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देश

चीन की हरकत पर नज़र रखे हुए हैं भारतीय जाबाज़

भारतीय सेना की टुकड़ियां, जो कि पहाड़ी युद्ध की विशेषज्ञ हैं, वह पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को संभालने में कामयाब रही है।

पैंगोंग झील, लेह (Wikimedia Commons)

 चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील पर फिंगर-4 के क्षेत्रों पर अपना कब्जा करना जारी रखे हुए हैं, वहीं भारतीय सैनिकों ने झील के उत्तरी किनारे की कुछ ऊंचाइयों पर अपनी पहुंच स्थापित कर ली है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। एक सूत्र ने कहा, “हमारे सैनिकों ने पीएलए के कब्जे वाली पोजिशन को देखते हुए कुछ ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया है।”

सूत्र ने कहा कि भारतीय सेना एहतियात के तौर पर ऐसे स्थानों पर तैनात है।


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सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना की टुकड़ियां, जो कि पहाड़ी युद्ध की विशेषज्ञ हैं, वह पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को संभालने में कामयाब रही है।

सूत्रों ने कहा कि अब पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट पर चीनी सैनिकों और वाहनों की आवाजाही दिखाई दे रही है। कुछ जगहों पर भारी-भरकम हथियारबंद सैनिक भारतीय जवानों के नजदीक ही हैं। इन चौकियों पर सेना हाई अलर्ट पर नहीं है।

भारतीय सेना ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर चीनी सैनिक भड़काऊ सैन्य कदम उठाते हैं तो उनकी सेना जवाबी कार्रवाई करेगी।

भारतीय सेना ने संभाली हुई है पैंगोंग झील पर स्थिति। (Wikimedia Commons)

भारतीय सेना ने ऐसे ऊंचाई वाले स्थानों पर कब्जा कर लिया है, जो इसे चीनी नियंत्रण के तहत आने वाले मोल्दो गैरीसन और स्पंगुर गैप पर हावी होने की अनुमति देता है। भारत और चीन दोनों इनमें से कुछ ऊंचाइयों का दावा करते हैं।

भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण ऊंचाइयों में से एक है रेचिन ला, जिसका चीनी विरोध कर रहे हैं। चीन ने भारतीय सैनिकों को पहाड़ की ऊंचाइयों से दूर करने के लिए कई प्रयास किए हैं।

भारत एलएसी के पास फिंगर-8 पर अपना दावा करता है और उसका फिंगर-4 तक कब्जा कर रहा है, लेकिन विस्तारवादी सोच रखने वाले चीन की सेना यथास्थिति बदलने के लिए फिंगर-4 पर डेरा डाले हुए है और उसने फिंगर-5 और फिंगर-8 के बीच किलेबंदी की है।

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यह नया गतिरोध बिंदु बन गया है, जहां भारतीय सेना एक लाभप्रद स्थिति में है।

भारत और चीन की सेना पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास चार महीने से आमने-सामने है। कई स्तरों के संवाद के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली है और गतिरोध जारी है।(आईएएनएस)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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