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थोड़ा हट के

कथनी से ज़्यादा करनी पर ज़ोर देने वाले बने दो आदर्श ग्राम

सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते, और इस कथनी के सटीक उदाहरण हैं भारत के दो आदर्श ग्राम, वह हैं हिवरे बाज़ार, और रालेगण सिद्धि। जिसने कई चुनौतियों का सामना कर मिसाल होने तक का सफर तय किया है।

हिवरे बाज़ार गांव की काया-कल्प बदलने वाले पोपट राव पवार।

आज कोई सवाल पूछना नहीं चाहता लेकिन मज़े की बात यह है कि उन चंद सवालों की वजह से कोई गांव, या यह देश अपनी तक़दीर बदल सकता है। वह प्रगति के पथ पर निडर भाव से चल सकता है। अपनी सीमाओं से कहीं आगे तक, छलांग लगा सकता है। मगर शर्त है कि आवाज़ उठानी होगी, सवाल करना होगा। कुछ साल पहले एक गांव ने अपनी सरकार से बे-ख़ौफ़ सवाल किए और आज वह गांव मिसाल के पन्ने पर, बड़े अक्षरों में छप चुका है। 

मैं बात कर रहा हूँ, एक ऐसे आदर्श ग्राम की जिसका नाम है हिवरे बाज़ार। हिवरे बाज़ार महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में बसा छोटा सा गांव है। यहां की साफ-सफाई और पक्के मकान आपको चौंकने पर मजबूर कर देंगे। किन्तु हर बदलाव के पीछे एक कारण होता है। हिवरे बाज़ार, बदहाली से गुज़र कर कई दुःखदायी परिस्थितियों का गवाह बना है। 


सूखा और बारिश की कमी इस गांव को अंदर ही अंदर से खोखला कर रही थी। सूखे की मार इस तरह लोगों को बेहाल कर रही थी कि लोगों ने गांव से शहर की ओर पलायन करना शुरू कर दिया। और कुछ लोग, जो अभी भी गांव में थे उन्होंने पशुपालन और खेती छोड़, देसी शराब बनाने का काम शुरू कर दिया। अब जहाँ खुद शराब का निर्माण होता हो वहां ख़ुशी कैसे रह सकती है? यही कारण था कि पूरे क्षेत्र में हिवरे बाज़ार का नाम गलत कारणों से सामने आने लगा। कोई भी सभ्य व्यक्ति इस गांव में आने-भर से कतराता था। किन्तु एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है “जहाँ चाह, वहीं राह”। 

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पोपट राव पवार जो क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी थे और रणजी में भी खेल चुके थे, उनसे अपने गांव की स्थिति देखी नहीं गई। जिस वजह से बदलाव का बीड़ा, उन्होंने और उनके जैसे अन्य युवाओं ने अपने कन्धों पर उठा लिया। लेकिन बदलाव एक या दो व्यक्ति के सोचने से नहीं आता, उसके लिए मिट्टी में उतरना पड़ता है।

और इसी सोच के साथ पोपट राव पवार ने सभी गांव वालों को एकजुट किया और सबसे पहले जल संरक्षण पर काम शुरू किया गया। क्योंकि जल बचाने से खेती शुरू होगी, बंजर पड़ी भूमि फिर उपजाऊ बनेगी। चेक डैम का निर्माण किया गया और अन्य सभी काम में आने वाले उपायों को उपयोग में लाया गया। जिस वजह से आज हिवरा बाज़ार हरा-भरा और उपजाऊ है और भू-जल का स्तर भी बहुत अधिक बढ़ चुका है। जब शुरुआत ही इतनी आधुनिक हो तो परिणाम अच्छा आना स्वाभाविक है। और क्या आप मान सकते हैं कि गांव वालों ने, स्वयं द्वारा किए श्रमदान से अपने लिए कई दरवाज़े खोल दिए। शराब को छोड़ पुनः खेती में जुट गए। और आज यह गांव अन्य गांवों के लिए एक मिसाल के तौर पर उभरा है। इस गांव के विकास के लिए पोपट राव पवार को कई बड़े मंचों पर सराहा गया और पुरस्कृत किया गया है। 

