Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
सुरक्षा

भारत की मंशा के अनुसार हो रही एलएसी से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया : पूर्व डीजीएमओ

भारत एक ऐसी यथास्थिति चाहता है, जिसका तात्पर्य अप्रैल 2020 में स्थान, स्थिति और तैनाती को लेकर है, जो कि चीनी सेना की ओर से मई 2020 में तैनाती शुरू होने से ठीक पहले थी।

By: सुमित कुमार सिंह


वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तैनात भारतीय और चीनी सेना के जवानों के पीछे हटने को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। इस बीच सामने आया है कि सैनिकों के पीछे हटने की घटना 1959 में किए गए चीनी दावों के अनुसार नहीं हो रही है।

पूर्व सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (रिटायर्ड) ने आईएएनएस को बताया, “एलएसी पर सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया चीन के 1959 के दावे के अनुसार नहीं हो रही है। यह पूरी तरह से गलत और असत्य है कि भारत ने एलएसी पर चीन के दावे को स्वीकार किया है।”

उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसी यथास्थिति चाहता है, जिसका तात्पर्य अप्रैल 2020 में स्थान, स्थिति और तैनाती को लेकर है, जो कि चीनी सेना की ओर से मई 2020 में तैनाती शुरू होने से ठीक पहले थी।

भाटिया ने कहा, “उनके अनुसार, चीनी स्थिति फिंगर 8 के पूर्व में, पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर सिरिजाप नामक स्थान पर रही है। हमारी जगह धन सिंह थापा नामक स्थान पर रही है। अप्रैल 2020 में यही तो स्थिति थी, जो पिछले कई वर्षों से एक पारंपरिक स्थिति रही है।”

चीन के 1959 के दावे के बारे में बात करते हुए, भाटिया ने कहा कि यह बहुत सारी व्याख्याओं और धारणाओं पर आधारित है।

पूर्व डीजीएमओ ने कहा, “सैनिकों का पीछे हटना, उनके संघर्ष बिंदुओं पर हो रहा है, जो पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट पर सबसे अधिक संवेदनशील हैं।” उन्होंने कहा कि ये वहीं संघर्ष बिंदु हैं, जहां टैंक के साथ ही सेना के वाहनों और पैदल सैनिकों का एक दूसरे से बहुत निकटता से आमने-सामना होता है।

उन्होंने कहा, “इन संघर्ष बिंदुओं में झड़पों की संभावना है, जो कि देखा भी गया है। पैंगोंग झील का दक्षिणी तट सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। वहां से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और बाद में यह अन्य क्षेत्रों में भी शुरू हो जाएगी।”

भारत चीन विवाद क्षेत्र।(फाइल फोटो)

भाटिया ने कहा कि यह एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है, जो कि एक आसान काम भी नहीं है। उन्होंने कहा, “ये ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं और इसमें समय लगेगा। वे (चीन) उनके द्वारा किए गए निर्माणों को खाली करवाएंगे, बंकरों और बस्तियों को फिंगर 5 और फिंगर 6 से हटाएंगे।”

यह भी पढ़ें: भारत ने LAC पर चीन के 1959 के दावे को ‘मजबूती’ दी

उन्होंने कहा, “भारत का उद्देश्य यथास्थिति पाना रहा है और इसे हासिल किया गया है। अब यह नहीं कहना चाहिए कि स्थिति 1959 वाली रही है। यह एक बिल्कुल गलत बयान है।”

भाटिया ने कहा कि भारत को अब अपनी क्षमताओं का निर्माण शुरू करना चाहिए और साथ ही टोही एवं निगरानी क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही भारत तो अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं में भी इजाफा करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के मंसूबों को अंजाम न दिया जा सके।

सेवानिवृत्त अधिकारी ने कहा कि पहला कदम हमेशा संकट को हल करने के लिए होता है और फिर चीजें कदम से कदम आगे बढ़ाकर की जाती हैं। उन्होंने यह भी माना कि सीमा मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत जारी रहनी चाहिए।(आईएएनएस)

Popular

डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

Keep Reading Show less

ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

Keep Reading Show less

ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

Keep reading... Show less