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दुनिया

भारतीय मूल के अमेरिकी रिपब्लिकन राजमार्ग आयुक्त पद के लिए चुनाव लड़ेंगे

जितेंद्र ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मेन टाउनशिप कई अल्पसंख्यक समुदायों का घर है और उन्हें पूर्ण सुविधाएं प्राप्त नहीं हैं।

भारतीय मूल के अमेरिकी रिपब्लिकन जितेंद्र डिगेंवकर(Jitendra Digenvker), जिन्होंने 2016 में कांग्रेस के लिए चुनाव में भाग लिया था, उन्होंने अब घोषणा की कि वह शिकागो के एक उपनगर में राजमार्ग आयुक्त(Highway Commissioner) के पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। अमेरिकन बाजार से बात करते हुए, 1999 में अमेरिका में आकर बसने वाले जितेंद्र ने कहा कि आयुक्त (कमिश्नर) की जिम्मेदारी उन्हें स्थानीय मुद्दों के समाधान के लिए सही मंच प्रदान करेगी।


जितेंद्र ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मेन टाउनशिप कई अल्पसंख्यक समुदायों(minorities) का घर है और उन्हें पूर्ण सुविधाएं प्राप्त नहीं हैं। स्थानीय चुनावों के लिए शुरुआती मतदान 22 मार्च से शुरू होगा। जितेंद्र के अलावा, अन्य भारतीय मूल के अमेरिकी स्मितेश शाह(Smitesh Shah) भी मैदान में हैं और वह भी एक रिपब्लिकन हैं, जो मेन टाउनशिप क्लर्क(Township Clerk) से चुनावी मैदान में हैं।

अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों(Indian-Americans) की बढ़ती उपस्थिति के बारे में, जितेंद्र ने अमेरिकन बाजार से कहा, “अमेरिकी उन सभी उम्मीदवारों का अधिक स्वागत कर रहे हैं, जो स्थानीय स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए आगे आते हैं और वे भारतीय अमेरिकियों के लिए उच्च सम्मान रखते हैं।” जितेंद्र((Jitendra Digenvker)) ने कहा कि अगर वह जीत जाते हैं तो इससे समुदाय के लिए प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “यह स्थानीय सरकार में हमारे समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का हमारा मौका भी होगा।”

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जितेंद्र(Jitendra Digenvker) से सवाल पूछा गया कि अगर वह निर्वाचित हो जाते हैं, तो उनकी प्राथमिकता क्या होगी, इस पर उन्होंने कहा, “मेरा पहला मुद्दा यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे सभी नागरिक अपनी कोविड-19 वैक्सीन जल्द से जल्द प्राप्त करें।”

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उनकी दूसरी प्राथमिकता यह है कि वह क्षेत्र की सड़कों और पुलों की समीक्षा करने और जरूरतमंदों के लिए सड़क पर उतरेंगे। उन्होंने यह बात इस संदर्भ में कही कि चूंकि इस साल अमेरिका में विशेष रूप से सर्दी का मौसम काफी खराब रहा है, जिससे लोगों को काफी असुविधा हुई है। वह इसके लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं।

उन्होंने कोविड-19(COVID-19) से लोगों को निजात दिलाने के लिए चिकित्सा और सुरक्षा को भी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बताया, जिस पर वह काम करेंगे।(आईएएनएस-SHM)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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