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संस्कृति

​हिंदू माता-पिता अपने बच्चों को धर्म के प्रति जागृत कर रोक सकते हैं धर्मांतरण!

हर हिंदू माता-पिता को बच्चों से धर्म एवं संस्कृति से संबंधित बातें करनी चाहिए।

धर्म एवं संस्कृति की जानकारी देकर ही रुकेगा धर्मांतरण।(Wikimedia Commons)

एक रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश भारत में धर्मांतरण का सबसे अधिक प्रभाव हिंदू धर्म पर हुआ है। अनुमान है कि प्रत्येक वर्ष 20,000 से अधिक हिंदू दूसरे धर्म को स्वीकार कर लेते हैं। क्या कभी हिंदू समाज ने सोचा है आखिर क्या कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में हिंदू लोग सबसे पुरातन धर्म को छोड़कर नया धर्म स्वीकार कर लेते हैं। यह बात नकारी नहीं जा सकती है कि कहीं ना कहीं धर्मांतरण के पीछे एक विशेष संप्रदाय द्वारा उत्पीड़न का हाथ हो सकता है। इसके अलावा लव जिहाद और लालच प्रपंच को भी माना जा सकता है। लेकिन लव जिहाद और लालच प्रपंच की ऐसी घटनाओं के कारण हिंदू समाज धर्मांतरण के पीछे अपनी भूमिका से पल्ला नहीं झाड़ सकता।

रिपोर्ट के अनुसार धर्मांतरण का शिकार होने वाले हिंदुओं में सबसे बड़ी संख्या एससी समाज के लोगों की होती है। आखिर क्या कारण है कि एससी समाज के अधिकतर लोग धर्मांतरण का शिकार हो जाते हैं? कई तर्कों में से एक तर्क यह है कि हिंदू समाज आज भी जाति प्रथा में बंटा हुआ है। अभी भी कुछ लोग एससी समाज के लोगों से छुआछूत की भावना रखते हैं यह बात स्वीकारी जाती है कि इनकी संख्या निश्चित ही कम है लेकिन जब तक पूर्णता ऐसे लोग की सोच का अंत नहीं होता तब तक ऐसे ही एससी समाज का धर्मांतरण जारी रहेगा जिसमें सबसे बड़ी भूमिका ईसाई मिशनरी निभाते हैं।



हमें अपने बच्चों को पूजा परंपरा के प्रति आदर करना सिखाना होगा - मोहन भागवत (Wikimedia commons)

इन सब कारणों के एक बहुत बड़ा कारण है जो छूट जाता है वह है, "हिंदू समाज के माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को धर्म और संस्कृति के बारे में ना बताना"। इसी विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का बयान इस समय काफी चर्चा में है उन्होंने कहा आखिर हमारे घर के बच्चों का मतांतरण कैसे हो जाता है इससे तो ऐसा लगता है कि हम अपने बच्चों को अपने धर्म का महत्व नहीं बता पाते, हमें अपने घर से ही बच्चों को संस्कार देने होंगे अपनी पूजा परंपरा के प्रति आदर करना सिखाना होगा। इसके अलावा संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि बच्चों को धर्म से संबंधित प्रश्न करते हैं तो उनका उत्तर हमें देना होगा और उनकी जिज्ञासा भी शांत करनी होगी इस तरह के संस्कारों के लिए हमें अपने बच्चों को तैयार करना होगा।

यह भी पढ़े: हिंदु धर्म पर प्रश्न उठाने वाले क्या हिंदुत्व का इतिहास भी जानते हैं?

संघ प्रमुख के बयान में यह स्थिति साफ कर दी है कि धर्मांतरण के पीछे कहीं न कहीं हिंदू माता-पिता का अपने बच्चों को अपनी संस्कृति एवं हिंदू समाज के प्रति जागृत ना करना भी है। वरना धर्मांतरण रोधी कानून उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में लागू है पर जब तक स्वयं हिंदू समाज जागृत नहीं होगा तब तक धर्मांतरण नहीं रुक सकता।

Edited By: Lakshya Gupta

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

टाटा स्टील (Tata Steel) कंपनी झारखंड में लौह अयस्क की एक खदान की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगी। फावड़ा से लेकर ड्रिलिंग तक और डंपर चलाने से लेकर डोजर-शॉवेल जैसी हेवी मशीनों का संचालन कुशल महिला कामगारों के द्वारा किया जाएगा। नये साल यानी 2022 में पश्चिम सिंहभूम जिले की नोआमुंडी आयरन ओर माइन्स को पूरी तरह महिलाओं के हाथ में सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है।

टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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इस साल देश में हिरासत में कुल 151 मौतें हुई हैं। (सांकेतिक चित्र, File Photo )

इस साल देश में हिरासत(police custody)में कुल 151 मौतें हुई हैं। केंद्र ने लोकसभा(Loksabha) में मंगलवार को यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद वरुण गांधी के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय(Nityanand Rai)ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुताबिक 15 नवंबर तक पुलिस हिरासत में मौत के 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत(police custody) में सबसे अधिक (26) मौतें हुईं हैं, उसके बाद गुजरात (21) और बिहार (18) का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 11-11 लोगों की मौत की खबर है।

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