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हरिद्वार : हर 10 वर्ष में 40% की रफ़्तार से बढ़ रही है विशेष समुदाय की आबादी

इन सब घटनाओं कुछ विशेषज्ञों की मानें तो उत्तरखंड के हरिद्वार जिले में बढ़ती मुस्लिम आबादी के पीछे अवैध घुसपैठ और सीमा से लगे जिलों से होने वाला पलायन है।

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहा हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है (wikimedia commons)

उत्तराखंड देवभूमि के नाम से विख्यात है , यहां हिंदु धर्म के कई तीर्थ स्थल हैं। उत्तराखंड राज्य के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ विशेष कदम उठाये हैं। इस माह की शुरुआत में धामी सरकार ने प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से बढ़ती मुस्लिम आबादी पर काबू करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण नीति लाने पर हामी भरी थी। धामी सरकार से RSS से जुड़े 35 संगठनों ने यह मांग की थी। कई हिन्दूवादी संगठनों का दावा है कि उत्तराखंड के कई शहर देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मुस्लिम आबादी कुछ सालों में लगातार बढ़ रही है ।

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहां हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है यह हिंदुओ के आस्था का केंद्र रहा है। सनातन धर्म के प्रमुख केंद्रों में एक, जहां सभी मठ, अखाड़े और आध्यात्मिक केंद्र स्थित हैं। यह हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक कार्यो की पवित्र भूमि है। यहां पर हिन्दू अस्थि विसर्जन से लेकर जनेऊ या उपनयन संस्कार और यंहा तक की काँवड़ यात्रा में जाने के लिए भक्त जन यंहा गंगा जल तक लेने आते हैं।


क्या है पूरा मामला :

हिंदु धर्म के इस तीर्थ स्थल नगरी हरिद्वार शहर को मुस्लिम आबादी ने घेर लिया है। गंगा किनारे की इस पावन भूमि में साजिश के तहत बहुत ज्यादा मुस्लिम आबादी बढ़ती जा रही है। अगर आँकड़ों की बात करे तो हरिद्वार की मुस्लिम आबादी हर दस साल में 40% की रफ्तार से बढ़ रही है। यह आँकड़े बहुत ही चौकाने वाले और चिंताजनक हैं।

एक अनुमान के अनुसार हरिद्वार शहर में मुस्लिम समुदाय की आबादी अब यहाँ पर बसे लोगों की कुल आबादी की लगभग 39% के आसपास हो गई है और यह लगातार बढ़ती जा रही है जो की इस साल के अंत तक लगभग 22 लाख के आस-पास होने का अनुमान है। हरिद्वार को पूरी तरह घेरने के बाद अब मुस्लिम समुदाय अवैध रूप या गलत ढंग से से गंगा किनारे बसे वन विभाग की जमीन और कैनाल की जमीन पर बसने लगा है।

इन सब घटनाओं पर कुछ विशेषज्ञों की मानें तो उत्तरखंड के हरिद्वार जिले में बढ़ती मुस्लिम आबादी के पीछे अवैध घुसपैठ और सीमा से लगे जिलों से होने वाला पलायन है। आप को बता दे कि हरिद्वार जिले के साथ यूपी के मुख्य जिले सहारनपुर,बिजनौर , मुजफ्फरनगर, मेरठ, जिलो की सीमा लगती हैं और इन जिलों में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है। जिससे से की आसानी से यहा एक जगह से दूसरी जगह जाया जा सकता है ।

वर्ष 2000 में जब उत्तर प्रदेश राज्य से अलग होकर उतरांचल एक नया राज्य बना तब उत्तराखंड बनते ही हरिद्वार जिले में उद्योगों का जाल बिछाया गया , जिसमें लेबर सप्लाई करने वाले ठेकेदारों ने काम की तलाश में आए यूपी के जिलों के मुस्लिमों की भर्ती बड़े पैमाने पर की। और इसके अलावा गंगा नदी और उसकी प्रमुख सहायक नदियों में खनन के काम में अन्य राज्य बिहार से आए मजदूर वर्ग यहाँ आकर नदी किनारे बसते चले गए। यह भी एक मुख्य कारण रहा ।

\u0909\u0924\u094d\u0924\u0930\u093e\u0916\u0902\u0921 उत्तराखंड देवभूमि के नाम से विख्यात है , यंहा हिंदु धर्म के कई तीर्थ स्थल है (wikimedia commons)

वैसे भी पिछले बीस सालों में हरिद्वार से लेकर देहरादून, ऋषिकेश में आबादी का विस्तार हुआ है ,जनसँख्या बढ़ी है । जिससे यहां काम करने वाले , इमारतें बनाने वाले मजदूर, बढ़ई, फिटर का धंधा करने वाले कुम्भ क्षेत्र के बाहर आकर बसने लगे। नए आँकड़ों के मुताबिक राज्य में मुस्लिम समुदाय की अधिकतर आबादी देहरादून, उधमसिंहनगर और हरिद्वार में सिमटी हुई है,जो लगातार और तेजी से बढ़ती जा रही है।

इसके अतिरिक्त, हिन्दू संगठनों का कहना है कि इन इलाकों में न केवल मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है, बल्कि मुसलमानों से जुड़े धार्मिक स्थलों की भी अवैध रूप से विकास हुआ है, जिनकी पहचान कर जरूरी एक्शन लिया जाना चाहिए।

इन सब के बीच हाल ही में धामी सरकार के एक फैसले से स्थानीय लोग नाराज भी नजर आ रहे हैं। यहां उधम सिंह नगर जिले के कई इलाकों में बंगाली समुदाय के करीब ढाई लाख से अधिक लोग वर्तमान में निवास करते हैं।

इस समुदाय के लोगो की बहुत समय से माँग थी, कि उनके परिचय पत्र में 'पूर्व पाकिस्तानी' नाम लिखा है जिसके कारण उन्हें शर्मिंदा भी होना पड़ता है। इन सब पर गत अगस्त माह में उतरखंड राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए , घोषणा की, कि अब बंगाली समुदाय के लोगों को कोई भी पूर्व पाकिस्तानी नहीं कहेगा। और साथ ही जाति प्रमाण पत्र पर लिखे गए 'पूर्व पाकिस्तानी' शब्द को अब हटा दिया जाएगा। इसका निर्णय धामी सरकार की हुई कैबिनेट बैठक में ले लिया गया है।

आंकड़ो की बात करे तो 2001 की जनगणना के अनुसार उधमसिंह नगर की आबादी 12,35,614 थी, जिसमें 2,55,000 मुस्लिम थे। 2011 में जिले की आबादी 16,48,902 थी, जिसमें 22.58% यानी, 3,72,267 की मुस्लिम आबादी हो गई।

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वहीं ताजा आँकड़े इस ओर मजबूती से इशारा कर रहे हैं कि 2022 में जिले में समुदाय विशेष की आबादी बढ़कर 33.40% होने वाली है। सरकारी अनुमान के अनुसार जिले उधमसिंह नगर की जनसख्या 2022 में बढ़ कर 19,12,726 हो जाएगी और इसमें मुस्लिम आबादी करीब 7 लाख हो जाने का अनुमान लगाया जा रहा है ।उतराखंड राज्य में मुस्लिम आबादी का बढ़ना, भविष्य में देवभूमि के स्वरूप को खंडित करने की दीर्घकालीन समय साज़िश का स्पष्ट संकेत है। उत्तराखंड राज्य भी आज उसी जगह पर है, जहाँ समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी पैदा कर रही है चिंता।

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