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दुनिया

भारत, बांग्लादेश ने साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की

भारत और बांग्लादेश ने साझेदारी को और मजबूत करने और बहुआयामी सहयोग का विस्तार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है, और दोनों देशों में कोविड के परिद्रश्य में सुधार के तुरंत बाद विभिन्न संयुक्त तंत्रों पर गतिविधियों को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

 भारत और बांग्लादेश ने साझेदारी को और मजबूत करने और बहुआयामी सहयोग का विस्तार करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की है, और दोनों देशों में कोविड के परिद्रश्य में सुधार के तुरंत बाद विभिन्न संयुक्त तंत्रों पर गतिविधियों को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमेन और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय संपर्क, कोविड-19 और दोनों देशों में टीकाकरण की स्थिति सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने बैठक के दौरान खुशी व्यक्त की क्योंकि बांग्लादेश को टीकाकरण की आपूर्ति विविध बाहरी स्रोतों से वापस पटरी पर आ गई है, जिसमें कोवैक्स व्यवस्था भी शामिल है।

बांग्लादेश का झंडा सांकेतिक इमेज ( pixabay)


उन्होंने बांग्लादेश (रोहिंग्या) में अस्थायी रूप से रहने वाले म्यांमार के जबरन विस्थापित नागरिकों के प्रत्यावर्तन के मुद्दे के साथ-साथ कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों में दोनों देशों के सहयोग पर भी चर्चा की।

मोमेन ने गुरुवार को ताशकंद में ‘मध्य और दक्षिण एशिया: क्षेत्रीय संपर्क की चुनौतियों और अवसर’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर भारत, चीन और ताजिकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके बाद मोमेन की चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हुई। मोमेन ने छह-पक्षीय कोविड परामर्श शुरू करने के लिए चीनी सरकार को धन्यवाद दिया और उपहार के रूप में वैक्सीन की खुराक भेजने और वाणिज्यिक आपूर्ति लाइन खोलने के लिए बेहद कठिन समय में बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़े होने के लिए बांग्लादेश की कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने बांग्लादेशी और चीनी हितधारकों की साझेदारी के साथ बांग्लादेश में वैक्सीन सह-उत्पादन शुरू करने के अपने अनुरोध को दोहराया। वांग यी ने उन्हें इस मुद्दे पर चीनी सरकार के समर्थन का आश्वासन दिया।

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दोनों विदेश मंत्रियों ने रोहिंग्याओं के प्रत्यावर्तन की दिशा में आगे काम करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने त्रिपक्षीय वार्ता को फिर से शुरू करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। तजाकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन के साथ अपनी बैठक के दौरान, मोमेन ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त कार्य आयोग शुरू करने का प्रस्ताव रखा। मुहरिद्दीन ने उत्पीड़ित रोहिंग्या लोगों की शालीनता से मेजबानी करने के लिए बांग्लादेश की सराहना की और विस्थापित रोहिंग्याओं को वापस लाने के बहुआयामी प्रयासों में बांग्लादेश का समर्थन करना जारी रखने का संकल्प लिया।अपने उज्बेक समकक्ष के निमंत्रण पर, मोमेन बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं । मोमेन 18 जुलाई को ढाका के लिए रवाना होंगे। (आईएएनएस-PS)

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भारत के तमिलनाडु राज्य में बसा कन्याकुमारी स्थल (wikimedia commons)

कुमारी देवी मंदिर :

