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कोटपा कानून में किए गए नए संशोधन अवैध तंबाकू व्यापार को बढ़ावा देने के लिए : उपभोक्ता ऑनलाइन फाउंडेशन

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तंबाकू का सेवन शुरू करने की वास्तविक आयु 21 से 30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक की है, तो इससे बहुत पहले इन आयु समूहों के लोगों के लिए जागरूकता अभियान शुरू हो जाना चाहिए।

(wikimedia commons)

अवैध तंबाकू व्यापार सरकार अवैध तंबाकू व्यापार सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण है

भारत देश में एक गैर-लाभकारी उपभोक्ता अधिकार संगठन, उपभोक्ता ऑनलाइन फाउंडेशन (सीओएफ) ने उपभोक्ताओं के लिए नए कोटपा संशोधन विधेयक 2020 से उभरने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों पर एक विशेष रूप से तैयार की गई सर्व-समावेशी सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की है। भारत चीन के बाद दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी तंबाकू का सेवन करने वाली आबादी का घर है
'तंबाकू नियंत्रण विनियमों पर सार्वजनिक राय' शीर्षक वाली इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में 5116 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया है, जिसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोग शामिल हैं। ये उपभोक्ताओं की जमीनी हकीकत, राय, चिंताओं और आवाज का विश्लेषण करने के लिए है, जो विधायी परिवर्तनों के अंतिम प्रभाव वाहक है।

अवैध तंबाकू व्यापार सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण है। इस व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 1,640 किलोमीटर की बिना बाड़ वाली सीमा के पास होता है, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश आदि चीन, म्यांमार, बांग्लादेश जैसे देशों के साथ साझा करते हैं। हालांकि इन राज्यों द्वारा अवैध तंबाकू व्यापार को नियंत्रित करने में सफलता की अलग-अलग डिग्री हासिल की गई है। इस वजह से उप-राष्ट्रीय स्तर पर तंबाकू नियंत्रण की गैर-प्राथमिकता और तंबाकू नियंत्रण नीतियों के अप्रभावी कार्यान्वयन भारत में तंबाकू नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।


सीओटीपीए सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, प्रोफेसर बेजोन मिश्रा, जो कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी और प्रसिद्ध कंज्यूमर एक्टिविस्ट हैं, उन्होंने कहा, "कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन ने सीओटीपीए कानून और तालिका में नए संशोधनों पर उपभोक्ताओं के विचार एकत्र करने का काम अपने ऊपर लिया है।


भारत चीन के बाद दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी तंबाकू का सेवन करने वाली आबादी देश है। तंबाकू के सेवन से देश में 6 में से 1 एनसीडी (गैर-संचारी रोग) मौत होती है। इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) संशोधन विधेयक, 2020 के माध्यम से मौजूदा तंबाकू कानून को मजबूत करके तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों में सुधार करना चाह रही है। यह सही दिशा में एक कदम है। सरकार की नीति में एक द्वैतवाद है, जो एक तरफ तंबाकू की खपत को नियंत्रित करने के लिए विनियमन ला रहा है और दूसरी तरफ तंबाकू उत्पादों से कर राजस्व के रूप में 43,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर रही है।

 \u0924\u092e\u094d\u092c\u093e\u0915\u0942, tobacco तंबाकू कानून को मजबूत करके तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों में सुधार।(wikimedia commons)


रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि पूरे बिल का फोकस इसके शीर्षक के माध्यम से दर्शाया गया है, जो सिगरेट पर प्रमुख रूप से केंद्रित है क्योंकि अन्य तंबाकू उत्पादों को कानून के शीर्षक में कोई उल्लेख नहीं मिलता है। इसमें पता चला है कि भारत में बीड़ी और चबाने योग्य तंबाकू में, तंबाकू की 75 प्रतिशत से अधिक खपत शामिल है, इसके बाद सिगरेट 20.89 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि तंबाकू का सेवन शुरू करने की वास्तविक आयु 21 से 30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक की है, तो इससे बहुत पहले इन आयु समूहों के लोगों के लिए जागरूकता अभियान शुरू हो जाना चाहिए।

