Tuesday, December 1, 2020
Home इतिहास क्या स्टोन ऐज में महिलाएं भी बड़े जानवरों का शिकार करती थीं?

क्या स्टोन ऐज में महिलाएं भी बड़े जानवरों का शिकार करती थीं?

पाषाण युग के अध्ययन में अब तक यही समझा जाता रहा है कि महिलाएं केवल घर का काम करती थीं किन्तु पुरातत्विक जानकर रेंडी हास का मानना है कि महिलाएं भी शिकार करती थीं।

अमेरिका में हुए एक अध्ययन से यह ज्ञात हुआ है कि पाषाण युग (जिसे आज की भाषा में स्टोन ऐज कहा जाता है) में महिलाओं का शिकार में अहम योगदान होता था। पेरू में 9000 पुराने शमशान ने वैज्ञानिकों को इस विषय पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। नए अध्ययन में, जर्नल साइंस एडवांस में, पुरातत्वविदों को एक किशोर महिला के अवशेष मिले, जिसके साथ उन्हें शिकार में काम आने वाले वह सभी उपकरण भी मिले।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय डेविस के पुरातत्विक जानकर रेंडी हास ने कहा कि “हम खुदाई स्थल पर व्यक्ति के लिंग को नहीं बता सकते थे, किन्तु हम सभी ने उसे एक पुरुष माना।” वह आगे बताते हैं कि “साइट के आसपास, उन्होंने एक-दूसरे को बताया कि वह एक महान शिकारी रहा होगा या शायद वह एक महान योद्धा होगा। लेकिन प्रयोगशाला में अवशेषों का अध्ययन करने के बाद, एरिज़ोना विश्वविद्यालय के उनके सहयोगी जिम वाटसन ने कहा, “मुझे लगता है कि यह पुरुष नहीं स्त्री है।”

हास ने कहा कि “यह निश्चित रूप से मेरे लिए आश्चर्य की बात थी।” वह आगे बताते हैं कि “अध्ययन किए गए लगभग हर शिकारी संस्कृति में, बड़े जानवर का शिकार विशेष रूप से पुरुषों द्वारा ही किया जाता था और अधिकांश मानव विज्ञानी भी हमेशा से ऐसा ही मान रहे हैं। तो क्या यह अलग मामला है या महिला शिकारी उस युग में आम बात थी?” “इन सवालों के जवाब देना अभी कठिन होगा क्योंकि ऐसे जगह जहाँ खुदाई कर जानकारी हासिल की जा सके वह मिलना बहुत मुश्किल है। हर दिन आपको सफलता हाथ लगे, यह जरुरी नही!” “तो हमने अगला सबसे अच्छा काम किया कि हमने उत्तर और दक्षिण अमेरिका में पिछले आधी सदी से प्रकाशित इस विषय से जुड़े रिकॉर्डों को देखा। और आश्चर्य की बात यह है कि 429 अवशेषों में से, 16 पुरुषों को और 11 महिलाओं को बड़े जानवरों के शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों के साथ दफनाया गया था। जो की हमारे अध्ययन से भी मेल खाता है।”

यह भी पढ़ें: “यह है मेरा जवाब”

हालांकि, महिलाओं की पहचान शिकारी के रूप में नहीं की गई थी। हास बताते हैं कि “कुछ अन्य साइटों पर, उपकरण शिकार में नहीं बल्कि भोजन या कपड़े तैयार करने के उपकरण के रूप में बताए गए थे, जिन्हें महिलाओं का काम माना जाता था। एक मामले में, एक शोधकर्ता ने डीएनए परिणामों को चुनौती दी, जिसने व्यक्ति को स्पष्ट रूप से महिला के रूप में पहचाना क्योंकि शिकार के उपकरण के साथ उसके अवशेष पाए गए थे। हास ने नारीवादी(फेमिनिस्ट) विद्वानों की ओर इशारा करते हुए कहा, वह कह रहे हैं कि “हमें इन बातों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।”

हास बताते हैं कि “9,000 वर्षों में एक शमशान को बहुत कुछ हो सकता है। अवशेष ख़राब हो जाते हैं, और लिंग को पहचानना मुश्किल हो जाता है। किसी व्यक्ति के पास पाए जाने वाले पदार्थ तब नहीं हो सकते थे जब शरीर को दफनाया गया था।” इस अध्ययन का जो कुछ भी नतीजा निकले किन्तु अब तक के शोध से यही अनुमान लगा सकते हैं कि उस युग में महिलाएं भी शिकार करती थीं।

POST AUTHOR

Shantanoo Mishra
Poet, Writer, Hindi Sahitya Lover, Story Teller

जुड़े रहें

6,018FansLike
0FollowersFollow
174FollowersFollow

सबसे लोकप्रिय

धर्म निरपेक्षता के नाम पर हिन्दुओ को सालों से बेवकूफ़ बनाया गया है: मारिया वर्थ

यह आर्टिक्ल मारिया वर्थ के ब्लॉग पर छपे अंग्रेज़ी लेख के मुख्य अंशों का हिन्दी अनुवाद है।

विज्ञापनों पर पानी की तरह पैसे बहा रही केजरीवाल सरकार, कपिल मिश्रा ने लगाया आरोप

पिछले 3 महीनों से भारत, कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इन बीते तीन महीनों में, हम लगातार राज्य सरकारों की...

भारत का इमरान को करारा जवाब, दिखाया आईना

भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर आईना दिखाते हुए करारा जवाब दिया...

गाय के चमड़े को रक्षाबंधन से जोड़ने कि कोशिश में था PETA इंडिया, विरोध होने पर साँप से की लेखक शेफाली वैद्य कि तुलना

आज ट्वीटर पर मचे एक बवाल में PETA इंडिया का हिन्दू घृणा खुल कर सबके सामने आ गया है। ये बात...

क्या अमनातुल्लाह खान द्वारा लिया गया ‘दान’, दंगों में खर्च हुए पैसों की रिकवरी थी? बड़ा सवाल!

फरवरी महीने में हुए दिल दहला देने वाले हिन्दू विरोधी दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस आक्रमक रूप से लगातार कार्यवाही कर रही...

जब इन्दिरा गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ मुग़ल आक्रमणकारी बाबर को दी थी श्रद्धांजलि

ये बात तब की है जब इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री हुआ करती थी। वर्ष 1969 में इन्दिरा गांधी काबुल, अफ़ग़ानिस्तान के...

दिल्ली दंगा करवाने में ‘आप’ पार्षद ताहिर हुसैन ने खर्च किए 1.3 करोड़ रूपए: चार्जशीट

इस साल फरवरी में हुए हिन्दू विरोधी दिल्ली दंगों को लेकर आज दिल्ली पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्ज शीट दाखिल किया।...

रियाज़ नाइकू को ‘शिक्षक’ बताने वाले मीडिया संस्थानो के ‘आतंकी सोच’ का पूरा सच

कौन है रियाज़ नायकू? कश्मीर के आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी कमांडर बुरहान वाणी 2016 में ...

हाल की टिप्पणी