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रहीसा : कोरोना काल में साढ़े तीन सौ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सफल हुई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपदा को अवसर में बदलने के आह्वान को मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की रहीसा बेगम ने सच साबित कर दिखाया है|

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi) के आपदा को अवसर में बदलने के आह्वान को मध्य प्रदेश (Madhya pardesh) के ग्वालियर जिले की रहीसा बेगम ने सच साबित कर दिखाया है, वे कोरोना (Corona) संक्रमण काल के दौरान सिर्फ स्वयं ही आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर नहीं हुई हैं, बल्कि साढ़े तीन सौ महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में सफल हुई हैं। इस तरह रहीसा इस क्षेत्र की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन गई हैं। ग्वालियर के डबरा कस्बे के कल्याणी गांव में रहने वाली रहीसा बेगम कभी घरों में जाकर चैका-बर्तन किया करती थीं, मगर कोरोना के कारण उनके सामने जीवकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया था। इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chouhan) के आह्वान पर अन्य महिलाओं की तरह रहीसा ने भी मास्क बनाने का काम शुरू किया।


रहीसा बेगम (Rahisa begum) राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बने अली स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष थीं। उन्होंने इस समूह के जरिए मास्क तैयार करने का निर्णय लिया। उन्होंने समूह की 13 सदस्यों सहित सिलाई करने वाली गांव की 70 महिलाओं का एक संकुल बनाया और मास्क तैयार करने में जुट गईं। समूह ने जिला प्रशासन को लगभग 80 हजार मास्क तैयार कराकर उपलब्ध करा दिए। इन मास्क से रहीसा बेगम को लगभग 25 हजार और उनकी साथी महिलाओं को 8 से 10 हजार रूपए का फायदा हुआ।

रहीसा ग्वालियर जिले की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन गई हैं। (IANS)

रहीसा बताती हैं कि समूह की महिलाओं (Womens) की लगन और मेहनत को देखकर जिला प्रशासन ने इस समूह को स्कूली बच्चों के लिये पांच हजार गणवेश (यूनीफार्म) तैयार करने का काम भी सौंपा। उन्होंने अपने समूह के अलावा गांव में 30 स्व-सहायता समूहों का गठन कराया है। जिनसे जुड़कर लगभग 350 महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं।

रहीसा बेगम ने अपने पुराने दिन बड़ी गरीबी में गुजारे हैं। उनके पति साइकिल के कैरियर पर डलिया रखकर गांव-गांव में सब्जी बेचने जाते थे। दो बेटों के लालन-पालन का बोझ और बेटी की शादी की चिंता उन्हें खाए जा रही थी। रहीसा बेगम ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बने अली स्व-सहायता समूह से जुड़कर गरीबी की दीवार तोड़ दी है। इस समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अन्य महिलाओं के सहयोग से अपनी छोटी-मोटी आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं। इसके लिये उन्हें बैंक से तीन बार में लगभग सवा दो लाख और ग्राम संगठन से दो बार में लगभग एक लाख तीस हजार रूपए की आर्थिक मदद मिली।

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समूह से आर्थिक मदद लेकर रहीसा बेगम ने अपने पति सिकंदर के लिये गांव में ही सब्जी की दुकान खुलवा दी। दुकान से आमदनी बढ़ी तो अपने बड़े बेटे को लाइट-टेंट का सामान दिलवा दिया। अब गांव के कार्यक्रमों में रहीसा बेगम का ही टेंट लगता है। टेंट से आमदनी बढ़ी तो रहीसा ने मुद्रा योजना (Mudra yojana) के तहत आर्थिक मदद लेकर गांव में कोसमेटिक की दुकान खोल ली। अब रहीसा के घर के तीन सदस्य अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों से कमाई कर रहे हैं। रहीसा ने धूमधाम के साथ अपनी बेटी की शादी भी कर दी है। उनका छोटा बेटा इरफान बी फार्मा की पढ़ाई कर रहा है। रहीसा केवल खुद ही आत्मनिर्भर (Atmanirbhar Bharat) नहीं बनी हैं। (आईएएनएस-SM)

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