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देश

‘भारत महान नहीं, बदनाम’ पर छिड़ा संग्राम|

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ द्वारा कोरोना संक्रमण को लेकर दिया गया एक और बयान सियासी संग्राम का कारण बन गया है।

कांग्रेस के मध्यप्रदेश के अध्यक्ष कह रहे हैं कि भारत बदनाम है! क्या श्रीमती सोनिया गांधी कमलनाथ जी के इस बयान से सहमत हैं? (सोशल मीडिया)

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ (Kamal Nath) द्वारा कोरोना संक्रमण को लेकर दिया गया एक और बयान सियासी संग्राम का कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि ‘भारत महान नहीं बदनाम है’। इस बयान के बाद भाजपा हमलावर है तो कांग्रेस झूठ फैलाने का आरेाप लगा रही है।

कांग्रेस (Congress) के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ शुक्रवार को मैहर के प्रवास पर थे। यहां उन्होंने मां शारदा के मंदिर में बाहर से ही पूजा की। कोरोना के प्रोटोकाल के कारण मंदिर बंद है। इस मौके पर कमल नाथ ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि, “भारत महान नहीं बदनाम है, कोरोना के कारण सब देशों ने रोक लगाई है कि भारत के लोग नहीं आ सकते। विदेशों में अब भारतीय ड्राइवरों की टैक्सी में कोई बैठने को तैयार नहीं है। ऐसा बदनाम किया अपने देश को।”


कमलनाथ के कोरोना को लेकर आए बयान के बाद भाजपा हमलावर हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने कहा है कि सत्ता जाने के बाद लगता है कमलनाथ जी ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है। कांग्रेस के मध्यप्रदेश के अध्यक्ष कह रहे हैं कि भारत बदनाम है! क्या श्रीमती सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) कमलनाथ जी के इस बयान से सहमत हैं? क्या कांग्रेस को लज्जा और शर्म नहीं आती?

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि कमलनाथ जी ने मानसिक संतुलन खो दिया है और यदि संतुलन नहीं खोया तो उनका दृष्टिकोण अत्यंत विकृत है! ऐसे विचार रखने वाले कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भारत के नागरिक कहलाने के हकदार ही नहीं हैं! यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है!

भाजपा (BJP) के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने भी कमल नाथ पर हमला बोलते हुए कहा कि, सत्ता से बेदखल होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मानसिक दिवालिया हो गए हैं या फिर विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत को बदनाम कर रहे हैं।

कमलनाथ के कोरोना को लेकर आए बयान के बाद भाजपा (BJP) हमलावर हो गई है। (Wikimedia Commons)

उन्होंने कहा कि कमलनाथ के देश को बदनाम करने वाले बयान भारत विरोधी ताकतों को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। यह जांच का विषय है कि इटली, चीन या पाकिस्तान, कमलनाथ कहां से संचालित हो रहे हैं?

#आपको बता दें कि, इससे पहले भी कांग्रेस पार्टी देश विरोधी बयानबाजी कर चुकी है| हालहिं में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ईद के जमावड़े पर तो चुप्पी साध ली और भारत में हो रहे सबसे बड़े और प्रसिद्ध कुम्भ मेले को कोरोना का ‘सुपर स्प्रेडर’ बताया| BJP प्रवक्ता संबित पात्रा द्वारा साझा किए गए एक टूलकिट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह साफ निर्देश दिया गया था कि, वह ईद को सुखद मिलन और कुंभ मेले को ‘सुपर स्प्रेडर’ बताएं। जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी अपनी बयानबाजी के लिए पहले से ही टूलकिट विवाद में फसी हुई है। वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ का कोरोना काल में आया यह देश विरोधी बयान अत्यंत निंदनीय है।

यह भी पढ़ें :- क्या भारत पर नया ‘टूलकिट’ थोपा जा रहा है?

कांग्रेस कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा शुरू से ही झूठ व भ्रम फैलाने में , झूठे मुद्दों को हवा देने में , वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में माहिर है , अब वो एक नया झूठ लेकर मैदान में आ गई है ?

सलूजा ने कमलनाथ के मैहर में संवाददाता सम्मेलन में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि, “एक बात को तोड़-मरोड़ कर , शब्दों को पकड़कर अधूरे रूप से प्रसारित कर ,झूठ का प्रपोगेंडा फैलाने के काम में भाजपा लग गई है ?कमलनाथ ने इस पत्रकार वार्ता में भारतीय कोविड वैरियंट को लेकर कहा कि मैंने कभी भारतीय कोविड वैरियंट नाम नहीं दिया, यह नाम तो विश्व के कई देशों ने दिया है और खुद मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में यह नाम शपथ पत्र में लिखा है, फिर भी भाजपा ने जानबूझकर मुझ पर झूठे आरोप लगाए। जो लोग भारत को महान बनाने की बात करते थे, आज उनकी नीतियों ,नाकारापन के कारण भारत विश्व भर में बदनाम हो रहा है।” (आईएएनएस-SM)

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है। (Unsplash)

अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है, जिसे पहले वियतनाम और चीन द्वारा नियंत्रण किया जा रहा था। त्रिपुरा इंडस्ट्रियल विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार राज्य में बांस की छड़ियों का उत्पादन में भारी गिरावट आई है 2010 में 29,000 मीट्रिक टन से गिरकर 2017 में 1,241 मीट्रिक टन हो गया था, क्योंकि भारत कि प्रतिवर्ष 70,000 (96 प्रतिशत) मीट्रिक टन गोल बास की छड़ियां (46प्रतिशत) वियतनाम और (47 प्रतिशत) चीन द्वारापूरी की जा रही थी।

टीआईडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि 2019 में, केंद्र सरकार ने सीमा शुल्क 25 प्रतिशत बढ़ा दिया और बांस के उत्पादों को प्रतिबंधित सूची में शामिल कर दिया गया, जिससे दूसरे देशों के लिए समस्या उत्पन्न हुई। वर्तमान में, पूर्वोत्तर राज्य 2,500 मीट्रिक टन बांस की छड़ें पैदा कर रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में उत्पादन (12,000 मीट्रिक टन) पढ़कर हो जाएगा, क्योंकि आधुनिक मशीनों के साथ 14 और नई बांस की छड़ें निर्माण इकाइयां जल्द ही पूरे राज्य में आ जाएंगी।उन्होंने कहा, पहले त्रिपुरा के कारीगर हाथ से बांस की छड़ें बनाते थे ,परंतु कुछ साल पहले सरकार ने उनकी अनुकूल मशीन खरीदने में सहायता की।

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