यह स्थान श्रीपद पराई के नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन मान्यताओं की बात करे तो इसके अनुसार इस स्थान पर कभी कन्याकुमारी ने भी तपस्या की थी। इसलिए इस स्थान को कन्याकुमारी कहा जाता है। यहां कुमारी देवी के पैरों के निशान भी हैं। कन्याकुमारी के समुद्री तट पर ही कुमारी देवी का मंदिर है, जहां देवी पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। प्राचीन कथाओ में कहा गया है कि भगवान शिव ने एक असुर वाणासुर को वरदान दिया था कि कुंवारी कन्या के अलावा किसी के हाथों उसका वध नहीं होगा। प्राचीनकाल में कभी भारत पर शासन करने वाले राजा भरत की आठ पुत्री और एक पुत्र था। राजा भरत ने अपने साम्राज्य को नों बराबर हिस्सों में बांटकर अपनी संतानों को दे दिया था और दक्षिण का हिस्सा उनकी पुत्री कुमारी को मिला। कुमारी भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं और भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। कहा जाता हैं कि विवाह की तैयारियां होने लगीं लेकिन नारद मुनि यह चाहते थे कि वाणासुर नामक असुर का कुमारी के हाथों वध हो जाए। इस कारण शिव और देवी कुमारी का विवाह नहीं हो पाया। कुमारी को शक्ति देवी का अवतार माना जाने लगा और वाणासुर के वध के बाद कुमारी की याद में ही दक्षिण भारत के इस स्थान को 'कन्याकुमारी' कहा जाने लगा। यह भी कहा जाता है कि शहर का नाम देवी कन्या कुमारी के नाम पर पड़ा है । प्रचलित कथाओं में कुमारी देवी को भगवान श्रीकृष्ण की बहन भी माना गया है। प्रचलित कथा के अनुसार ऐसा कहा गया है कि देवी का विवाह संपन्न न हो पाने के कारण बचे हुए दाल-चावल बाद में कंकर बन गए। आश्चर्यजनक रूप से कन्याकुमारी के समुद्र तट की रेत में दाल और चावल के आकार और रंग-रूप के कंकर बड़ी मात्रा में देखे जा सकते हैं।

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यूएनडीपी का चिन्ह (Wikimedia Commons)

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक विकास नेटवर्क है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की स्थापना 22 नवंबर 1965 को हुई थी। यह राष्ट्रों के बीच तकनीकी और निवेश सहयोग को बढ़ावा देता है और देशों को ज्ञान, अनुभव और संसाधनों से जोड़ता है ताकि लोगों को अपने लिए बेहतर जीवन बनाने में मदद मिल सके। संयुक्त राष्ट्र की विकास एजेंसी के रूप में, यूएनडीपी सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में देशों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यूएनडीपी के कार्यक्रमों में गरीबी कम करने, विकासशील देशों में बीमारियों के प्रसार का इलाज और मुकाबला करने के लिए रणनीति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम लोगों के जीवन की गुणवत्ता को मापने के लिए हर साल मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट प्रकाशित करता है। पहला मानव विकास रिपोर्ट 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक और भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन द्वारा लॉन्च किया गया था। तब से लेकर अब तक हर साल यह रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। मानव विकास सूचकांक प्रमुख क्षेत्रों में देश के प्रदर्शन के आधार पर सभी देशों को रैंक देता है। इन प्रमुख क्षेत्रों में शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति और एक सभ्य जीवन स्तर शामिल हैं। मानव विकास सूचकांक में 0 से 1.0 के पैमाने पर देश को रैंक किया जाता है, जिसमें 1.0 उच्चतम मानव विकास है।

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पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (wikimedia commons)

हाल ही में कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख के रूप में नियुक्त किए गए नवजोत सिंह सिद्धू के साथ जारी राजनीतिक खींचतान के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राजभवन के गेट पर 79 वर्षीय अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। बात यह है कि यह एक महीने में तीसरी बार हो रहा है कि विधायकों को बैठक के लिए बुलाया जा रहा है, मेरे नेतृत्व पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमरिंदर सिंह का यह फैसला कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकता है क्योंकि पंजाब के चुनाव में 6 महीने से भी काम के समय रह गया है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि "मैंने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष (सोनिया गांधी) को फोन किया और उनसे कहा कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति उनके समर्थकों से चर्चा के बाद तय की जाएगी।

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