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हजारों मंदिरों का शहर- कांचीपुरम

यह शहर अपने मंदिरों के लिए विश्व विख्यात है। बेगवती नदी के किनारे बसे इस शहर में एक-एक मंदिर की कारगिरी और नक्काशी देखने लायक है।

कांचीपुरम शहर जिसे अब कांची कहते हैं (PIXABAY)

पल्लव वंश द्वारा बसाया गया कांचीपुरम शहर जिसे अब कांची कहते हैं यह भारत के तमिलनाडु राज्य मैं स्थित है चेन्नई से लगभग 70 किलोमीटर दूर कांचीपुरम नगर बसा हुआ है यह शहर अपने मंदिरों के लिए विश्व विख्यात है बेगवती नदी के किनारे बसे इस शहर में एक-एक मंदिर की कारगिरी और नक्काशी देखने लायक है। पहले यहां हजार मंदिर हुआ करते थे लेकिन आज 124 ही बचे हैं इसमें प्रमुख एंकबरेश्वर मंदिर, कामाक्षी अम्मन मंदिर, कैलाश नाथ मंदिर यह नक्काशी और वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है यह भगवान शिव को समर्पित है और देवराजस्वामी मंदिर और पेरूमल मंदिर प्रमुख हैं। यहां का हर मंदिर द्रविड़ शैली से बना हुआ है। यह एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ कांचीपुरम अपनी सिल्क साड़ियों के लिए भी काफी ज्यादा प्रसिद्ध है ,इस शहर की खासियत यह भी है कि यहां भगवान शिव और विष्णु दोनों को दोनों की पूजा की जाती है।

कैलाश नाथ मंदिर :


यह मंदिर हिंदु धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है जो कि वेदवती नदी के किनारे , तमिलनाडु राज्य के कांचीपुरम शहर में स्थित है। यह मंदिर हिंदू भक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है और पूरे वर्षभर विशेष रूप से महाशिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैऔर भीड़ होती है । कांची कैलाशनाथ मंदिर में सुंदर चित्र और शानदार मूर्तियों इस मंदिर की सोभा बढाती है। इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण कार्य को पल्लव शासक राजसिम्हा नेशुरू किया गया था, और आगे चलकर उनके पुत्र महेंद्र वर्मा पल्लव ने इसे पूराकरवाया था। इस मंदिर में आपको दर्शन करने जरुर जाना चाहिए ।

कांची कैलाशनाथ मंदिर में सुंदर चित्र और शानदार मूर्तियों इस मंदिर की सोभा बढाती है।

 \u0915\u0948\u0932\u093e\u0936\u0928\u093e\u0925 \u092e\u0902\u0926\u093f\u0930 कांची कैलाशनाथ मंदिर में सुंदर चित्र और शानदार मूर्तियों इस मंदिर की सोभा बढाती है।(wikimedia commons )



कामाक्षी अम्मन मंदिर :

कामाक्षी अम्मन मंदिर कामाक्षी देवी को समर्पित है, जिन्हें देवी पार्वती का अवतार माना गया है। यह देवी कामाक्षी अम्मन मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, इस मंदिर के बारे में एसा माना जाता है कि जब भगवान शिव माता सती की पार्थिव शारीर को लेकर जा रहे थे तो , इस स्थान पर देवी सती की नाभि गिरी थी।यह मंदिर बहुत महत्वपूर्ण मंदिर है ।

\u0915\u093e\u092e\u093e\u0915\u094d\u0937\u0940 \u0905\u092e\u094d\u092e\u0928 \u092e\u0902\u0926\u093f\u0930 यह देवी कामाक्षी अम्मन मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है (wikimedia commons)



वरदराज पेरुमल मंदिर :

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। एसा माना जाता है कि यह भगवान विष्णु को समर्पित 108 नमो में से एक है यह मंदिर हिंदुओ की धार्मिक आस्था का केंद्र है और इसका अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस मंदिर का परिसर बेहद बड़ा है । बात करे इस मंदिर के निर्माण को लेकर तो इसे चोल वंश के राजाओं ने बनवाया था। भगवान विष्णु के दर्शन के लिए दुनिया भर से भक्त कांचीपुरम के इस मंदिर में आते हैं।

देवराज स्वामी मंदिर:

इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण विजयनगर के राजाओं ने करवाया था। यह हिंदू धर्म का लोकप्रिय धार्मिक तीर्थ स्थल है जो की भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर की नक्काशी बेहद खुबसूरत है मंदिर के अंदर भवन में अलंकृत उत्कीर्ण स्तंभ हैं। यहा इस मंदिर में एक विवाह कक्ष है जिसे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के विवाह की याद में बनाया गया था। इसमें एक पानी की टंकी भी है जिसके अंदर भगवान विष्णु की एक बड़ी मूर्ति है।

यह भी पढ़ें : मध्यप्रदेश की संगमरमर नगरी जबलपुर

पहुंच मार्ग :

कांचीपुरम जिले का निकटतम एयरपोर्ट चैन्नई है जो यहा से लगभग 75 किलोमीटर दूर है। चैन्नई से कांचीपुरम लगभग 2 घंटे में पहुंचा जा सकता है। वहीं बात करे रेल्वे मार्ग कि तो कांचीपुरम का रेलवे स्टेशन चैन्नई, चेन्गलपट्टू, तिरूपति और बैंगलोर से जुड़ा है। यहाँ चेन्नई उपनगरीय रेलवे-दक्षिण लाइन का एक भी स्टेशन है।सड़क मार्ग से भी यहा पंहुचा जा सकता हैं ,कांचीपुरम तमिलनाडु के लगभग सभी शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा है। विभिन्न शहरों से कांचीपुरम के लिए बसें चलती हैं।

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही है कृषि उड़ान 2.O योजना(Wikimedia commons)

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सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"

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चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

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"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

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वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Pixabay)

कोरोना काल में जब सब कुछ बंद चल रहा था । झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) में कोरोना काल के दौरान सैलानियों और स्थानीय लोगों का प्रवेश रोका गया तो यहां जानवरों की आमद बढ़ गयी। इस वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है। आप को बता दे कि लगभग एक दशक के बाद यहां हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा की भी आमद हुई है। इसे लेकर परियोजना के पदाधिकारी उत्साहित हैं। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट(Palamu Tiger Reserve) के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि लोगों का आवागमन कम होने जानवरों को ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल स्पेस हासिल हुआ और इसी का नतीजा है कि अब इस परियोजना क्षेत्र में उनका परिवार पहले की तुलना में बड़ा हो गया है।

पिछले हफ्ते इस टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) के महुआडांड़ में हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा के एक परिवार की आमद हुई है। फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष के मुताबिक एक जोड़ा नर-मादा चौसिंगा और उनका एक बच्चा ग्रामीण आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसे हमारी टीम ने रेस्क्यू कर एक कैंप में रखा है। चार सिंगों वाला यह हिरण देश के सुरक्षित वन प्रक्षेत्रों में बहुत कम संख्या में है।

Palamu Tiger Reserve वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Unsplash)

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