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गंगा के किनारे होगी बागवानी, ग्रामीणों और किसानों का होगा लाभ

नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ ही किसानों और ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने की दोहरी योजना तैयार की गई है। इसके तहत नदी के दोनों किनारों पर ग्रामीण आम,आंवला,केला,अमरूद, नींबू और कटहल जैसे फलों के बाग लगाये जाएंगे।

नमामि गंगे के अंतर्गत शामिल यह परियोजना पहुंचा सकती है ऑर्गेनिक खेती को नए मुकाम पर(Wikimedia commons)

संपूर्ण उत्तर भारत के लिए पूजनीय मां गंगा अब यूपी के लाखों ग्रामीणों और किसानों के लिए रोजगार देने का माध्यम बनने जा रही है। दरअसल, राज्य सरकार ने गंगा के दोनों किनारों पर बड़े स्तर पर बागवानी की योजना तैयार की है। गंगा के कछारी इलाकों में आम,आंवला,केला और अमरूद जैसे फलों के बाग लगाए जाएंगे। आर्गेनिक खेती के साथ ही नदी के किनारे बसे गांवों के किसान फल और सब्जी उत्पादन से अपनी आय बढ़ा सकेंगे। यह योजना नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत शामिल होगी।

नमामि गंगे विभाग की इस योजना पर कृषि और बागवानी विभाग ने अमल करना शुरू कर दिया है। सरकार ने गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नदी के 5 किलोमीटर के दोनों किनारों पर उर्वरक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इन इलाकों में किसानों को अनाज,फल और फूलों की आर्गेनिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं। देश के बड़े बाजारों के साथ ही विदेशों में आर्गेनिक उत्पादों की मांग को देखते हुए इसे किसानों के लिए खास फायदे की योजना माना जा रहा है।

योगी सरकार इस योजना के माध्यम से एक साथ तीन बड़े लक्ष्यों को भेदने की तैयारी कर रही है । पहला गंगा की स्वच्छता,दूसरा किसानों की आय और तीसरा लक्ष्य प्रदेश में बड़ी मात्रा में आर्गेनिक फसलों के उत्पादन का है। विशेषज्ञों का मानना है कि अविरल गंगा, निर्मल गंगा नारों के साथ गंगा ग्रामों में हरियाली छाएगी। नमामि गंगे के तहत गंगा ग्रामों में पौधारोपण से पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा। नदी पर प्रदूषण का प्रभाव नहीं पड़ेगा। गंगा ग्राम का वातावरण सुरक्षित रहेगा तो नदी भी सुरक्षित रहेगी।

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इस योजना के बारे में बताते हुए (नमामि गंगे परियोजना के सचिव) अनुराग श्रीवास्तव कहते हैं कि गंगा की स्वच्छता के लिए कृषि,वन, बागवानी,नगर विकास समेत कई विभागों के साथ मिल कर योजनाएं चलाई जा रही हैं। गंगा के दोनों किनारों को प्रदूषण मुक्त करने के साथ ही इस दायरे में आने वाले गांवों की बेहतरी के लिए भी काम किया जा रहा है। रसायनिक खाद पर रोक लगाने के साथ-साथ गंगा नदी को कटान से बचाने के लिए नदी के किनारे पीपल, पाकड़, आम, जामुन और बरगद जैसे पेड़ भी लगाए जाएंगे। गंगा किनारे अधिक से अधिक वृक्षारोपण कराने के लिए हर जिले में गंगा नर्सरी विकसित की जा रही है । गंगा किनारे लगने वाले सभी पौधों की जियो टैगिंग की जाएगी, ताकि पौधों की चोरी को रोका जा सके।


Input: IANS ; Edited By: Lakshya Gupta

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