Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

झारखंड में सखी मंडल की महिलाएं कर रही जंगलो की ‘पहरेदारी’

झाड़बेड़ा पंचायत की सखी मंडल की महिलाओं ने जंगलों की बर्बादी देखकर जंगलों को बचाने और रक्षा करने के अनूठे प्रयास की शुरुआत की।

झारखंड (Jharkhand) में पर्यावरण संरक्षण में अब ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिख रही है। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

झारखंड (Jharkhand) में पर्यावरण संरक्षण में अब ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिख रही है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर के झाड़बेड़ा पंचायत की सखी मंडल की महिलाओं ने जंगल और जंगल के पेड़ो को कटने से बचाने के लिए एक अनोखे प्रयास की शुरुआत की है।

अप्रैल 2021 से ग्रामीण महिलाओं द्वारा शुरू किए गए इस प्रयास के जरिए ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। ये महिलाओं हाथ में डंडे लिए जंगलों की पहरेदारी कर रही हैं।


ग्रामीण बताते हैं कि आनंदपुर प्रखंड के महिषगिड़ा में 9 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जंगली क्षेत्रों में साल, सागवान, आसन, बांस, करंज, चिरोंजी, चैकुडी, महुआ, केंदु सहित कई पेड़ हैं। पूर्व में आजीविका चलाने के लिए इन जंगली फसलों की खेती और कटाई के समय आस-पास के छोटे पेड़ों को काट दिया जाता था तथा जंगलों में आग भी लगा दी जाती थी।

झाड़बेड़ा पंचायत की सखी मंडल की महिलाओं ने जंगलों की बर्बादी देखकर जंगलों को बचाने और रक्षा करने के अनूठे प्रयास की शुरुआत की। जंगल बचाओ पहल की शुरुआत इस इलाके के 7 सखी मंडलों की 104 ग्रामीण महिलाओं ने किया।

इन महिलाओं ने अपने आप को 4 ग्रुपों मे बांटकर रोजाना सुबह 6 से 9 बजे एवं शाम 4 से 6 बजे तक जंगल के इन इलाकों में पहरेदारी करती हैं। हाथों में डंडा लेकर पर्यावरण संरक्षण (Environmental protection) की मुहीम को बल दे रही ये महिलाएं रोजाना पेड़ों की गिनती भी करती हैं, जिससे पेड़ों की संख्या में आई कमी का पता चल सके।

ये महिलाएं प्रतिदिन एक जगह इकट्ठा होकर फिर अलग-अलग ग्रुप मे बंटकर जंगलों की पहरेदारी करने निकलती हैं। यही नहीं जिम्मेदारी से बचने वाली महिलाओं को 200 रुपये जुमार्ना भी देना पड़ता है।

नेमंती जोजो कहती हैं, “जंगल के पेड़ों के कटने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। (Pixabay)

बेरोनिका बरजो आईएएनएस को बताती हैं, “अगर बिना सूचना के कोई महिला नहीं पहुंचती तो उन्हे 200 रुपये का जुमार्ना भरना पड़ेगा । ऐसा नहीं करने पर सख्त कारवाई का प्रावधान भी किया गया है जिससे सदस्यों मे डर बना रहे। कोरोना महामारी के इस समय मे महिलाएं सरकार द्वारा निर्धारित सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन कर दीदियां दो गज की दूरी पर रहकर अपनी जिम्मेदारी को अंजाम दे रही हैं।”

नेमंती जोजो कहती हैं, “जंगल के पेड़ों के कटने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है इसलिए जंगलों की रक्षा भी हमे खुद ही करनी होगी। जंगल हमारी आजीविका का एक बड़ा हिस्सा हैं। अगर इनपर खतरा आएगा तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि हम सभी महिलाएं (Womens) जंगल की सुरक्षा के लिए डंडे के सहारे जंगल के अंदर दो से तीन घंटे तक पहरेदारी करते हैं। ये महिलाएं ग्रामीणों को पर्यावरण संतुलन को लेकर जागरूक भी करती हैं।

दीदियों द्वारा चलाये जा रहे इस प्रयास की अब बाकी ग्रामीण प्रशंसा भी करते है और इस कार्य में अपना भी योगदान देते हैं। ग्रामीण अब सखी मंडल की दीदियों को सूचित कर जरूरत के हिसाब से ही लकड़ी इकट्ठा करते हैं।

यह भी पढ़ें :- बुंदेलखंड में रोजगार और पानी का संकट: एक बड़ी समस्या

झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी (जेएसएलपीएस) की सीईओ नैन्सी सहाय कहती हैं कि सखी मंडल की दीदियों की सामूहिक पहल ‘जंगल बचाओ’ पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीण महिलाओं की जागरुकता एवं सामाजिक जिम्मेदारी को दशार्ता है।

उन्होंने कहा, “सखी मंडल में जुड़कर महिलाएं आर्थिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी का भी निर्वहन कर रही हैं। राज्य की सखी मंडल की दीदियों को जैविक खेती, सौर सिंचाई संयत्र, पर्यावरण अनुकूल खेती समेत तमाम विषयों पर मदद एवं जागरुक किया जाता है। मुझे उम्मीद है कि दीदियों की इस पहल से दूसरों को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का अहसास होगा।” (आईएएनएस-SM)

Popular

भारत, अमेरिका के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की ( Pixabay )

भारत(india) और अमेरिका(America) के विशेषज्ञों ने शनिवार को कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन (Environment change) से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से पांच - जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ताकत, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, खपत और उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साझेदारी की है। विज्ञान विभाग के सचिव एस.चंद्रशेखर ने कहा, "सख्त जलवायु व्यवस्था के तहत हम उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों के पोर्टफोलियो के सही संतुलन की पहचान और अपनाने का एहसास कर सकते हैं। ग्लासगो में हाल ही में संपन्न सीओपी-26 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ-साथ महत्वाकांक्षाओं को सामने लाया। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद हम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेंगे।"

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

Keep Reading Show less

वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

Keep Reading Show less

डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है

आम आदमी पार्टी(AAP) पंजाब के लोकसभा चुनाव में अपनी बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है वहीं पार्टी के एक पूर्व सदस्य ने राजनैतिक शैली में वेब सीरीज़ के रूप में 'इनसाइडर अकाउंट" निकला है जिसमे दावा किया गया है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। 'ट्रांसपेरेंसी : पारदर्शिता का निर्माण शिकागो में कार्यरत चंडीगढ़ के चिकित्सक डॉ.मुनीश रायज़ादा द्वारा किया गया है। यूट्यूब(Youtube) पर उपलब्ध यह वेब सीरीज़ यह दर्शाती है कि कैसे एक पार्टी पारदर्शी होने के साथ साथ व्यवस्था परिवर्तन लाने के बजाय गैर-पारदर्शी औऱ राजनीतिक आदत का हिस्सा बन गई। यह वेब सीरीज अक्टूबर 2020 में पूरी होने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लयेर पर रिलीज हुई। डॉ.मुनीश रायज़ादा के अनुसार इस वेब सीरीज़ को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

डॉ.मुनीश रायजादा ने फोन पर आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि, " मंच इस वेब सीरीज का प्रचार यह कहकर नहीं कर रहा था कि यह एक राजनीतिक वेब सीरीज है, और मैंने सोचा कि मैं इस वेब सीरीज को बड़े पैमाने में दर्शकों तक कैसे ले जा सकता हूँ फिर मैंने यूट्यूब के बारे में सोचा।" यह वेब सीरीज यूट्यूब पर 17 जनवरी को रिलीज़ किया गया।

Keep reading... Show less