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दुनिया

‘जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में भारत की उल्लेखनीय प्रगति’

ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने प्रति व्यक्ति (ग्रीन हाउस गैस) जीएचजी उत्सर्जन विश्व औसत से अधिक उत्सर्जन करने वाले जी20 देशों से आग्रह किया है कि वे अपने उत्सर्जन को कम करें और उन्हें अगले कुछ वर्षों में विश्व औसत पर लाने का प्रयास करे

ऊर्जा मंत्री राज कुमार सिंह (wikimedia commons)

ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह ने प्रति व्यक्ति (ग्रीन हाउस गैस) जीएचजी उत्सर्जन विश्व औसत से अधिक उत्सर्जन करने वाले जी20 देशों से आग्रह किया है कि वे अपने उत्सर्जन को कम करें और उन्हें अगले कुछ वर्षों में विश्व औसत पर लाने का प्रयास करे, जो कुछ हद तक कार्बन स्पेस को खाली कर देगा और विकासशील देशों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा। शुक्रवार को नेपल्स में इटालियन प्रेसीडेंसी के तहत आयोजित जी20 ऊर्जा और जलवायु संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक 2021 के दौरान वर्चुअल बोलते हुए, सिंह ने कहा, ” जी 20 राष्ट्र इस दिशा में तत्काल कदम उठाएं ताकि विश्व समुदाय एक बेहतर ग्रह छोड़ने के लिए हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सही रास्ते पर रहे।”

राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) पेरिस समझौते के केंद्र में हैं, जिसके लिए प्रत्येक देश को 2020 के बाद की जलवायु क्रियाओं की रूपरेखा और संचार की आवश्यकता होती है। एनडीसी के तहत, भारत ने 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा से कुल स्थापित क्षमता का 40 प्रतिशत और 2005 के स्तर से अपने उत्सर्जन को 33-35 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध किया है।


जी20 सम्मलेन (wikimedia commons)

सिंह ने जी20 मंत्रिस्तरीय बैठक में कहा कि 2030 तक उत्सर्जन में 33-35 प्रतिशत की लक्षित कमी के मुकाबले, भारत ने पहले ही 2005 के स्तर पर 28 प्रतिशत की उत्सर्जन में कमी हासिल कर ली है और इस गति से, यह 2030 से पहले अपनी एनडीसी प्रतिबद्धताओं को पार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह भी पढ़े : भारत, बांग्लादेश ने साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की .

मंत्री ने आगे कहा कि भारत ने पहले ही अक्षय ऊर्जा से 38.5 प्रतिशत स्थापित क्षमता हासिल कर ली है और जब निर्माणाधीन अक्षय क्षमता का भी हिसाब लगाया जाता है, तो स्थापित क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 48 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, जो कि पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं से काफी ऊपर है।” (आईएएनएस-PS)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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