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देश

हिंदुत्व की शुरुआत 5000 साल पहले हुई थी: हिमंत बिस्व

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व ने कहा कि, हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि "मैं या कोई इसे कैसे रोक सकता है।" "यह तो युगों से चला आ रहा है।

असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा| (File Photo)

असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने शनिवार (10 जुलाई) को उनकी सरकार का दूसरा महीना पूरा होने के मौके पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हिंदुत्व जीवन का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि “मैं या कोई इसे कैसे रोक सकता है।” “यह युगों से चला आ रहा है। लगभग सभी, यहां तक की अन्य धर्मों के अनुयायी हिन्दुओं के वंशज हैं। एक ईसाई या मुसलमान सभी किसी समय हिन्दुओं से निकले हैं।” 

उन्होंने यह भी कहा कि, हिंदुत्व (Hinduism) की शुरुआत 5000 साल पहले हुई थी और इसे रोका नहीं जा सकता। इसको हटाया भी नहीं जा सकता क्योंकि इसे हटाने का मतलब होगा “अपनी जड़ों और मातृभूमि से दूर जाना।” 


यह भी पढ़ें :- असम में गौ रक्षा कानून बनाएगी भाजपा की सरकार

सीएम ने आगे लव जिहाद (love jihad) के मुद्दे के बारे में बोलते हुए कहा “मुझे इस शब्द को लेकर ही आपत्ति है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी महिला के साथ हुए धोखे को बर्दाश्त नहीं करेगी। चाहे वह हिन्दू हो यह मुस्लिम। हमारी बेटी – बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

इससे अतिरिक्त इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व ने राज्य मंत्रिमंडल में फेर बदल भी किया। उन्होंने कहा कि, राज्य में स्वदेशी आस्था और संस्कृती का नया  स्वतंत्र विभाग बनाया जाएगा। साथ ही उन्होनें इस बात की पुष्टि भी कि की सरकार “दो बच्चों की नीति” को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Act) को समय की आवश्कता बताते हुए आठ अलग – अलग समितियों का भी गठन किया गया है। यह सभी समितियां शिक्षा, संस्कृती, जनसंख्या नियंत्रण, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, कौशल विकास, समितियां स्वास्थ्य, वित्तीय समावेश के मुद्दों से जुड़ी हुई हैं। (SM)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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