Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
संस्कृति

Chaitra Navratri 2021: हिन्दू नव-वर्ष क्यों होता है खास, आइए जानते हैं!

भारत में हिन्दू नववर्ष नवीनता का प्रतीक है, जब पेड़ फूलों और फलों से सज जाते हैं जब हरित खास मैदानों को घेर लेते हैं तब इस नए दिन को पर्व के रूप में मनाया जाता है।

हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।(NewsGram Hindi)

भारत और खासकर हिन्दू समुदाय को छोड़कर विश्व के बाकी हिस्सों में 31 दिसम्बर को नव वर्ष मनाया जाता है, किन्तु जब पिघली हुई बर्फ मिट्टी को नम बना देती है, हरित घास पृथ्वी को ढक लेती है, बागों में पेड़ खुद को जब पत्तियों, फूलों और फलों से सजा लेतें हैं तब हिन्दू समुदाय इसे एक उत्सव के रूप में भक्तिमय वातावरण का शुभारम्भ करता है। यह जीवन का उत्सव है, नई सुबह का उमंग है। 

भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू कैलेंडर के चैत्र महीने का पहले दिन) को नए साल के रूप में मनाते हैं। देश के उत्तर जिसमे बिहार, झारखण्ड, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्य इस पर्व को चैत्र नवरात्री के रूप में मनाते हैं। मराठी समुदाय इस पर्व को गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में मनाता है, कनाड़ा और तेलगु समुदाय इसे उगादी के रूप में मनाते हैं, सिंधी समुदाय इसे चेटीचंड के रूप में मनाते हैं। इस त्योहार को मनाने का हर समुदाय का अपना अनूठा तरीका है, लेकिन सभी के लिए यह नई शुरुआत का दिन है; यह वह दिन है जिस दिन भगवान ब्रह्मा ने इस ब्रह्मांड का निर्माण किया था।


किन्तु आपको यह जानकर आश्चर्यजनक होगा कि ब्रह्माण्ड के निर्माता ब्रह्मा की पूजा नहीं की जाती है। पौराणिक कथाओं में, ब्रह्मा को या तो कभी भी पूजा नहीं जाने का श्राप दिया गया है, या यदि ऐसा हुआ तो मस्तक धड़ से अलग हो जाने की कथा कही गई है। इस बार 13 अप्रैल 2021 को विक्रम संवत 2078 को हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा। संवत्सर की शुरुआत राजा विक्रमादित्य के द्वारा की गई थी, इसलिए इसे विक्रम संवत कहा जाता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है।

विक्रम संवत अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

यह भी पढ़ें: पाठशालाओं में संस्कृति, संस्कृत और संस्कार का ज्ञान दिया जाएगा।

ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है?

इस वर्ष दुर्घटना, संक्रामक रोग और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ने की संभावना है। इस संवत्सर के अशुभ प्रभाव होने के साथ ही शुभ प्रभाव भी होंगे। संवत्सर प्रतिपदा तिथि और मेष संक्राति का एक दिन पड़ने का संयोग भी 90 वर्षों के बाद बन रहा है। 

हिन्दू पंचाग

57 ईसा पूर्व में, हिंदू कैलेंडर की शुरुआत हुई थी। चंद्र चरणों के मासिक चक्रों पर आधारित तिथियों की गणना की एक प्रणाली को पंचांग कहा जाता है। इसलिए, हिंदू नव वर्ष का सही दिन हर साल पंचांग में गणना के अनुसार बदलता है। हालांकि, यह उत्सव भारत के प्रत्येक राज्य में अद्वितीय हैं, और सभी राज्यों में इस पर्व अपने रीति-रिवाजों का पालन कर के मनाया जाता है।

Popular

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

Keep Reading Show less

राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

Keep Reading Show less

शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

Keep reading... Show less