Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
टेक्नोलॉजी

गंगा एवं पेयजल को शुद्ध करने लिए IIT-BHU के वैज्ञानिकों की नई तकनीक

आईआईटी-बीएचयू के वैज्ञानिकों ने सागवान (टीक) और नीम की लकड़ी से बनी राख का उपयोग करके पानी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की प्रणाली विकसित की है।

IIT-BHU के वैज्ञानिकों ने सागवान (टीक) और नीम की लकड़ी से बनी राख का उपयोग करके पानी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की प्रणाली विकसित की है। यह विधि न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि सस्ती भी है और पानी में उपलब्ध खनिजों को बनाए रखते हुए आरओ की लागत को कम करने के अलावा गंगा के पानी को शुद्ध करने के लिए भी अपनाई जा सकती है।


जैव रासायनिक इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर विशाल मिश्रा और उनकी टीम ने सागवान की लकड़ी का चूरा और नीम के डंठल की राख से दो अलग-अलग प्रकार के अधिशोषक (सोख लेने वाला) तैयार किए हैं, जिससे हानिकारक धातुओं, आयनों और अन्य विषैले पदार्थ को पानी से अलग करके पीने योग्य बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सोखने की विधि अन्य रासायनिक तकनीकों की तुलना में सस्ती और अधिक प्रभावी मानी गई है। यह कम खर्चीला होने के साथ ही जल जनित रोगों की रोकथाम में भी बहुत प्रभावी माना जाता है।

गंदे पानी को साफ़ करने के लिए आयुर्वेदिक उपायों से किया जा रहा है चयन।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

मिश्रा ने कहा कि सागवान या सागौन की लकड़ी के पाउडर (वैज्ञानिक नाम: टेक्टोना ग्रैंडिस) को सोडियम थायोसल्फेट के साथ मिश्रित किया जाता है और एक्टिवेटिड चारकोल बनाने के लिए नाइट्रोजन के वातावरण में गर्म किया जाता है। इसके अलावा अधिशोषक नीम या फिर इसके डंठल या टहनी की राख से भी बनाया गया है। एक तरफ जहां सागवान की लकड़ी के माध्यम से हानिकारक गैसों, आयनों, सल्फर, सेलेनियम को निकाला जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ नीम की राख का अध्ययन तांबा, निकिल और जस्ता युक्त प्रदूषित पानी के उपचार के लिए किया गया है।

यह भी पढ़ें: सोनम वांगचुक ने सेना के लिए बनाया सौर ऊर्जा चालित मोबाइल तम्बू

मिश्रा ने कहा कि यह बाजार में बेचे जा रहे आरओ की लागत को भी कम कर सकता है। वर्तमान में लगभग हर घर में आरओ सिस्टम स्थापित हैं। आरओ सिस्टम में एक्टिवेटिड लकड़ी के कोयले के स्थान पर पानी को शुद्ध करने के लिए सागवान की लकड़ी के चूरा से बने कोयले का उपयोग किया जा सकता है। इससे आरओ की कुल लागत भी कम होगी और पानी में उपलब्ध खनिज सुरक्षित रहेंगे।(आईएएनएस-SHM)

Popular

कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। (IANS)

वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी और कप्तान विराट कोहली ने गुरूवार को घोषणा की कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ेंगे। उनका ये एलान करोड़ो दिलो को धक्का देने वाला था क्योंकि कोहली को हर कोई कप्तान के रूप में देखना चाहता है । कई दिनों से चल रहे संशय पर विराम लगाते हुए कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। कोहली ने बताया कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 के कप्तानी पद को छोड़ देंगे।

ट्वीट के जरिए उन्होंने इस यात्रा के दौरान उनका साथ देने के लिए सभी का धन्यवाद दिया। कोहली ने बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने वर्कलोड को मैनेज करने के लिए लिया है। उनका वर्कलोड बढ़ गया था ।

Keep Reading Show less

मंगल ग्रह की सतह (Wikimedia Commons)

मंगल ग्रह पर घर बनाने का सपना हकीकत में बदल सकता हैं। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यात्रियों के खून, पसीने और आँसुओ की मदद से कंक्रीट जैसी सामग्री बनाई है, जिसकी वजह से यह संभव हो सकता है। मंगल ग्रह पर छोटी सी निर्माण सामग्री लेकर जाना भी काफी महंगा साबित हो सकता है। इसलिए उन संसाधनों का उपयोग करना होगा जो कि साइट पर प्राप्त कर सकते हैं।

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अध्ययन में यह पता लगा है कि मानव रक्त से एक प्रोटीन, मूत्र, पसीने या आँसू से एक यौगिक के साथ संयुक्त, नकली चंद्रमा या मंगल की मिट्टी को एक साथ चिपका सकता है ताकि साधारण कंक्रीट की तुलना में मजबूत सामग्री का उत्पादन किया जा सके, जो अतिरिक्त-स्थलीय वातावरण में निर्माण कार्य के लिए पूरी तरह से अनुकूल हो।

Keep Reading Show less

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली (instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री का लोहा इन दिनों हर जगह माना जा रहा है । इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने कहा है कि भारतीय कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री हाल के दिनों में टेस्ट क्रिकेट के महान समर्थक और प्रमोटर हैं। साथ ही उन्होंने कोहली की तारीफ भी की खेल को प्राथमिकता देते हुए वो वास्तव में टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं।"
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने इस बात पर अपनी चिंता व्यक्त की ,कि भविष्य में टेस्ट क्रिकेट कब तक प्राथमिकता में रहेगा। उन्होंने कहा, "चिंता यह है कि यह कब तक जारी रहेगा। उनका यह भी कहना है किइसमें कोई संदेह नहीं है कि जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं और नई पीढ़ी आती है, मेरे जैसे लोगों को जिस तरह टेस्ट क्रिकेट से प्यार है यह कम हो सकता है और यह हमारी पुरानी पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है।"

\u0930\u0935\u093f \u0936\u093e\u0938\u094d\u0924\u094d\u0930\u0940 भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और वर्तमान कोच रवि शास्त्री (wikimedia commons)

Keep reading... Show less