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संस्कृति

Holi: “त्यौहार एक, मनाने के ढंग अनेक”, यही है भारत की विशेषता।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ कदम-कदम पर विविधताओं से परिचय होगा। यहाँ का हर त्यौहार अपने में कई कहानियों को समेटता है।

भारत में होली का त्यौहार एक किन्तु नाम हैं अनेक।(Pixabay)

भारत एक ऐसा देश है जहाँ कदम-कदम पर विविधताओं से परिचय होगा। त्यौहार से लेकर वेशभूषा तक, बोली, हाव-भाव, सब अपने में एक कहानी को कहते हैं। अपने अतीत के विषय में बताते हैं और उनके होने का उद्देश्य बताते हैं। किन्तु एक विशेषता, जो भारत के कण-कण में बसती है वह है भारत की अखंडता, जो कि विविधताओं में भी एकता को प्रदर्शित करता है। आज, Holi के इस पावन पर्व के उपलक्ष्य में हम कुछ ऐसे ही विषय पर चर्चा करेंगे। हम आज बात करेंगे रंगो के त्यौहार Holi और साथ ही यह भी जानेंगे कि देश के किन-किन हिस्सों में में यह त्यौहार किस तरह मनाया जाता है।

उत्तर-प्रदेश: “ब्रज की होली”

ब्रज की लठमार होली।(Wikimedia Commons)


उत्तर-प्रदेश का हर छोर होली के रंग में सराबोर दिखता है, बरसाने की लठमार होली की प्रथा देश में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है। लोग दूर-दूर से नन्दगांव में इस होली का आनंद लेने आते हैं। वहीं मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में ‘फूलों की होली’ खेली जाती है। होली के दिन क्या युवा, क्या बुज़ुर्ग सब कृष्ण भक्ति के रंग में रमे होते हैं।

पंजाब: “होला मोहल्ला”

होला मोहल्ला।(Wikimedia Commons)

होला मोहल्ला पंजाब प्रान्त में मनाया जाता है। होला मोहल्ला वास्तव में एक वार्षिक मेला है जो होली के त्योहार के बाद से पंजाब के आनंदपुर साहिब में बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाता है। दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह द्वारा इस तरह का मेला लगाने की प्रथा को शुरू किया गया था। इस दिन सभी गुरुद्वारों में कीर्तन किए जाते हैं। आनंदपुर साहिब के साथ-साथ अन्य गुरुद्वारों में भी लंगर लगाया जाता है जिसे हर वर्ग का व्यक्ति प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकता है।

पश्चिम बंगाल: “बसंत उत्सव”

बसंतोत्सव।(Wikimedia Commons)

पश्चिम बंगाल में होली को ‘बसंत उत्सव’ के नाम से जाना जाता है। बसंत उत्सव की परंपरा को कवि और भारत के राष्ट्रगान के रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शांति निकेतन, विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया था। लड़के और लड़कियां खुशी से बसंत का स्वागत करते हैं, न केवल रंगों के साथ, बल्कि गीतों, नृत्य, शांतिनिकेतन के शांत वातावरण में भजनों के साथ होली के त्यौहार को मनाते हैं। बसंत उत्सव के साथ डोल जत्रा भी मनाया जाता है जिसमें छात्र भगवा रंग के कपड़े पहनते हैं और सुगंधित फूलों की माला पहनते हैं। वे संगीत वाद्ययंत्रों की संगत में गाते हैं और नृत्य करते हैं।

हरियाणा: “धुलंडी होली”

होली 2021(Unsplash)

हरियाणा में धूम-धाम से खेला जाने वाला यह होली का त्यौहार अपने में ही अनूठा है। इस दिन भाभी को होली पर अपने देवरों को पीटने और पूरे साल उनके द्वारा खेली गई सभी मज़ाकों का बदला लेने के लिए स्वीकृति मिलती है। और दूध हांडी भी लटकाई जाती है जिसे युवा फोड़ते हैं।

उत्तराखंड: “खड़ी होली”

होली 2021(फाइल फोटो)

खड़ी होली कुमाऊँ क्षेत्र में खेली जाती है, जिसमें मुख्यतः उत्तराखंड के शहर शामिल हैं। उत्सव में, स्थानीय लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं, समूहों में खारी गाने गाते हैं और नृत्य करते हैं। वह टोलियों में जाते हैं, और उन सभी घरों पर रुकते हैं जहाँ-जहाँ से वह सब गुजरते हैं। इस क्षेत्र में, होली आमतौर पर विभिन्न संस्करणों में एक संगीत सभा होती है जिसे बैतिका होली, खादी होली और महिला होली के रूप में भी जाना जाता है।

मणिपुर: “योसंग”

होली 2021(Unsplash)

मणिपुर में, योसंग छह दिनों के लिए मनाई जाती है। यह पूर्णिमा के दिन से शुरू होता है और हिंदू और स्वदेशी परंपराओं को जोड़ता है। त्योहार का मुख्य आकर्षण थबल चोंगा है, जो एक मणिपुरी लोक नृत्य है जिसे इन छह दिनों के दौरान किया जाता है। परंपराओं को जोड़ने और एकरूपता बनाए रखने के लिए मणिपुर के हिंदू इस त्योहार को रंगों के साथ भी खेलते हैं।

गोवा: “शिग्मो”

शिग्मो(Wikimedia Commons)

गोवा के स्थानीय सड़कों पर लोक-नृत्य कर यहाँ पर होली के त्यौहार को मनाते हैं। इस त्यौहार के उपलक्ष्य में नावों को सजाया जाता है।

यह भी पढ़ें: Holika Dahan 2021: बुराई का नाश व अच्छाई पर विजय का दिन 

2021 की होली

किन्तु इस साल कई राज्यों में होली का रंग फीका रहने वाला है। कोरोना महामारी वापस जिस रफ्तार से लोगों को अपने चपेट में ले रही है, उसको मद्देनज़र रखते राज्य सरकारों ने सार्वजनिक होली मनाने पर रोक लगा दी है। जिस वजह से कई जगहों पर प्रतिबन्ध को सख्ती से पालन कराने की हिदायत पुलिस को दी गई है। खास कर उन क्षेत्रों में जहाँ कोरोना संक्रमितों के मामले अधिक हैं जैसे कि मुंबई, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर-प्रदेश, ओडिशा, मध्य-प्रदेश, गुजरात एवं चंडीगढ़। यह वह राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहाँ कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने में तेजी आई है।

लेकिन यह सभी प्रतिबन्ध हमारी देन है, क्योंकि कोरोना का टीका आने के बाद हमने यह घोषित ही कर दिया था कि कोरोना महामारी खत्म हो चुकी है। न किसी मास्क का ध्यान रखा और न ही दो गज की दूरी का, जिस वजह से देश कोरोना विस्फोट के दूसरे चरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अभी भी समय है और हम इस पर काबू पा सकते हैं, किन्तु शर्त यह है कि हमें सरकार द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना होगा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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