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यूपी की राजनीति में 'अब्बा जान', तालिबान बने अहम मुद्दे

योगी अदित्यनाथ के इस भाषण के बाद उनके खिलाफ विपक्ष ने जमकर हमला बोला। उन्होंने इस भाषण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 'अब्बा जान' शब्द पिता के प्रेम के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।

(wikimedia commons)

प्रधानमंत्री मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

भारत देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में एक फिर चुनावी बिगुल बज चूका है । उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरूआत में होने वाले विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य में शासन और विकास जैसे मुद्दे पीछे हट रहे हैं और 'अब्बा जान' और तालिबान जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश में नए चुनावी मुद्दे के रूप में उभर रहे हैं। यंहा राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक बात कही थी । जिसमे उन्होंने कहा था कि 2017 से पहले, 'अब्बा जान' कहने वाले लोग गरीबों के लिए भेजा गया मुफ्त राशन खा जाते थे और योगी आदित्यनाथ ने ये भी कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त होकर गरीबों के लिए सरकारी नौकरियों पर कब्जा कर लेते थे।

योगी अदित्यनाथ के इस भाषण के बाद उनके खिलाफ विपक्ष ने जमकर हमला बोला। उन्होंने इस भाषण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 'अब्बा जान' शब्द पिता के प्रेम के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। इसको लेकर भाजपा राजनीति कर रही है।
वेसे तो मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने अपने भाषण में किसी विशेष पार्टी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनकी बातो यह स्पष्ट था कि वह समाजवादी पार्टी का की बात कर रहे थे क्योंकि इसके पहले उन्होंने एक टीवी कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को 'अब्बा जान' कहा था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव जैसे नेता पहले अपने मुस्लिम वोट-बैंक को ठेस पहुंचाने के डर से मंदिरों में नहीं जाते थे।


समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर-रहमान बरक द्वारा तालिबान को 'स्वतंत्रता सेनानी' कहे जाने के बाद तालिबान को कथा में जोड़ा गया। यह सब बयानबाजी के बाद वहीं इस मामले पर जमकर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि भाजपा नेता अपने हिंदू वोट बैंक को मजबूत करने के लिए उनकी टिप्पणी का जिक्र कर राशे है

हांलांकि, इन सब बातों का नतीजा यह है कि उत्तर प्रदेश में विकास जैसे प्रमुख मुद्दों किनारें कर दिया गया है और लगभग देश के सभी राजनीतिक दल नेता अब अपनी हिंदूत्व स्थापित करने के लिए भाजपा नेताओं के उल्लास के लिए झुक रहे हैं।


 uttar pradesh, yogi adityanath उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरूआत में होने वाले विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू हो गई है।(Wikimedia Commons)


इन सब घटना के बीच मायावती ने हाल ही में लखनऊ में अपनी पार्टी की बैठक को संबोधित किया, तो उनका जय श्री राम के नारों से स्वागत किया गया - ।
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने सोमवार को अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपनी हालिया यात्रा के दौरान रायबरेली में एक हनुमान मंदिर का दौरा किया।
भाजपा स्पष्ट रूप से तालिबान के मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे का इस्तेमाल करते हुए और मुस्लिम तुष्टीकरण पर गैर-भाजपा दलों को कटघरे में खड़ा कर रही है।

यह भी पढ़ें : उत्तर प्रदेश चुनाव में ब्राह्मण वोट पर क्यों फेंका जा रहा है पासा?

तालिबान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर गली मोहल्ले तक में बहस होने लगी है । कई लोग तालिबान को एक खास तबके के लिए मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं और विरोधी पक्ष को एक एजेंडे के तहत टारगेट भी कर रहे हैं. ट्वीट और फेसबुक पोस्ट के साथ साथ व्हाट्सऐप फॉर्वर्ड मैसेज में भी तालिबान विमर्श भागीदारी बढ़ाने लगा है.

इन ताकतों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ एक मजबूत हिंदुत्व ब्रांड के रूप में उभरे हैं।(आईएएनएस-PS)

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वर्ष 2019 में हुदा मुथाना के पिता ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के सुप्रीम कोर्ट में अमेरिका वापस लौटने के मामले पर तत्कालीन ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुक़द्दमा दायर किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिना किसी टिप्पणी के हुदा मुथाना के इस मामले पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

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