सामाजिक कार्यकर्ता एवं इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अन्ना हज़ारे। (Wikimedia Commons)

ऐसा ही एक और आदर्श ग्राम है ‘रालेगण सिद्धि’। रालेगण सिद्धि के लिए भी विकास, स्वप्न मात्र था और यहाँ हिवरे बाज़ार से भी पहले हालात ख़राब थे। रालेगण सिद्धि, अहमदनगर जिले की पारनेर तहसील में बसा एक गांव है। यह गांव भी गरीबी और सूखे से त्रस्त था। ज़मीन बंजर हो चुकी थी। मगर गांव के ही एक व्यक्ति से अपने गांव की बदहाली देखी न गई और उन्होंने बदलाव लाने का बीड़ा उठा लिया। और वह व्यक्ति हैं अन्ना हज़ारे। अन्ना हज़ारे ही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने इस देश के सबसे बड़े आंदोलन ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का नेतृत्व किया था। और हिवरे बाज़ार से कई वर्ष पहले रालेगण सिद्धि को एक आदर्श ग्राम के रूप में उभारा था। उन्होंने लोगों को श्रमदान के लिए प्रोत्साहित किया और सभी ग्रामीणों ने ख़ुशी-ख़ुशी श्रमदान के लिए मंजूरी भर दी। यही कारण है कि आज गांव में हरियाली है और साल भर पानी रहता है और यह गांव आदर्श ग्राम के रूप में जाना जाता है। आज यह गांव भी भारत के अन्य गांवों के लिए आदर्श के रूप में उभर कर आया है क्योंकि यहाँ एक भी व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे नहीं है। पोपट राव पवार को भी अपने गांव की काया-कल्प को बदलने की प्रेरणा रालेगण सिद्धि और अन्ना हज़ारे से ही प्राप्त हुई थी।

क्या है इसके पीछे का कारण?

दृढ़ इच्छा-शक्ति और बदलने की चाह है इतने बड़े बदलाव के पीछे का रहस्य। अन्ना हज़ारे और पोपट राव पवार ने कथनी से ज़्यादा करनी पर ज़ोर दिया। गांव के सभी बुजुर्ग और युवाओं ने एक साथ मिलकर अपने गांव को बदहाली से निकालने का संकल्प लिया। इसका सबसे बड़ा कारण है – यहाँ के हर काम में पारदर्शिता का होना। कितना पैसा कहाँ खर्च हुआ या कहाँ से कितना पैसा आया, इन सब की जानकारी ग्राम वासियों के पास है। यहाँ छल-कपट की राजनीति पर नहीं, विकास पर ध्यान दिया जाता है। स्वराज के वास्तविक उदाहरण यह दोनों गांव हैं। 

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किन्तु स्वराज स्थापित करने की चाह से एक और व्यक्ति, स्वराज के नाम पर जनता के बीच आया और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गया, पर स्वराज तो दूर पारदर्शिता को भी ताक पर रख दिया। 

इन्हीं बातों को परत-दर-परत खोल रही है मुनीश रायज़ादा द्वारा निर्मित वेब-सीरीज़, “ट्रांसपेरेंसी-पारदर्शिता” जो अब MX-Player पर मुफ्त में उपलब्ध है। आप इस वेब-सीरीज़ के छठे प्रकरण में इन्ही गांव के नागरिकों की बातें सुनेंगे और फिर आप स्वराज का सही मतलब समझ पाएंगे।

MX-Player पर मुफ्त में “Transparency-Pardarshita” वेब सीरीज़ देखने के लिए इस लिंक पर जाएं: https://www.mxplayer.in/show/watch-transparency-pardarshita-series-online-f377655abfeb0e12c6512046a5835ce1

 

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