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अब कृषि कचरे से भी कमाई कर सकते हैं किसान

पराली जलाने से किसान ना केवल कमाई बल्कि हाइड्रोजन के उत्पादन में भी सरकार की सहायता कर सकता है।

भूमि का पराली जलाना। (WIKIMEDIA COMMONS)

मॉनसून की वापसी की आधिकारिक तौर पर उलटी गिनती शुरू होने के साथ ही खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों की आशंका शुरू हो गई है। मॉनसून की वापसी होते ही, उल्टी गिनती शुरू होने के साथ खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों की चिंता भी शुरू हो गई है। पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा 'पराली' (पराली जलाना) प्रदूषण का मूल कारण है। परंतु अब यही किसान ना केवल कृषि कचरे से कमाई , बल्कि हाइड्रोजन के उत्पादन में भी सहायता कर सकते हैं।

पुणे के शोधकर्ताओं द्वारा कृषि अवषेशों से हाइड्रोजन के सीधे उत्पादन के लिए एक अनोखी तकनीक विकसित की है। यह नवाचार हाइड्रोजन उपलब्धता की चुनौती पर काबू पाकर पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन ईंधन-सेल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे सकता है। भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के हिस्से के रूप में विश्व समुदाय से कई कदमों का वादा किया है, भारत ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने के लिए कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए कार्रवाई करेगा। इसने 2030 तक 450 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रखा है।


शोधकर्ता अक्षय ऊर्जा समाधान की दिशा में काम करते हुए जो सीमित कार्बन पदचिह्न् के साथ टिकाऊ होना चाहिए, प्रचुर मात्रा में और नवीकरणीय स्रोत से हाइड्रोजन का उत्पादन प्राप्त करने का सबसे किफायती और सस्ता तरीका है। कृषि अपशिष्ट, हाइड्रोजन उत्पादन के स्रोतों में से एक हो है। कृषि अपशिष्ट, जिसे निपटान के लिए एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है हाइड्रोजन उत्पादन के स्रोत ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट निपटान की दोहरी समस्या को हल कर सकता है। आगरकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई), पुणे के शोधकर्ताओं की एक टीम,विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार का एक स्वायत्त संस्थान,केपीआईटी प्रौद्योगिकियों की संवेदनशील प्रयोगशालाएं के सहयोग से, प्रयोगशाला स्तर पर प्रौद्योगिकी विकसित की है।

Air Pollution, Hydrogen production, Technologies पर्यावरण प्रदूषण वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी के लिए भी हानिकारक है।(PIXABAY)

एआरआई के निदेशक डॉ प्रशांत ढाकेफलकर ने कहा, "हमारी तकनीक आज इस्तेमाल की जाने वाली पारंपरिक अवायवीय पाचन प्रक्रियाओं की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक कुशल है। दो चरणों की प्रक्रिया बायोमास के पूर्व-उपचार को समाप्त करती है। इस प्रकार प्रक्रिया को किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाती है। यह प्रक्रिया एक पाचन उत्पन्न करती है जो समृद्ध है पोषक तत्व, जिनका उपयोग जैविक उर्वरक के रूप में किया जा सकता है।" प्रौद्योगिकी के डेवलपर्स ने बताया कि हाइड्रोजन ईंधन के उत्पादन की प्रक्रिया में एक विशिष्ट रूप से विकसित माइक्रोबियल कंसोर्टियम का उपयोग शामिल है, जो सेल्यूलोज के बायोडिग्रेडेशन की सुविधा प्रदान करता है और हेमिकेलुलोज-समृद्ध कृषि अवशेष, जैसे कि धान, गेहूं, या मक्का के बायोमास, बिना थर्मो-केमिकलया एंजाइमी पूर्व उपचार करना है।

डेवलपर्स ने कहा, "प्रक्रिया पहले चरण में हाइड्रोजन और दूसरे में मीथेन उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया में उत्पन्न मीथेन का उपयोग अतिरिक्त हाइड्रोजन उत्पन्न करने के लिए भी किया जा सकता है।" सेंटिएंट लैब्स के अध्यक्ष रवि पंडित ने कहा, "अनुपयोगी कृषि अवशेषों से हाइड्रोजन पैदा करने की यह सफलता हमें ऊर्जा संसाधनों पर आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी। इससे किसान समुदाय को राजस्व का एक बड़ा प्रवाह भी मिलेगा।"

यह भी पढ़ें: भारतीय वैज्ञानिकों ने विस्फोटकों में प्रयुक्त रसायनों का तेजी से पता लगाने के लिए विकसित किया सेंसर

महाराष्ट्र एसोसिएशन फॉर कल्टीवेशन ऑफ साइंस (एमएसीएस-एआरआई) के डॉ एसएस डागर और प्रणव क्षीरसागर और केपीआईटी-सेंटिएंट के कौस्तुभ पाठक ने इस प्रक्रिया के विकास में योगदान दिया। गुरुवार को जारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा एक विज्ञप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। साथ ही, आईपीआर की सुरक्षा के लिए एक भारतीय पेटेंट आवेदन दायर किया गया है।

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही है कृषि उड़ान 2.O योजना(Wikimedia commons)

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने बुधवार को कृषि उड़ान 2.0' योजना का शुभारंभ करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'कृषि उड़ान 2जेड.0' आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर कर किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी। यह योजना हवाई परिवहन द्वारा कृषि-उत्पाद की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव करती है।

सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"

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चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

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"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

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वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Pixabay)

कोरोना काल में जब सब कुछ बंद चल रहा था । झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) में कोरोना काल के दौरान सैलानियों और स्थानीय लोगों का प्रवेश रोका गया तो यहां जानवरों की आमद बढ़ गयी। इस वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है। आप को बता दे कि लगभग एक दशक के बाद यहां हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा की भी आमद हुई है। इसे लेकर परियोजना के पदाधिकारी उत्साहित हैं। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट(Palamu Tiger Reserve) के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि लोगों का आवागमन कम होने जानवरों को ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल स्पेस हासिल हुआ और इसी का नतीजा है कि अब इस परियोजना क्षेत्र में उनका परिवार पहले की तुलना में बड़ा हो गया है।

पिछले हफ्ते इस टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) के महुआडांड़ में हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा के एक परिवार की आमद हुई है। फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष के मुताबिक एक जोड़ा नर-मादा चौसिंगा और उनका एक बच्चा ग्रामीण आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसे हमारी टीम ने रेस्क्यू कर एक कैंप में रखा है। चार सिंगों वाला यह हिरण देश के सुरक्षित वन प्रक्षेत्रों में बहुत कम संख्या में है।

Palamu Tiger Reserve वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Unsplash)

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