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बांके बिहारी मंदिर के बारे में रोचक तथ्य

बांके बिहारी मंदिर में साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

Wikimedia Commons

बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।


2) बहुत से लोगों को यह बात मालूम नहीं है कि कृष्ण जी को बांके बिहारी क्यों कहा जाता है। कृष्ण जी की हर मूर्ति को बांके बिहारी नहीं कहा जाता, सिर्फ उसी मूर्ति को बांके बिहारी कहा जाता है जो तीन जगह से झुकी हो या मुड़ी हो। यह तीन जगह है होठों पर बांसुरी लगाए, एक पैर में दूसरा पैर फसाए और कमर से झुकी हुई मूर्ति को ही बांके बिहारी कहा जाता है।

3) बांके बिहारी मंदिर में श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। इसी लिए उनके हाथों में बांसुरी नहीं पकड़ाई जाती है ताकि वह थक न जाए। लेकिन साल में सिर्फ शरद पूर्णिमा के दिन ही बांसुरी दी जाती है।

4) बांके बिहारी मंदिर में मूर्ति के आगे पर्दा लगा होता है जिसे हर थोड़े समय बाद हटाया लगाया जाता है। ऐसा इसलिए होता है ताकि कान्हा जी की आंखे किसी भक्त के साथ न मिले और वह कान्हा जी को अपने साथ न ले जाए।

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5) आपको यह बात जान कर बहुत अचम्भा होगा कि बांके बिहारी के चरणों के दर्शन साल में सिर्फ एक बार ही होते हैं। वह दिन होता है अक्षय तृतीया का जब बांके बिहारी के चरणों के दर्शन होते हैं।

6) अगर किसी भक्त को बांके बिहारी के झूले पर बैठे हुए दर्शन करने है तो उसे हरियाली तीज के दिन ही आना होगा क्योंकि सिर्फ उसी दिन ही बिहारी जी झूले पर बैठते है।

7) श्री बांके बिहारी लाल की मंगल आरती हर दिन नहीं की जाती है। बल्कि साल में सिर्फ एक बार ही बांके बिहारी की मंगल आरती की जाती है। वह दिन है जन्माष्टमी का, वो भी 12 बजे के बाद।

8) बांके बिहारी की मूर्ति सिर्फ कृष्ण जी की ही नहीं बल्कि राधा जी का भी रूप है। जो भी बांके बिहारी जी के दर्शन करता है वह कृष्ण और राधा दोनों के एक साथ दर्शन कर लेता है।

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