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By : Aaditya Kanchan 


एक ओर जहाँ देश के अंदर कोरोना वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैली हुई हैं वहीं दुनिया के कई देश भारत से वैक्सीन की खुराक मदद के तौर पर माँग रहे हैं। मौके का लाभ उठाकर भारत भी वैक्सीन डिप्लोमेसी के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है।  देखा जाए तो दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलाने वाले चीन ने पिछले कुछ सालों में काफी आलोचना झेली है जिसके चलते उसकी कुटल वैक्सीन कूटनीति को देखते हुए भारत ने भी अपनी कमर कस ली है जिसके साथ ही भारत सस्ती दवाओं और दुनिया भर में वैक्सीन भी मुफ्त में बांट रहा है । पड़ोसी देशों के अलावा ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका भी कोविड-19 संकट से निपटने के लिए टीके लगाने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। 

भारत की अच्छी छवि 

वैक्‍सीन के मामले में भारत अपने पड़ोसी देशों को सहयोग करेगा। वैक्‍सीन के विकास में भारत, बांग्लादेश और म्यांमार सहयोग करेगा। विदेशी मामलों के मंत्रालय से शीर्ष अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों ने बांग्लादेश और म्यामांर की सरकार के साथ वैक्सीन के संयुक्त उत्पादन, वितरण और आपूर्ति पर बातचीत की और जिसके चलते भारत ने में दुनिया भर के देश और अपने पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश ( Bangladesh )  को 20 लाख , म्यांमार को 15 लाख , नेपाल (Nepal) को 10 लाख , भूटान(Bhutan ) को 5 लाख़ वैक्सीन की खुराक भी दी है ।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, लैटिन अमेरिका ( America  ), कैरैबियाई देशों और अफ्रीका (Africa) महाद्वीप के कुल 49 देशों में वैक्सीन की सप्लाई की योजना भारत ने बनाई है। बताया गया कि ये वैक्सीन गरीब देशों को मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। वैक्सीन फ्रेंडशिप(Friendship) के तहत भारत ने दुनिया में 22.9 मिलियन टीके बांटे हैं, जिसमें 64 लाख से ज्यादा वैक्सीन गरीब देशों को अनुदान के रूप में दिए गए हैं। डोमिनियन रिपब्लिक को कोरोना के 30 हजार टीके गिफ्ट के तौर पर दिए गए हैं। इसके अलावा डोमिनिका को भी 70 हजार वैक्सीन दी गई है। फरवरी की शुरुआत में भारत ने बारबाडोस को 10 हजार टीके उपलब्ध कराए थे। 

 

WHO ने की तारीफ 
यहां तक की WHO केप्रमुख (Tedros Adhanom) ने भी कोरोना वायरस के खिलाफ भारत के योगदान के लिए शुक्रिया किया है। WHO प्रमुख का ट्वीट ऐसे वक्‍त में आया है जब दुनिया के कई देशों ने भारत का शुक्रिया अदा किया है। बतादे की अबतक  चीन, भारत, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका सभी ने कोविड के टीके विकसित किए हैं, जबकि अन्य को बहुराष्ट्रीय टीमों द्वारा बनाया जा रहा है, जैसे अमेरिकी-जर्मन फाइजर वैक्सीन। इनमें से लगभग सभी देशों ने अपनी-अपनी आबादी के लिए वितरण को प्राथमिकता दी है।
 

 

ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत को कहा हनुमान जी 

यह भी पढ़ें : चीन दुनिया के लिए खतरा है : अमेरिका

कोरोना वायरस के चलते एक ओर जहाँ पूरी दुनिया में चीन से नाराज़गी है वहीं वैक्सीन मैत्री की नीति के ज़रिए भारत अपनी सकारात्मक छवि बनाने में कामयाब हो रहा है। ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले समय में हमें अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी इस पहल का लाभ भी उठा पाए। वाकई में भारत ने दुनिया भर में अपना नाम वैक्सीन कूटनीति से कमाया है एवं ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो ट्वीट कर भारत को हिंदू भगवान हनुमान से भी जोड़ा है इससे प्रतीत होता है कि भारत के संबंध आने वाले दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर और बढ़ाएगी।

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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