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समाज ने हमेशा से महिलाओं (Womens) को जो भी कुछ कहा हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। महिलाएं शक्तिशाली, बहादुर और उल्लेखनीय रूप से बहुत मजबूत रही हैं। यह वास्तविक जीवन में भी सच है और इन महिलाओं को हमें टीवी शोज, फिल्मों और वेब सीरीज में देखना बहुत महत्वपूर्ण है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, इस गर्मी के मौसम में स्टार भारत (Star India) एक प्रचलित सामाजिक चुनौती पर प्रकाश डालना चाहता है, जिससे अभी भी कई युवा लड़कियां भारत के कई हिस्सों में लड़ रही हैं और वह है दहेज प्रथा, जिसे आगामी नए शो ‘लक्ष्मी घर आई’ के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।


इन कुछ वर्षों में, बॉलीवुड फिल्में जैसे ‘थप्पड़’, ‘क्वीन’, ‘पिंक’, ‘मदार्नी’ सभी ने भारत में महिला सशक्तिकरण (Women empowerment) और अन्य मुद्दों पर रौशनी डाली है जो महिलाओं को भारत में झेलनी पड़ती हैं। अब, स्टार भारत और शकुंतलम टेलीफिल्म्स (Shakuntalam telefilms) ने मिलकर खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री सिमरन परींजा (Simran pareenja) को अपने आगामी पारंपरिक टीवी शो में साहसी मैथली का किरदार निभाने के लिए चुना है।

मैथली की यात्रा बताएगी कि कैसे वह सामाजिक विश्वास और दहेज की व्यवस्था से लड़ती है। शो के माध्यम से, अभिनेत्री इस सोच को बढ़ावा देना चाहती है कि लड़कियां किसी पर बोझ नहीं बल्कि उनकी संपत्ति हैं।

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जब इस शो के बारे में सिमरन से बात की गई तो उन्होंने कहा, लक्ष्मी घर आई’ शो हमारे समाज और उसका प्रतिबिंब है, जिसमें हम रहते हैं। हम भारत को दहेज (Dowry system) की सदियों पुरानी व्यवस्था से अवगत कराने का इरादा रखते हैं जो आज भी कई कस्बों और शहरों में जीवित है। सभी जानते हैं कि दहेज गैरकानूनी और अनैतिक है, लेकिन फिर भी वे इसका अभ्यास करते हैं। हमारे समाज ने इसे ‘उपहार’ का नाम दिया है ताकि यह सुनने में अच्छा लगे। दहेज का सीधा सा मतलब है कि आप लड़की या लड़के पर एक प्राइस टैग लगा रहे हैं और उसे खरीद रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरा किरदार मैथली दूसरों को सही काम करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा। मेरा किरदार इस बात पर प्रकाश डालेगा कि यह सदियों पुरानी प्रथा कितनी कठोर और हिला देने वाली है, जिसका लोग अभी भी अभ्यास कर रहे हैं जबकि उन्हें इसके परिणाम का सामना करना चाहिए।” (आईएएनएस-SM)

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भारत, अमेरिका के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की ( Pixabay )

भारत(india) और अमेरिका(America) के विशेषज्ञों ने शनिवार को कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन (Environment change) से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से पांच - जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ताकत, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, खपत और उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साझेदारी की है। विज्ञान विभाग के सचिव एस.चंद्रशेखर ने कहा, "सख्त जलवायु व्यवस्था के तहत हम उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों के पोर्टफोलियो के सही संतुलन की पहचान और अपनाने का एहसास कर सकते हैं। ग्लासगो में हाल ही में संपन्न सीओपी-26 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ-साथ महत्वाकांक्षाओं को सामने लाया। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद हम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेंगे।"

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है

आम आदमी पार्टी(AAP) पंजाब के लोकसभा चुनाव में अपनी बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है वहीं पार्टी के एक पूर्व सदस्य ने राजनैतिक शैली में वेब सीरीज़ के रूप में 'इनसाइडर अकाउंट" निकला है जिसमे दावा किया गया है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। 'ट्रांसपेरेंसी : पारदर्शिता का निर्माण शिकागो में कार्यरत चंडीगढ़ के चिकित्सक डॉ.मुनीश रायज़ादा द्वारा किया गया है। यूट्यूब(Youtube) पर उपलब्ध यह वेब सीरीज़ यह दर्शाती है कि कैसे एक पार्टी पारदर्शी होने के साथ साथ व्यवस्था परिवर्तन लाने के बजाय गैर-पारदर्शी औऱ राजनीतिक आदत का हिस्सा बन गई। यह वेब सीरीज अक्टूबर 2020 में पूरी होने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लयेर पर रिलीज हुई। डॉ.मुनीश रायज़ादा के अनुसार इस वेब सीरीज़ को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

डॉ.मुनीश रायजादा ने फोन पर आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि, " मंच इस वेब सीरीज का प्रचार यह कहकर नहीं कर रहा था कि यह एक राजनीतिक वेब सीरीज है, और मैंने सोचा कि मैं इस वेब सीरीज को बड़े पैमाने में दर्शकों तक कैसे ले जा सकता हूँ फिर मैंने यूट्यूब के बारे में सोचा।" यह वेब सीरीज यूट्यूब पर 17 जनवरी को रिलीज़ किया गया।

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