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हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के कारणों से होने वाली बीमारियों से अनजान जनता

एक हैरान कर देने वाले सर्वे के अनुसार, भारत में हृदय रोग के 50 प्रतिशत से अधिक रोगी केवल आपातकालीन स्थिति में ही चिकित्सकीय सलाह लेते हैं, जिससे पता चलता है कि लोगों के बीच हृदय रोग की जागरूकता ना के बराबर है।

ह्रदय रोग और उच्च रक्तचाप के कारण से होने वाली बीमारियों से अनजान। (pixabay)

एक हैरान कर देने वाले सर्वे के अनुसार, भारत में हृदय रोग के 50 प्रतिशत से अधिक रोगी केवल आपातकालीन स्थिति में ही चिकित्सकीय सलाह लेते हैं, जिससे पता चलता है कि लोगों के बीच हृदय रोग की जागरूकता ना के बराबर है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के पिछले चार वर्षों के तुलना मे पता चला है कि 18 से 30 वर्ष के आयु वर्ग में दिल के दौरे के कारण होने वाली मौतों में बढ़ौती हुई है,जो 2016 में 1,940 से बढ़कर पिछले वर्ष के दौरान 2,381 हो गई है। 45-60 आयु वर्ग में, मृत्यु दर 2016 में 8,862 से बढ़कर पिछले वर्ष के दौरान 11,042 हो गई। 60 से अधिक आयु वर्ग में, 2016 में 4,275 की तुलना में पिछले साल 6,612 लोगों की मृत्यु हुई।

"भारत में गैर-संचारी रोग" शीर्षक वाली सर्वेक्षण रिपोर्ट में देश में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के बढ़ते मामलों का विश्लेषण करने के लिए 21 राज्यों में 2,33,672 लोगों और 673 सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यालयों को शामिल किया गया। यह शीर्ष व्यापार निकाय एसोचैम द्वारा दिल्ली स्थित थिंक टैंक थॉट आर्ब्रिटेज रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 36-45 वर्ष की आयु से हृदय रोगी वाले लोगों का जोखिम काफी बढ़ गया है। फिर भी 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने माना है कि उन्हें एक वर्ष की पीड़ा के बाद निदान किया गया था। हृदय रोग (सीवीडी) और उच्च रक्तचाप से पीड़ित 40 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने माना है कि उन्हें तीन साल से अधिक समय से अपनी हृदय संबंधित बीमारियों के बारे में पता नहीं था, जबकि लगभग 10 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वह किसी भी प्रकार के उपचार की मांग नहीं कर रहे।


हृदय रोग और उच्च रक्तचाप में क्रमश: 1.01 प्रतिशत और 3.60 प्रतिशत है और दोनों मिलकर भारत में सभी एनसीडी का 32 प्रतिशत हिस्सा हैं। जबकि उच्च रक्तचाप का प्रसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाया गया (4.04 प्रतिशत बनाम 3.21 प्रतिशत), महिलाओं की तुलना में पुरुषों (1.13 प्रतिशत) में हृदय रोगों की घटनाएं (0.87 प्रतिशत) अधिक हैं। एसोचैम सीएसआर काउंसिल के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने एक बयान में कहा, "भारत में हृदय रोग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और हमें एक समग्र उदृष्टिकोण अपनाना चाहिए जिसमें एक सक्रिय जीवन शैली, एक स्वस्थ आहार, फलों और सब्जियों का बढ़ता सेवन, और काम के तनाव का प्रबंधन करना और स्वस्थ लंबे जीवन के लिए काम करना शामिल है।"


Heart Disease, weakness, Medicines, Heart Attack छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेना हमें मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है। (pixabay)कोविड संक्रमण से बढ़ता है प्री-एक्लेमप्सिया का खतरा: अध्ययन

आज के समय में लोग छोटी से छोटी बातों पर तनाव में रहते हैं और यही तनाव उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना देता है, जिसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसके अलावा, रिपोर्ट में पाया गया कि उच्च तनाव का स्तर हृदय रोगों (37 प्रतिशत) के लिए मुख्य जोखिम कारक है, इसके बाद खराब आहार की आदतें (11 प्रतिशत), मोटापा (9 प्रतिशत) और गतिहीन जीवन शैली (8 प्रतिशत) हैं। दूसरी ओर, कम शारीरिक गतिविधि, व्यायाम और योग ना करने की वजह से (36 प्रतिशत) तक उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण के रूप में पाया गया, इसके बाद उच्च नमक सामग्री के साथ ही जंक फूड का अधिक सेवन किया गया (30 प्रतिशत) और वायु प्रदूषण (19 प्रतिशत) है। शराब और तंबाकू का अधिक सेवन हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के लिए हानिकारक होता है जिससे हमारी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है, इससे उत्पन्न होने वाली बीमारियां लोगों के लिए किसी भी जोखिम से कम नहीं है।

अध्ययन में कहा गया है कि उच्च रक्तचाप, सांस की बीमारियों और मधुमेह में हृदय रोगों के साथ सबसे ज्यादा रोगों की संख्या होती है। दूसरी ओर, उच्च रक्तचाप में अन्य एनसीडी के साथ सबसे ज्यादा रोगों की संख्या होती है और इसकी व्यापकता अन्य एनसीडी के जोखिम को काफी बढ़ा देती है।

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मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ अतुल लिमये ने बताया, "मधुमेह और मोटापे की महामारी के साथ-साथ हृदय रोग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसका प्राथमिक कारण अस्वास्थ्यकर जीवनशैली है जो उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और शराब पीने, तनाव, अनियमित खाने की आदतों, अपर्याप्त नींद, व्यायाम की कमी और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही के कारण आगे बढ़ती है। लोगों को जागरूक करने की तत्काल आवश्यकता है कि महामारी के दौरान उन्होंने जो जीवनशैली अपनाई वह और भी हानिकारक है और जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।" हालांकि, आज भी जनता ह्रदय रोग और उच्च रक्तचाप के कारण से होने वाली बीमारियों से अनजान है और ना ही इसे इतना महत्व देते है।

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