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​देश के विकास में भारतीय प्रवासियों का है महत्त्वपूर्ण योगदान

भारत के 18 मिलियन प्रवासी बना रहे दुनिया भर में अपनी पहचान और ऊँचा कर रहे देश का नाम।

भारत के 18 मिलियन व्यक्ति अपने जन्म के देश से बाहर रह रहे। [ Wikimedia Commons]

भारत जनसंख्या के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर गिना जाता है। भारत जनसंख्या ही नहीं बल्कि प्रवासियों के मामले में भी दुनिया से आगे है। यूएन डीईएसए के जनसंख्या प्रभाग द्वारा जारी रिपोर्ट, 'इंटरनेशनल माइग्रेशन 2020 हाइलाइट्स' में कहा गया है कि 2020 में, भारत के 18 मिलियन व्यक्ति अपने जन्म के देश से बाहर रह रहे थे।

इसमें कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और सऊदी अरब में भारत के प्रवासियों की सबसे बड़ी संख्या है। भारत से बड़ी संख्या में प्रवासियों की मेजबानी करने वाले अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कुवैत, ओमान, पाकिस्तान, कतर और यूके जैसे देश शामिल हैं।


भारत के बाद सबसे बड़े डायस्पोरा वाले देश हैं - मेक्सिको (11 मिलियन ),रूस (11 मिलियन ), चीन (10 मिलियन ) और सीरिया (8 मिलियन ) ।

यह भी पढ़ें: सुब्रमण्यम स्वामी ने भाजपा से नाराजगी अलग ही अंदाज में जताई

संयुक्त राष्ट्र डीईएसए में जनसंख्या प्रभाग के निदेशक जॉन विल्मोथ ने रिपोर्ट के शुभारंभ पर कहा कि भारत से प्रवास काफी हद तक श्रम और पारिवारिक कारणों से प्रेरित है।

मेनोज़ी ने कहा की भारतीय प्रवासी में मुख्य रूप से ऐसे लोग शामिल हैं जो काम कर रहे हैं, लेकिन छात्र और वे लोग भी हैं जो पारिवारिक कारणों से चले गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में पैदा हुए प्रवासियों की बहुत बड़ी उपस्थिति है, खाड़ी देशों में जहां वे निर्माण, आतिथ्य और देखभाल सेवाओं में काम कर रहे वहीँ देशों की आर्थिक समृद्धि में भी केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय डायस्पोरा में अत्यधिक कुशल वैज्ञानिक, इंजीनियर और डॉक्टर भी शामिल हैं।

indian economy, indian diaspora,indians देश के विकाश में प्रवासियों का महत्त्वपूर्ण योगदान। [Wikimedia Commons ]


2000 से 2020 की अवधि में भारतीय प्रवासियों की संख्या में 10 मिलियन की वृद्धि हुई है। आज भी वे सभी भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े हुए हैं। अपने देश के विकाश में भी प्रवासियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। यही नहीं अपने निवास के देश में भी प्रवासी भारतियों ने महत्त्वपूर्ण योगदान देकर दुनियाभर में ज्ञान और विकास में वृद्धि की है। विभिन्न देशों में उनका प्रतिष्ठित पदों पर होना भारत की रणनीति के लिए भी काफी लाभप्रद साबित हुआ है। ये अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क बनाकर घर और मेजबान देश के बीच महत्त्वपूर्ण लिंक के तौर पर भी जाने जाते हैं।

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पिछले हफ्ते इस टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) के महुआडांड़ में हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा के एक परिवार की आमद हुई है। फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष के मुताबिक एक जोड़ा नर-मादा चौसिंगा और उनका एक बच्चा ग्रामीण आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसे हमारी टीम ने रेस्क्यू कर एक कैंप में रखा है। चार सिंगों वाला यह हिरण देश के सुरक्षित वन प्रक्षेत्रों में बहुत कम संख्या में है।

Palamu Tiger Reserve वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Unsplash)

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