सरकार द्वारा तंबाकू उत्पादों की खरीद के लिए कानूनी आयु 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने के कदम पर, इसने कहा कि देश में कानूनी वयस्क आयु अधिकांश उद्देश्यों के लिए 18 वर्ष है। इसने आगे टिप्पणी की कि उपर्युक्त कानून के अनुरूप, किसी को भी इतना बूढ़ा माना जाना चाहिए कि वह तंबाकू के सेवन के संबंध में अपनी पसंद का चुनाव कर सके जैसे उसे वोट देने या ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की अनुमति है। सर्वेक्षण में कानून में मनमाने प्रावधान की ओर भी इशारा किया गया है, जो 21 साल से कम उम्र के खरीदार की सही कानूनी उम्र की पहचान करने में विफल रहने पर तंबाकू विक्रेता के लिए या तो 1 लाख रुपये का जुर्माना या 7 साल की कैद या दोनों का प्रस्ताव करता है।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में बात करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि नए विधेयक में कानून का पालन करने में विफलता के लिए दंड को बढ़ाने का प्रस्ताव है और तंबाकू उत्पादों की कालाबाजारी और तस्करी से निपटने की परिकल्पना की गई है, लेकिन यह उनके लिए इस संबंध में कोई दिशानिर्देश निर्दिष्ट नहीं करता है। इसने जोर देकर कहा कि ऐसी स्थिति में सार्वजनिक प्राधिकरण की तंबाकू की खपत को नियंत्रित करने में कोई रचनात्मक भूमिका नहीं होगी, उनकी भूमिका संभावित चालान को लिखने तक सीमित है।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा उत्पीड़न के मुद्दे पर, 63 प्रतिशत से अधिक उत्तरदाताओं ने उत्तर दिया कि उन्हें तंबाकू के जिम्मेदार उपभोग के लिए भी परेशान किया गया था। यह पूछे जाने पर कि क्या वे कानूनी लेकिन कर रहित और उच्च गुणवत्ता वाले तंबाकू की तुलना में तस्करी वाले, या बिना कर वाले और कम गुणवत्ता वाले तंबाकू को प्राथमिकता देंगे। 77.50 प्रतिशत ने पहले विकल्प के लिए झुकाव दिखाया। खुले तंबाकू और सिंगल स्टिक सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध के मामले में खपत व्यवहार पर संभावित प्रभाव का खुलासा करते हुए सर्वेक्षण ने आगे दिखाया कि 93 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि यह उन्हें और अधिक धूम्रपान करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

सर्वेक्षण के अनुसार, 66.50 प्रतिशत उत्तरदाता सेकेंड हैंड धुएं से असहज महसूस करते हैं। साथ ही यह भी खुलासा किया कि 64.40 प्रतिशत लोग सोचते हैं कि निर्दिष्ट धूम्रपान कक्ष वास्तव में सहायक हैं। इसका तात्पर्य यह है कि हवाई अड्डों, रेस्तरां और होटलों में ऐसे सभी निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों को बंद करने के प्रस्ताव से लोगों की सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में वृद्धि होगी। सर्वेक्षण के अनुसार, यह भी सामने आया कि 43.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं को लगता है कि इस कदम से जिम्मेदारी से तंबाकू का सेवन करने का अधिकार कम हो जाएगा, जबकि 23.4 प्रतिशत का मानना है कि सरकार कानूनी उत्पाद के उपभोक्ताओं के साथ गलत व्यवहार कर रही है। इस प्रावधान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, 22.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि सरकार वयस्कों को कानूनी कार्य करने से प्रतिबंधित कर रही है।

यह भी पढ़ें : क्या बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है?

सर्वेक्षण के निष्कर्षों को कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन की प्रख्यात टीम द्वारा एडवोकेट सृष्टि जौरा के सक्षम पर्यवेक्षण और प्रोफेसर बेजोन मिश्रा की सिफारिशों के तहत एकत्रित किया गया है।(आईएएनएस)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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