने वालों को पेशावरी या खरय कहा जाता था। जिसका अर्थ होता है, “शहर के निवासी।” ऐसा भी माना जाता है कि, हिंदको का प्राकृत भाषा से भी संबंध था। जब जनता की स्थानीय भाषा ‘प्राकृत’ कई भाषाओं और बोलियों में विकसित हुई (जो ज्यादातर दक्षिण एशिया के उत्तरी भाग में फैली हुई थी) उस दौरान हिंदको का प्राकृत से गहरा संबंध माना जाता है। 


यह याद रखना जरूरी है कि, हिंदको लाखों लोगों की भाषा है, जो पैतृक क्षेत्रों में या दुनिया भर में जीवन यापन करने के लिए बसे हुए हैं। लेकिन फिर भी इस भाषा को लेकर लोगों में अलग – अलग राय देखने को मिलती है। कुछ लोग कहते हैं कि, यह पंजाबी भाषा (Punjabi Language) की बोली है। कुछ लोगों का दावा है कि, यह एक अलग पुरानी भाषा है और कुछ लोग इसे उर्दू का भी स्त्रोत मानते हैं। लेकिन भाषाविद और लेखक तारिक रहमान कहते हैं कि, हिन्द का अर्थ होता है “सिंध” और “को” का अर्थ होता है भाषा। हिंदको यानी हिंद से निकली हुई भाषा। 

आज पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी हिंदको को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। (सांकेतिक चित्र, Wikimedia Commons)

जब अफगानिस्तान (Afghanistan) से आक्रमणकारी इस क्षेत्र में आए तो उन्होंने पाया कि, पेशावर से लेकर यूपी तक इसी तरह की भाषा बोली जाती है। इसके अतिरिक्त शोधकर्ता, लेखक और कवि खवीर गजनवी, उन्होंने तर्क दिया कि, जहीरुद्दीन बाबर के आगमन के बाद पेशावर घाटी में उर्दू ने जड़े जमा ली थी और हिंदको भाषा उस समय वहां के स्थानीय लोगों द्वारा बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं से निकली थी। हालांकि डॉ राउफ पारेख, गजनवी के इस दावे को खारिज करते हैं और कहते हैं कि, हिंदको उर्दू (Urdu) की उत्पत्ति है और यह उर्दू की उत्पत्ति के बारे में कई सिद्धांतों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा है कि, हिंदको एक महत्वपूर्ण पाकिस्तानी भाषा है लेकिन भाषा विशेषज्ञ और इतिहासकार क्रिस्टोफर का मानना है कि, हिंदको एक सामान्य शब्द था।

आज पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी हिंदको को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। पाकिस्तान के साथ – साथ यह भाषा अफगानिस्तान में भी बोली जाती है। वहां इसे “हिंदकी” के नाम से जाना जाता है और इसे व्यापक रूप से देश के गैर मुस्लिम समुदाय (सिख और हिन्दू) की भाषा माना जाता है। लेकिन यह कहना बिल्कुल स्पष्ट नहीं है, क्योंकि हिंदको बोलने वाले मुसलमान भी अधिक हैं। 

यह भी पढ़ें :- पाकिस्तान की जमीन पर खंडित होता प्रहलादपूरी मंदिर!

कोई भी भाषा तभी तक जीवित रहती है, जब उसे लिपिबद्ध किया जाता है। हिंदको भाषा में भी धर्म, राजनीति, इतिहास, आत्मकथाओं जैसे अन्य विषयों पर किताब देखने को मिलती है। ऐसा माना जाता है कि, हिंदको भाषा में पवित्र कुरान का अनुवाद भी किया गया है। कुछ टीवी और रेडियो चैनल हिंदको में भी प्रसारित किए जाते हैं और कुछ साहित्यिक पत्रिकाएँ भी इसमें नियमित रूप से प्रकाशित होती हैं। सुल्तान सुकून, रज़ा हमदानी और रियाज़ हुसैन सगीर भी अपनी हिंदको कविता के लिए लोकप्रिय हैं। क़तील शिफ़ाई, फरिग बुखारी और खतीर गजनवी जैसे बड़े नाम उर्दू कवि होने के साथ – साथ हिंदको कवि भी थे। 

एक कराची विश्वविद्यालय (University of Karachi) में उर्दू के प्रोफेसर कहते हैं कि, वास्तव में हर भाषा महत्वपूर्ण होती है। मुहावरों, लोक कथाओं, गीतों, कहावतों और परंपराओं में एक भाषा की अपनी सुंदरता होती है। एक भाषा मर जाती है तो पूरी संस्कृति मर जाती है। इसके अलावा, लोगों को अपनी मातृभाषा से भावनात्मक लगाव होता है| इसलिए हिंदको भाषा को भी केवल संरक्षित ही नहीं किया जाना चाहिए बल्कि प्रगति और उसे फलने – फूलने में भी मदद करना चाहिए।  

Popular

डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

Keep Reading Show less

ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

Keep Reading Show less

ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

Keep reading... Show less