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सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज़ का आजादी में योगदान

सुभाष नहीं चाहते थे कि भारत दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों का साथ दे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर (Wikimedia Commons)

भारत के इतिहास में बहुत से महानायक हुए हैं जिन्होंने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हीं में से एक थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस। इनका आज़ाद हिंद फौज़ में जो किरदार रहा है उसे कोई नहीं भूल सका है। सुभाष चंद्र बोस एक बुद्धिमान व्यक्ति थे, जो भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराना चाहते थे। सुभाष जी पहले कुछ समय के लिए महात्मा गाँधी के साथ थे, लेकिन विचार न मिलने की वजह से वह अलग हो गये थे। सुभाष अंग्रेजों की कमजोरियों पर प्रहार करना चाहते थे। वह नहीं चाहते थे कि भारत दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों का साथ दे क्योंकि वह अंग्रेजों को तनाव की स्थिति में डालना चाहते थे। यह बात अंग्रेजों को गवारा नहीं थी जिसकी वजह से उन्होंने सुभाष को जेल में बंद कर दिया था।

जेल में जाने के बाद भी सुभाष के हौसले पस्त नहीं हुए, उन्होंने जेल में भी अपनी लड़ाई जारी रखी। फिर सुभाष को अंग्रेजो द्वारा उनके घर में नज़रबंद किया गया। इसी समय वह अंग्रेजों के चंगुल से निकल कर जर्मनी भाग गए। जर्मनी में उन्हे ज्यादा सफलता नही मिल सकी। बाद में वह सिंगापूर चलें गए जहां रासबिहारी बोस ने सुभाष जी को आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान सौंप दी। फौज को नेताजी के दृढ़ संकल्प और नेतृत्व के साथ पुनर्जीवित किया गया और 1943 में इन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में प्रवेश किया। इन्होंने 85 हज़ार सैनिकों की मजबूत सेना खड़ी कर दी थी।


इस फौज को बहुत से बड़े देशों ने मान्यता भी दी थी। जापान का खासतौर पर आज़ाद हिंद फ़ौज को पूरा समर्थन था क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध में जापान भी अंग्रेजों के खिलाफ था। बोस को युवाओं की ताकत पर भरोसा था, उन्होंने सैनिकों को सब कुछ त्यागने और राष्ट्र की लड़ाई का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया। उनके 'दिल्ली चलो' और 'जय हिंद' के नारों ने उनके लिए कई समर्थकों का दिल जीत लिया। वह जानते थे अगर युवा एकजुट हो गए तो अंग्रेजों की हार पक्की है। इस फ़ौज में सिर्फ आदमी ही नहीं थे बल्कि महिलाएँ भी शामिल थी।

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महिला रेजिमेंट की कमांड कैप्टन लक्ष्मी के हाथों में थी। महिलाओं को हथियार कौशल जैसे प्रशिक्षण दिए गए और युद्ध के लिए तैयार किया गया। फौज ने देशवासियों को आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रेडियो स्टेशन की स्थापना भी की थी। जहां से वह लोगों तक खबरे पहुंचाया करते थे।आज़ाद हिंद फ़ौज की वजह से देश के लोगों में क्रांति की लहर देखने को मिली थी। इन्ही की वजह से कई लोगों ने भारत को आजाद कराने का दृढ़ संकल्प लिया था। इस फ़ौज ने भारत की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान दिया था। दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद आज़ाद हिंद फौज़ के ज्यादातर सदस्यों को अंग्रेजों ने पकड़ लिया और 1945 में सुभाष चंद्र बोस की विमान दुर्घटना में मृत्यु की सूचना मिली थी।

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