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फ्रांस के पादरीयों का काला सच हुआ उजागर

70 वर्ष से पादरी कर रहे थे यौन शोषण, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने साधी चुप्पी दुबारा!

फ्रांस के पादरीयों का काला कारनामा आया सामने!

अपनी तथाकथित आधुनिकता के कारण भारत की गरीब जनता का धर्मांतरण कराने वाले पादरीयों की सच्चाई आज सामने आ गई है। जिसकी शुरुआत फ्रांस से हुई है। फ्रांस में कैथोलिक चर्च में जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग गठित किया गया था, अब आप लोगों के मन में यह प्रश्न यह उठ रहा होगा ,किस चीज की जांच के लिए और क्यों यह आयोग बना? दरअसल फ्रांस में बर्नार्ड प्रीनैट नाम का एक पादरी हुआ करता था जिसने कई बच्चियों के साथ यौन शोषण किया ,जब यह खबर फैल गई तो इन्हीं के जैसे कई और पादरीयों को पकड़ने के लिए एक स्वतंत्र आयोग की मांग उठने लगी। जिसके बाद एक स्वतंत्र आयोग जांच के लिए बना। जिसकी रिपोर्ट 5 अक्टूबर 2021 को आई। यह रिपोर्ट 2500 पन्नों की है जो यह बताती है, उन सफेद वस्त्र पहनने वालों का चरित्र कितना मैला है। इस रिपोर्ट से यह पता चला है कि साल 1950 के बाद से लेकर 2020 तक चर्च के भीतर पादरि, अधिकारी व अन्य लोगों ने मिलकर लगभग चार लाख बच्चों का यौन शोषण किया है।

जांच करने वाले आयोग ने एक बयान में कहा है, "इतने सारे जीवन बर्बाद होते देख हम शर्मिंदा और नाराज हैं हम जानते हैं कि पीड़ितों से माफी की आशा भी करने में अभी एक लंबा समय लगेगा"। इस रिपोर्ट पर पोप फ्रांसिस ने कहा है कि वह यह जानकर बहुत आहत हैं और पीड़ितों के प्रति दुख का भाव है साथ ही उन्होंने पीड़ितों की हिम्मत की सराहना भी की है। पोप फ्रांसिस के बयान से साफ समझ आ रहा है कि वह इस घटना से पल्ला झाड़ना चाहते हैं! इसके अलावा एक प्रश्न और,यह सब जो घटनाएं होती रही क्या उसके बारे में जरा सी भी भनक पोप फ्रांसिस को नहीं हुई होगी? फिर तो यह वही बात हो गई कि रेनकोट पहनकर बाथरूम में नहाना।


आपको बता दें यह कोई पहली रिपोर्ट नहीं है इसके पहले भी कई ऐसी रिपोर्ट आई हैं जैसे कैथोलिक बिशप्स के अमेरिका सम्मेलन द्वारा कमीशन की गई 2004 की एक रिपोर्ट में अमेरिका के लगभग 4% कैथोलिक पादरीयों पर पिछले 50 वर्षों में 10,000 से अधिक लोगों द्वारा यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे। ऐसा ही जर्मनी में भी 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 3677 नाबालिंगो के साथ पादरीयों ने यौन शोषण किया है। का यह यौन शोषण केवल विश्व में नहीं अपने भारत में भी दस्तक दे चुका है जैसे चेन्नई की मिशनरी कॉलेज की घटना हो या फिर केरल की सिस्टर लूसी की घटना और पंजाब ,झारखंड से भी कई ऐसी घटनाओं की खबर आती है।

यह भी पढ़ें:' धर्मांतरण' के भेंट चढ़ रहे हैं पंजाब के सिख एवं हिंदू, गुप्त ढंग से चल रहा है गोरखधंधा!

इन घटनाओं को अपने भारत में रोकने के लिए भारत सरकार को एक जांच आयोग की स्थापना करनी चाहिए। जो निरंतर इन पादरीयों एवं चर्चों पर निगरानी कर सके कि कहीं किसी भी व्यक्ति के साथ यौन शोषण तो नहीं हो रहा अगर कोई भी पादरी यौन शोषण का दोषी पाया जाता है तो उसे सख्त से सख्त सजा दिलानी चाहिए।

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