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चर्चा

गृहमंत्री शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ जानिए क्यों किसानों की बैठक में नहीं हुए शामिल?

सरकार की तरफ से बातचीत की कमान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के प्रभारी मंत्री पीयूष गोयल और कॉमर्स मिनिस्ट्री के राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने संभाली।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह । (Wikimedia commons )

By : नवनीत मिश्र

किसान आंदोलन को सुलझाने के लिए मंगलवार को साढ़े तीन बजे विज्ञान भवन में किसान नेताओं के साथ बैठक करने के लिए मोदी सरकार के तीन मंत्री पहुंचे। सरकार की तरफ से बातचीत की कमान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के प्रभारी मंत्री पीयूष गोयल और कॉमर्स मिनिस्ट्री के राज्यमंत्री सोम प्रकाश ने संभाली। जबकि पहले चर्चा थी कि मोदी सरकार के दो सबसे शीर्ष मंत्री गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। आखिर दोनों बड़े मंत्री क्यों इस बैठक में नहीं शामिल हुए? आईएएनएस ने कारणों की तलाश की तो सरकार और भाजपा संगठन के सूत्रों ने अहम बात बताई।


सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर दिन में 11:30 बजे से 2:45 मिनट तक चली कई राउंड की बैठक में किसानों के साथ बातचीत के लिए कई संभावनाओं पर चर्चा हुई। तय हुआ कि एक साथ सरकार के सभी बड़े मंत्रियों को किसानों की बैठक में इन्वॉल्व करना ठीक नहीं होगा।

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किसानों का प्रदर्शन

दरअसल किसानों की अपनी मांगों को लेकर जिद देख कर सरकार को समझ में आया कि अगर आज शुरूआती बैठक किन्ही कारणों से सफल नहीं होती है, तो फिर आगे शीर्ष मंत्रियों के तौर पर अमित शाह और राजनाथ का कमान संभालना ठीक रहेगा। सरकार के रणनीतिकारों ने तय किया कि एक साथ सारे हथियार इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

मोदी सरकार अमित शाह और राजनाथ के रूप में अभी आखिरी दांव बचाकर रखना चाहती है। इसलिए किसानों से बातचीत के लिए सिर्फ तीन मंत्री भेजे गए। सरकार और संगठन के सूत्रों का कहना है कि अगर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, पीयूष गोयल और केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश विज्ञान भवन की बैठक में किसानों को समझाने में सफल रहे तो ठीक है, नहीं तो आगे चलकर गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह मोर्चा संभाल सकते हैं। आज की बैठक से सरकार को किसानों का मूड भांपने में आसानी होगी। (आईएएनएस)

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हिंदुओं में अन्य धर्मों के लोगों की तरह हिंसक मानसिकता नहीं होती है।(Wikimedia Commons)

पेजावर मठ के महंत विश्वप्रसन्ना तीर्थ स्वामीजी ने हाल के दिनों में बांग्लादेश और कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे हिंसा पर शनिवार को कहा कि हिंदुओं को यह सोचकर और प्रताड़ित करना सही नहीं है कि वे कुछ नहीं करते और चुप रहते हैं।

उन्होंने कहा कि हिंदुओं में अन्य धर्मों के लोगों की तरह हिंसक मानसिकता नहीं होती है पर सरकार को स्थिति से बाहर होने से पहले कार्रवाई करनी चाहिए।

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नवाब मलिक के अनुसार समीर वानखेडे एक मुस्लिम है! (Wikimedia commons)

बॉलीवुड के ड्रग्सवुड में तब्दील होती जा रही फिल्म इंडस्ट्री को रोकने के लिए एनसीबी ने जो मुहिम चलाई है जिसके कारण कई लोग एनसीबी के हत्थे चढ़ गए हैं जिसका सारा श्रेय एनसीब के निदेशक समीर वानखेड़े को जाता है। लेकिन लगता है वानखेड़े साहब की मुहिम कई लोगों को रास नहीं आ रही इन्हीं में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(राकांपा) के मंत्री नवाब मलिक भी है। जिन्होंने फिर एक बयान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े पर निशाना साधा है। उन्होंने संदेह जताते हुए कहा कि क्या वानखेड़े ने सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र जमा किया था, जिस पर उन्होंने पलटवार किया है और आरोपों का जोरदार खंडन किया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मलिक ने एक कथित जन्म प्रमाण पत्र और वानखेड़े की शादी की तस्वीर को कैप्शन के साथ ट्वीट किया है, "यहां से शुरू हुआ फर्जी वाड़ा। पहचान कौन।"


जन्म प्रमाण पत्र में एनसीबी प्रमुख का नाम 'समीर दाऊद वानखेड़े' के रूप में दिखाया गया है, और तस्वीर वानखेड़े की डॉ शबाना कुरैशी के साथ पहली शादी की है, जिसे बाद में उन्होंने तलाक दे दिया और मराठी फिल्मों की अभिनेत्री क्रांति रेडकर से शादी कर ली। राकांपा मंत्री ने दावा किया कि जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार, वानखेड़े एक जन्मजात मुस्लिम हैं, लेकिन कथित तौर पर एक आरक्षित श्रेणी के माध्यम से नागरिक सेवाओं (यूपीएससी) की परीक्षा में शामिल हुए और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी बन गए।

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प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी से आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना की शुरुआत की (twitter)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर थे। जहां से पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत मिशन की शुरुआत। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सरकार की कई उपलब्धियों का गुणगान तो किया ही साथ में विपक्ष पर जमकर निशाना भी साधा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद के लंबे कालखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितनी देश को जरूरत थी। देश में जिनकी लंबे समय तक सरकारें रहीं, उन्होंने देश के हेल्थकेयर सिस्टम के संपूर्ण विकास के बजाय, उसे सुविधाओं से वंचित रखा। यूपी में जिस तेजी के साथ नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, उसका बहुत अच्छा प्रभाव मेडिकल की सीटों और डॉक्टरों की संख्या पर पड़ेगा। ज्यादा सीटें होने की वजह से अब गरीब माता-पिता का बच्चा भी डॉक्टर बनने का सपना देख सकेगा और उसे पूरा कर सकेगा।

मोदी ने कहा कि जो काम दशकों पहले हो जाने चाहिए, उसे अब किया जा रहा है। हम पिछले सात साल से लगातार सुधार कर रहे हैं। अब बहुत बड़े स्केल पर इस काम को करना है। इस तरह का हेल्थ सिस्टम बनता है तो रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं। यह मिशन आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी माध्यम है। स्वास्थ्य सेवा पैसा कमाने का जरिया नहीं है। पहले जनता का पैसा घोटालों में जाता था। आज बड़े बड़े प्रोजेक्ट में पैसा लग रहा है। आजादी के बाद 70 साल में जितने डॉक्टर मेडिकल कॉलेज से पढ़कर निकले हैं उससे ज्यादा अगले दस साल में मिलने जा रहे हैं। जब ज्यादा डॉक्टर होंगे तो गांव गांव में डॉक्टर उपलब्ध होंगे। यही नया भारत है जहां आकांक्षाओं से बढ़ते हुए नए नए काम हो रहे हैं।

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