Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
संस्कृति

हिन्दू संस्कार जिनमें वैज्ञानिक तर्क छुपे हैं और जिनसे तथाकथित लिबरल डरते हैं!

हिन्दू धर्म में सभी रीति-रिवाजों में तर्क और उसकी विशेषता उपस्थित है। किन्तु इन रीति-रिवाजों से लिब्रलधारी तबका सबसे अधिक चिंतित है।

(NewsGram Hindi, फोटो साभार: Pixabay )

भारतीय भूमि वेद एवं पुराणों से सुसज्जित भूमि है। यहाँ की परम्पराएं भी तर्क से उत्तीर्ण हैं। महिलाऐं एवं पुरष पूजा स्थल पर मस्तक क्यों ढक कर रखते हैं इसका भी तर्क है और पूजा-पाठ के समय किस प्रकार के वस्त्र पहने जाते हैं उसका भी तर्क उपस्थित है। हिन्दू धर्म में सभी रीति-रिवाजों में तर्क और उसकी विशेषता उपस्थित है। किन्तु इन रीति-रिवाजों से लिब्रलधारी तबका सबसे अधिक चिंतित है, वह इसलिए क्योंकि इन सभी का चलन हाल के दिनों में बढ़ा है और अधिकांश नागरिक इन क्रियाओं के प्रति जागरूक हुए हैं। आइए जानते हैं वह पांच संस्कार जिनमें आध्यात्म भी है और वैज्ञानिक तर्क भी है।

चरण वंदना…

(Wikimedia Commons)


भारतीय संस्कृति में पैर छूकर आशीर्वाद लेना एक अहम रीति है। जिसका मजाक आज के आधुनिक युवा समय-समय पर उड़ाते हैं या इसे ढोंग कहते हैं। इस्लाम धर्म में तो इसे पाप करार दिया गया है। क्या आपको ज्ञात है कि हिन्दू धर्म में चरण स्पर्श करने का क्या महत्व है? यदि नहीं तो सुनिए, चरण स्पर्श करने से बड़ों के आशीर्वाद के साथ-साथ उनकी ऊर्जा भी हमारे भीतर समाहित होती है। इस तर्क को वेद एवं धार्मिक विद्वानों के साथ-साथ विज्ञान ने भी सिद्ध किया है।

विज्ञान के अनुसार, मानव शरीर में ऊर्जा की नकारात्मक और सकारात्मक दोनों धाराएं उपस्थित होती हैं। मानव शरीर के दाएँ भाग में धनात्मक अर्थात सकारात्मक और ऋणात्मक अर्थात नकारात्मक धाराएं प्रवाहित होती हैं। इसलिए दोनों धाराएं मिलकर एक परिपथ यानि सर्किट को पूरा करती हैं। और जब हम चरण स्पर्श करते हैं तब उनकी ऊर्जा हमारे भीतर भी समाहित हो जाती है।

नमस्ते! नमस्कारम!

कुछ समय पहले नमस्ते या हाथ जोड़कर अभिवादन करना आधुनिक युग के लिए ‘Old Fashion’ हो गया था। किन्तु जब सभी को महामारी का ज्ञात हुआ तब बड़े से बड़े नेता और अभिनेता ने भी हाथ-जोड़कर अभिवादन करने के क्रिया को अपना लिया। आज अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी नमस्ते करते हुए बड़ी-बड़ी हस्तियां दिखाई देती हैं। किन्तु क्या आप जानते हैं कि हाथ जोड़कर नमस्ते करने का क्या महत्व है? यदि नहीं तो सुनिए, नमस्कार मुद्रा में आप दोनों हथेलियों को एक साथ जोड़ते हैं और इसी दबाव से उन दबाव-केंद्रों पर भी जोर पड़ता है जिनसे हम कई तरह बिमारियों से मुक्त होते हैं। नमस्कार मुद्रा एक्यूप्रेशर का सबसे प्राचीनतम इस्तेमाल में लाए जाने वाली रीति है। यदी हम नमस्कार को आध्यात्मिक नजरिये से देखेंगे तो इसमें काफी समय लग जाएगा वह इसलिए क्योंकि इसके पीछे दिया गया तर्क लम्बा है।

तिलक

(Wikimedia Commons)

बड़े-बुजुर्गों द्वारा कहा गया है कि ललाट पर तिलक मुख के तेज को अधिक रूप देता है। तिलक वह आशीर्वाद है जिसका केंद्र-बिंदु ही अध्यात्म है। किन्तु लिबरल युग में तिलकधारी को ‘पंडित’ या अन्य नाम से बुलाते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल पुरोहित या साधु-संत ही तिलक धारण करते हैं। इसे कोई भी व्यक्ति जो ईश्वर में विश्वास रखता है वह धारण कर सकता है। इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क भी उपस्थित है कि, कपाल के मध्य में दो भौंहों के बीच एक छोटा सा स्थान होता है; इस स्थान को हमारे शरीर में एक प्रमुख तंत्रिका बिंदु कहा जाता है। कुमकुम, चंदन या लाल तिलक लगाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और एकाग्रता के विभिन्न स्तरों को नियंत्रित किया जा सकता है। एक और कारण यह भी है कि जब हम माथे के बीच में कुमकुम या चंदन का तिलक लगाते हैं, तो हम स्वचालित रूप से अदन्य-चक्र दबाते हैं; यह हमारे चेहरे की मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति को सक्रिय करता है।

यह भी पढ़ें: क्यों भगवान राम और कृष्ण को नीले रंग में वर्णित किया गया है?

भूमि पर बैठकर खाना…

(Wikimedia Commons)

आध्यात्मिक स्थान जैसे मंदिर, गुरूद्वारे इत्यादि जगहों पर प्रशाद, भोज या लंगर जमीन पर बैठाकर ही कराया जाता है। यह वह स्थान होता है जहाँ किसी की जेब या हैसियत मायने नहीं रखती है, बस महत्वपूर्ण है आपकी आस्था और ईश्वर के प्रति आपका लगाव। जमीन पर बैठकर खाना खाने का चलन सनातन धर्म में प्राचीन काल से देखा जा रहा है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि, जमीन पर बैठने के लिए हम सुखासन का प्रयोग करते हैं जो हमारे पाचन तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में मदद करता है और पाचन क्रिया को मजबूत करता है। किन्तु आज के समय में इस क्रिया की कमी ही कई बिमारियों का कारण है।

गायत्री मंत्र एवं ॐ उच्चारण…

(Pixabay)

सभी हिन्दू घरों में माता-पिता या दादा-दादी अपने बच्चों को गायत्री मंत्र का उच्चारण जरूर सिखाते हैं। यह केवल मंत्र उच्चारण नहीं है बल्कि इससे स्वास्थ्य में अत्यधिक वृद्धि होती है। एक वैज्ञानिक शोध में यह सामने आया था कि गायत्री मंत्र के जाप से प्रति सेकंड लगभग 110,000 विभिन्न प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं। यह थी बात गायत्री मंत्र की किन्तु ‘ओम-ॐ’ उच्चारण भी कई बिमारियों को दूर करता है। ॐ के उच्चारण से बीपी यानि रक्तचाप नियंत्रण में रहता है और स्वांस पर पकड़ मजबूत होती है। ॐ उच्चारण एकाग्रता एवं सतर्कता दोनों के लिए लाभदायक है।

Popular

देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

Keep Reading Show less

कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

Keep Reading Show less

डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

Keep reading... Show less