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देश

क्या कुछ ही हफ़्तों में देश की बिजली गुल होने वाली है ?

क्या सच में देश में बिजली संकट आने वाला है या फिर ये कहें की आ चूका है। जानिए बिजली संकट सम्बंधित पूरी खबर।

अगले आने वाले कुछ दिनों में जनता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है । [Pixabay]

क्या सच में देश में बिजली संकट आने वाला है या फिर ये कहें की आ चूका है। लगभग एक हफ्ते पहले से ये ख़बरें आनी शुरु हो गयी थी की देश में कोयले की कमी हो गयी है और अगले आने वाले कुछ दिनों में जनता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही देश भर में लंबे समय तक ब्लैकआउट भी हो सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अक्टूबर को कोयला और बिजली मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक किया और स्थिति का जायजा लिया।


देश की राजधानी दिल्ली में भी बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने मीडिया से कहा था कि अगर बिजली की आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों को कोयले की तत्काल आपूर्ति नहीं मिली तो राष्ट्रीय राजधानी पूरी तरह से ब्लैकआउट हो जाएगा।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के आंकड़ों के अनुसार, एक समय पर भारत के ताप विद्युत संयंत्रों में औसतन चार दिनों का कोयला स्टॉक बचा था, जो देश के 135 कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों में से 15-30 दिनों के अनुशंसित स्तर के मुकाबले कम था। वहीं इनमें से आधे संयंत्रों में 2 दिन से भी कम का कोयला स्टॉक बचा था।

अब जानते हैं आखिर वजह क्या है कोयला संकट का ?

इसकी पहली वजह है मांग और आपूर्ति में जमीन आसमान का फ़र्क़ हो जाना। कोविड -19 में पिछले साल सारा बिज़नेस ठप पड़ गया था। फैक्ट्रीज और कंपनियां बंद कर दी गयी थी जिससे बिजली की भी कम खपत हो रही थी जिसके बाद से कोयला उत्पादन की मांग में कमी हो गयी थी। कोरोना के दूसरे लहर के बाद अचानक से सारी कंपनियां खोल दी गयीं जिससे एकाएक बिजली की खपत बढ़ गयी।बिजली की मांग में इस अचानक उछाल ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कोयले की कीमतों को बढ़ाया है, जिसके कारण आयातित कोयले की कीमतें भारत के लिए आसमान छू गई है।

coal shortage, coal mining आखिर वजह क्या है देश में कोयला संकट का ? [Wikimedia Commons]

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत में वृद्धि के कारण, बिजली संयंत्र जो आमतौर पर आयात पर निर्भर थे वे भारतीय कोयले पर बहुत अधिक निर्भर हो गए, जिससे घरेलू आपूर्ति पर और दबाव बढ़ गया।

भारत में बिजली की खपत भी 2019 की तुलना में पिछले दो महीनों में लगभग 17 प्रतिशत बढ़ी है।

इसकी दूसरी वजह है देश में इस साल मौसम का बिगड़ा मिज़ाज़। इस साल बारिश और बाढ़ की वजह से कई कोयला खदानों में काम रुक गया जिसकी वजह से कोयले की आपूर्ति में कमी आयी।

इसकी एक वजह नवीकरणीय ऊर्जा भी है। पश्चिमी देशों द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना न केवल भारत बल्कि चीन के बिजली क्षेत्र को भी प्रभावित कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण पड़ोसी देश अपनी अवैध कोयला खदानों को बंद करने की कोशिश कर रहा है और इसके आयात में कटौती कर रहा है। इसके अलावा स्टील निर्माण जैसे प्रतिबंध लगा रहा है जो ग्रीनहाउस गैसों में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

भारत और चीन ही नहीं , ब्रिटेन जैसे देश को भी कम बिजली उत्पादन का सामना करना पड़ा है।

यूरोप और एशिया में गैस और तेल की मांग बढ़ने से आयात महंगा हो गया है।

देश में बिजली संकट की वजह बिजली प्रणाली का केंद्रीकरण भी है। एक विशेषज्ञ ने आईएएनएस को बताया, 'पूरी बिजली प्रणाली का केंद्रीकरण कहीं न कहीं इस समस्या को और बढ़ा रहा है। ऊर्जा के स्रोतों का विकेंद्रीकण देश को इस तरह की मुश्किल से बचा सकता है।'

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इन सबके बीच टाटा पावर ने भी बिजली पैदा करना बंद कर दिया है जिसके कारण वह अपनी आयातित कोयला आधारित बिजली की आपूर्ति करने में असमर्थ है। टाटा पावर गुजरात को 1,850 मेगावाट, पंजाब को 475 मेगावाट, राजस्थान को 380 मेगावाट, महाराष्ट्र को 760 मेगावाट और हरियाणा को 380 मेगावाट बिजली आपूर्ति करता था। अदानी पावर की मुंद्रा इकाई भी इसी तरह की समस्या का सामना कर रही है।

बिजली संकट का सबसे बुरा प्रभाव देश की राजधानी समेत कुछ बड़े राज्यों पर पड़ने वाला है। दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को पूरी तरह से ब्लैकआउट का सामना करना पड़ सकता है।

बात उत्तर प्रदेश की करें तो राज्य में 4520 मेगावाटी की आपूर्ति करने वाले 14 बिजली संयंत्रों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

बिजली मंत्रालय ने समस्या को बढ़ते देख बिजली ग्रिड में आवश्यकताओं के अनुसार उत्पादन स्टेशनों के इष्टतम उपयोग के संचालन के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत आयातित कोयला आधारित संयंत्र, जिनमें पर्याप्त मात्रा में कोयला है, को संचालित करने और घरेलू कोयले पर बोझ को कम करने में सक्षम बनाया गया है।

वर्तमान में अधिक स्टॉक को उत्पादन इकाइयों में ले जाने के बाद अधिक बिजली उत्पादन इकाइयों को कार्यात्मक बनाया गया है। लंबे सप्ताहांत के दौरान कमजोर मांग ने भी सुचारू रूप से कामकाज में योगदान दिया है।

एक अधिकारी के अनुसार कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के पास अब सिर्फ 7-8 दिनों का ही स्टॉक बचा है। (आईएएनएस )

Input: IANS; Edited By: Manisha Singh

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