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दुनिया

पूर्ण टीकाकरण वाले लोगों में कोविड संक्रमित होने का खतरा 3 गुना कम : स्टडी

वैक्सीन की दो खुराक लेने वाले लोगों में कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आने की संभावना गैर-टीकाकृत लोगों की तुलना में तीन गुना कम है

कोविड 19 सांकेतिक इमेज (pixabay)

 वैक्सीन की दो खुराक लेने वाले लोगों में कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आने की संभावना गैर-टीकाकृत लोगों की तुलना में तीन गुना कम है। एक नए शोध में यह दावा किया गया है। इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया अध्ययन लगभग 98,233 लोगों द्वारा स्वयं घर पर लिए गए स्वाब परीक्षणों पर आधारित है और उनके नमूनों का 24 जून से 12 जुलाई के बीच पीसीआर परीक्षण द्वारा विश्लेषण किया गया है।

इनमें से 527 का परीक्षण पॉजिटिव पाया गया और इनमें से 254 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था तथा उनकी उत्पत्ति का निर्धारण करने के लिए प्रयोगशाला में विश्लेषण किया गया था, जिनमें से 100 प्रतिशत डेल्टा वेरिएंट था।


जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ था, उनमें कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक प्राप्त करने वालों की तुलना में संक्रमण का तीन गुना अधिक प्रसार देखने को मिला, जो 0.4 प्रतिशत की तुलना में 1.21 प्रतिशत रहा।

इसके अलावा, पीसीआर परीक्षण के परिणामों के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों में अन्य लोगों को वायरस पहुंचाने करने की संभावना कम हो सकती है। यह औसतन एक छोटा वायरल लोड होने के कारण है और इसलिए, कम वायरस फैलने की संभावना है।

इप्सोस मोरी के साथ साझेदारी में किया गया अध्ययन एक प्री-प्रिंट रिपोर्ट में उपलब्ध है और इसे पीर-रिव्यू के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

इंपीरियल कॉलेज लंदन में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, पॉल इलियट ने कहा, ये निष्कर्ष हमारे पिछले आंकड़ों की पुष्टि करते हैं कि एक कोविड वैक्सीन की दोनों खुराक संक्रमित होने के प्रति अच्छी सुरक्षा प्रदान करती हैं। हालांकि, हम यह भी देख सकते हैं कि अभी भी संक्रमण का खतरा है क्योंकि कोई भी टीका 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं है और हम जानते हैं कि कुछ डबल टीकाकरण वाले लोग अभी भी वायरस से बीमार पड़ सकते हैं।

सभी वैक्सीन निर्माताओं के साथ चल रही बातचीत (Wikimedia commons)

उन्होंने कहा, इसलिए प्रतिबंधों में ढील के साथ भी, हमें अभी भी एक दूसरे की सुरक्षा और संक्रमण की दर को कम करने में मदद करने के लिए सावधानी से काम करना चाहिए।

अध्ययन से पता चला है कि सबसे अधिक संक्रमण का प्रसार 13-24 वर्ष की आयु के युवाओं में 1.56 प्रतिशत या 65 संक्रमितों में से महज एक ही पाया गया, जबकि सबसे कम 75 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में केवल 0.17 प्रतिशत संक्रमण का प्रसार देखा गया। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पॉजिटिव होने का जोखिम कम देखने को मिला। यह 0.55 प्रतिशत बनाम 0.71 प्रतिशत रहा।

पिछले अध्ययन के आंकड़ों से पता चला है कि संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और मौतों के बीच की कड़ी फरवरी से कमजोर हो रही है।

यह भी पढ़े : लंबे समय तक चलने वाले कोविड लक्षण बच्चों में दुर्लभ: अध्ययन .

हालांकि, अप्रैल के मध्य से संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के रुझान फिर से एक साथ बढ़ रहे हैं। हालांकि इस दौरान पहले के मुकाबले मौत का आंकड़ा कम ही रहा। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अल्फा से डेल्टा में स्विच और अस्पताल में भर्ती मामलों के बदलते मिश्रण (युवा और बिना टीकाकरण वाले लोगों की ओर) को दर्शा रहा हो सकता है।

–(आईएएनएस-PS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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