Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
होम

सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर कायम ;नहीं जलाए जाएंगे दिवाली पर पटाखे।

विशेष प्रतिबंधों के बावजूद बाजार में बिक रहे पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी।कहा हर राज्य को इन नियमो का पालन करना चहिये जिससे नागरिकों के जीवन पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े।

सुप्रीम कोर्ट ने बैन किया पटाखे। (Wikimedia Commons)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंधों के फैसले पर जोर देते हुए कहा की प्रत्येक राज्य को उसके इन आदेशों का सख्ती से पालन करना चाहिए क्योंकि यह देखा जा रहा है की नियमों के बावजूद बजार में पटाखे बेचे जा रहे हैं। जस्टिस एम.आर. शाह और जस्टिस ए.एस. बोपन्ना ने कहा, "हमारे पहले के आदेश का पालन हर राज्य द्वारा किया जाना चाहिए।कुछ रासायनिक यौगिकों वाले पटाखों जिनपर विशेष प्रतिबंध है, वह भी बाजार में खुले तौर पर उपलब्ध हैं।"

पीठ इस बात को साफ़ कर चुकी है की वह समारोह के खिलाफ नहीं है पर थोड़ी सी मस्ती के लिए लोगो की जान खतरे में डालना भी ठीक नहीं ही। साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि त्योहार का मतलब सिर्फ तेज पटाखों का उपयोग करना नहीं है। त्योहार 'फुलझड़ी' जलाकर भी मनाया जा सकता है, जिससे शोर भी नहीं होता और ज्यादा हानि भीं नहीं है।

याचिकाकर्ता अर्जुन गोपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उन्होंने सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है। रिपोर्ट को देखते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जो हुआ, वह बहुत परेशान करने वाला है।

एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में, सीबीआई ने पाया कि कई पटाखों में निर्माता प्रतिबंधित हानिकारक रसायनों का उपयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट यह भी दावा कर रही है कि पटाखा निर्माता भी उत्पाद के लेबल पर सही सामग्री का खुलासा नहीं कर रहे थे।



Diwali, Festival, Firecrackers, Ban पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर प्रतिबंध। (Pixabay)


अपने आदेशों का उल्लंघन होते देख गुस्साई पीठ ने पूछा , " पटाखे बाजार में खुलेआम बेचे जा रहे हैं और लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। हम जानना चाहेंगे कि जब प्रतिबंध है, तब वे बाजारों में कैसे उपलब्ध हैं?"

यह भी पढ़ें: क्या कोविड-19 सिर्फ हिंदु त्योहारों में ही सक्रिय होता है?

एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने भी कहा कि उद्योग को सरकार द्वारा जारी प्रोटोकॉल के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, "यह एक संगठित उद्योग है। लगभग पांच लाख परिवार हम पर निर्भर हैं..।" वहीँ एक अन्य वकील का कहना है कि यदि एक या दो निर्माता आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं तो पूरे उद्योग को दंडित नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत इस मामले पर अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को करेगी।

न्यूज़ग्राम के साथ Facebook, Twitter और Instagram पर भी जुड़ें!

Popular

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही है कृषि उड़ान 2.O योजना(Wikimedia commons)

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने बुधवार को कृषि उड़ान 2.0' योजना का शुभारंभ करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'कृषि उड़ान 2जेड.0' आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर कर किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी। यह योजना हवाई परिवहन द्वारा कृषि-उत्पाद की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव करती है।

सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"

Keep Reading Show less

चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

सत्याग्रह का सामन्य अर्थ होता है "सत्य का आग्रह।" सर्वप्रथम इसका प्रयोग महात्मा गांधी द्वारा किया गया था। उन्होंने भारत में कई आंदोलन चलाए, जिनमें चंपारण, बारदोली, खेड़ा सत्याग्रह आदि प्रमुख। हैं। सत्याग्रह स्वराज प्राप्त करने और सामाजिक संघर्षों को मिटाने का एक नैतिक और राजनीतिक अस्त्र है। आज हम ऐसे ही एक सत्याग्रह की बात करेंगे जिसे गांधी जी से प्रेणा लेकर शुरू किया गया था।

"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

Keep Reading Show less

वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Pixabay)

कोरोना काल में जब सब कुछ बंद चल रहा था । झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) में कोरोना काल के दौरान सैलानियों और स्थानीय लोगों का प्रवेश रोका गया तो यहां जानवरों की आमद बढ़ गयी। इस वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है। आप को बता दे कि लगभग एक दशक के बाद यहां हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा की भी आमद हुई है। इसे लेकर परियोजना के पदाधिकारी उत्साहित हैं। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट(Palamu Tiger Reserve) के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि लोगों का आवागमन कम होने जानवरों को ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल स्पेस हासिल हुआ और इसी का नतीजा है कि अब इस परियोजना क्षेत्र में उनका परिवार पहले की तुलना में बड़ा हो गया है।

पिछले हफ्ते इस टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) के महुआडांड़ में हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा के एक परिवार की आमद हुई है। फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष के मुताबिक एक जोड़ा नर-मादा चौसिंगा और उनका एक बच्चा ग्रामीण आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसे हमारी टीम ने रेस्क्यू कर एक कैंप में रखा है। चार सिंगों वाला यह हिरण देश के सुरक्षित वन प्रक्षेत्रों में बहुत कम संख्या में है।

Palamu Tiger Reserve वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Unsplash)

Keep reading... Show less