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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का महत्व

यहाँ पर नदी और घाटों के नजारे कई गुना ज्यादा सुंदर दिखाई देते हैं।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में स्थित है(wikimedia commons)

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में स्थित है । भगवान शिव के इस मंदिर की महिमा निराली है , ममलेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन के साथ ही ओंकार पर्वत की परिक्रमा का विशेष महत्व है। यहाँ पर नदी और घाटों के नजारे कई गुना ज्यादा सुंदर दिखाई देते हैं। यहा की यात्रा के दौरान कई प्रकार से ऐतिहासिक घाटों, प्राकृतिक खूबसूरती को संजोए पर्वत, आश्रमों, डेम, बोटिंग आदि का लुत्फ भी लिया जा सकता है। यहाँ पर भक्तजन आ कर भगवान शंकर के जयकारे लगाते है । वास्तव में यह ज्योतिर्लिंग दो मंदिरों में विभक्त है , ओंकारेश्वर मांधाता , नर्मदा नदी के मध्य द्वीप पर स्थित है। दक्षिणी तट के किनारे पर ममलेश्वर (प्राचीन नाम अमरेश्वर) मंदिर स्थापित है । ओंकारेश्वरधाम मंदिर में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। आप को बता दें कि इन दोनों शिवलिंगों को एक ही ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

\u0928\u0930\u094d\u092e\u0926\u093e \u0928\u0926\u0940 ओंकारेश्वर मांधाता , नर्मदा नदी के मध्य द्वीप पर स्थित है। दक्षिणी तट के किनारे पर ममलेश्वर मंदिर स्थापित है । (wikimedia commons)



इंदौर से 75 कि.मी. इंदौर-खंडवा हाईवे पर यह हिंदुओं का एक पवित्र स्थल है। ओंकार ममलेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है । हिंदु संप्रदायों और विदेशियों के लाखों श्रद्धालु हर साल यहा दर्शन करने आते हैं। भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के अलावा यहाँ पर घुमने के लिए आदिगुरु शंकराचार्य के गुरू गोविन्द जी की गुफा, सिद्धनाथ के भव्य मंदिर के भग्नावशेष, गौरी सोमनाथ का मंदिर, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर इस स्थान पर स्थित हैं। आप को बता दें कि इस द्वीप के प्रणकाक्षर "ॐ" के आकार के कारण ही इस स्थान का नाम ओंकारेश्वर है । इस मंदिर कि पोराणिक कथाओ में यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव शंकर और माता पारवती यहा पर आते थे । सावन के महीने में बाबा भोलेनाथ के भक्त यहाँ आकर दर्शन करते हैं और यहाँ का माहोल भक्तिमय हो जाता है । यहाँ पर "ॐ" आकर पर्वत की परिक्रमा भी करना चाहिए जो लगभग 7 km हैं , यहा पर 2 नदियों का संगम भी होता है । हिंदु धर्म के अलावा याहव पर जैन धर्म का तीर्थ सिद्धवरकूट भी नजदीक स्थित है । यहॉं पर जैन धर्म के कईं प्राचीन मंदिर हैं इनमे से कुछ का नवीनीकरण किया गया है। यहॉं की चित्र को देखने से एसा प्रतीत होता है कि लगभग 1488 ई. के आसपास की हैं । चित्रों में प्रमुखत: तीर्थंकर भगवान श्री शांतिनाथ जी का वर्णन है

यह भी पढ़ें :राम भक्तों द्वारा दान की गई ईंटों का राम मंदिर में किया जाएगा इस्तेमाल

पहुंच मार्ग :

ओंकारेश्वर जाने के लिए ट्रेन और बस दोनों ही तरह के साधन उपलब्ध हैं। ट्रेन से जाने वाले लोगों को ओंकारेश्वर रोड स्टेशन ही उतरना पड़ता है। यहां ओंकारेश्वर मंदिर की दूरी लगभग 13 किमी रह जाती है। मंदिर पहुंचने के लिए यहां से कई तरह के साधन उपलब्ध हैं। लेकिन सड़क मार्ग प्रमुख है । एयरलाइन के लिए आप इंदौर के एयरपोर्ट पर उतर कर यंहा तक आ सकते हैं ।

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से चलाई जा रही है कृषि उड़ान 2.O योजना(Wikimedia commons)

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने बुधवार को कृषि उड़ान 2.0' योजना का शुभारंभ करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'कृषि उड़ान 2जेड.0' आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर कर किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करेगी। यह योजना हवाई परिवहन द्वारा कृषि-उत्पाद की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव करती है।

सिंधिया(Jyotiraditya Scindia) ने कहा, "यह योजना कृषि क्षेत्र के लिए विकास के नए रास्ते खोलेगी और आपूर्ति श्रृंखला, रसद और कृषि उपज के परिवहन में बाधाओं को दूर करके किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। क्षेत्रों (कृषि और विमानन) के बीच अभिसरण तीन प्राथमिक कारणों से संभव है - भविष्य में विमान के लिए जैव ईंधन का विकासवादी संभावित उपयोग, कृषि क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग और योजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का एकीकरण और मूल्य प्राप्ति।"

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चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

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"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

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वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Pixabay)

कोरोना काल में जब सब कुछ बंद चल रहा था । झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) में कोरोना काल के दौरान सैलानियों और स्थानीय लोगों का प्रवेश रोका गया तो यहां जानवरों की आमद बढ़ गयी। इस वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है। आप को बता दे कि लगभग एक दशक के बाद यहां हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा की भी आमद हुई है। इसे लेकर परियोजना के पदाधिकारी उत्साहित हैं। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट(Palamu Tiger Reserve) के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि लोगों का आवागमन कम होने जानवरों को ज्यादा सुरक्षित और अनुकूल स्पेस हासिल हुआ और इसी का नतीजा है कि अब इस परियोजना क्षेत्र में उनका परिवार पहले की तुलना में बड़ा हो गया है।

पिछले हफ्ते इस टाइगर रिजर्व(Palamu Tiger Reserve) के महुआडांड़ में हिरण की विलुप्तप्राय प्रजाति चौसिंगा के एक परिवार की आमद हुई है। फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष के मुताबिक एक जोड़ा नर-मादा चौसिंगा और उनका एक बच्चा ग्रामीण आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसे हमारी टीम ने रेस्क्यू कर एक कैंप में रखा है। चार सिंगों वाला यह हिरण देश के सुरक्षित वन प्रक्षेत्रों में बहुत कम संख्या में है।

Palamu Tiger Reserve वन्य जीव अभयाण्य में अब हिरण, चीतल, तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जानवरों का परिवार बढ़ गया है।(Unsplash)

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