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इतिहास

ऊदा देवी जिन्होंने कई ब्रिटिश सैनिकों को मारा

अपने देश को आज़ाद कराने की लड़ाई में कई लोगों ने हिस्सा लिया, उनमे से एक है ऊदा देवी।

wikimedia commons

ऊदा देवी की प्रतिमा।

जब भी 1857 की क्रांति की बात की जाती है तो रानी लक्ष्मी बाई, बेग़म हजरत महल, मंगल पांडे का नाम सामने आता है। लेकिन उस क्रांति में बहुत से लोग थे जिन्होंने अपना जीवन खोया था। उनमे से एक थी ऊदा देवी। उदा देवी 1857 के भारतीय विद्रोह में एक योद्धा थीं, जिन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इनका जन्म अवध क्षेत्र के उजरियांव गांव में हुआ था। इनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। ऊदा देवी बचपन से ही अंग्रेजो के खिलाफ थी।


ऊदा देवी का विवाह अवध सेना के सैनिक मक्का पासी से हुआ था। 1850 के दशक में अंग्रेजों का देसी रियासतों पर हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा था। वाजिद अली शाह उस समय में अवध के राजा थे वह अंग्रेजो की चालों से वाकिफ थे। जिसकी वजह से उन्होंने नारी सेना तैयार करी थी। ऊदा देवी इस सेना की सेनापति थी।
10 जून 1857 को लखनऊ के चिनहट कस्बे के करीब अंग्रेजो के साथ हुई लड़ाई में मक्का पासी की मृत्यु हो गई। इसके बाद ऊदा देवी ने यह निर्णय लिया की वह अपने पति की मृत्यु का बदला लेगी। उसके कुछ समय बाद जब अंग्रेजों को पता लगा कि लखनऊ के सिकंदर बाघ में करीब 2000 सैनिक मौजूद है। अंग्रेजों ने रात को सैनिकों पर हमला कर दिया। उस समय ज्यादातर सैनिक विश्राम कर रहे थे, जिसकी वजह से उनके पास हथियार तैयार नही थे।




warrior, brave, uda devi वीरांगना उदा देवी की तस्वीर।(Wikimedia Commons)


यह भी पढ़ें: आखिर क्या है मंदिरों की खराब हालत का कारण?


उस समय ऊदा देवी बाघ के पिछले हिस्से में मौजूद थी। इसी कारण उन्हें तैयार होने का समय मिल गया था। ऊदा देवी ने अपनी महिला सैनिकों को अंग्रेजों का सामना करने का आदेश दिया। उन्होंने अंग्रेजो से लड़ने के लिए पुरुषों के कपड़े धारण किए और पिस्तौल और कारतूस ले कर एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गई। जैसे ही अंग्रेज आगे बढ़ने लगे उदा देवी ने उन पर हमला करना शुरू कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि ऊदा देवी ने करीब 32 से ज्यादा अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया।


धीरे-धीरे ऊदा देवी के पास असला खत्म होने लगा। तब तक अंग्रेजों को पता लग चुका था कि गोलियां कहां से चल रही है। जब ऊदा देवी को हमला करना बंद करना पड़ा, उसके बाद अंग्रेज पेड़ में गोलियां बरसाने लगे। गोली लगने से ऊदा देवी नीचे आ गिरी। गिरने के बाद कैंपबेल को पता लगा कि यह पुरुषों के वस्त्र में स्त्री है। ऊदा देवी की बहादुरी को देखते हुए कैंपबेल ने अपनी हैट उतार कर ऊदा देवी को सलाम किया।
ऊदा देवी की बहादुरी के चर्चे अंग्रेजी अख़बारों में भी छ्पे थे। ऊदा देवी ने अपनी मात्र भूमि की रक्षा करते हुए अपनी जान गवा दी। लेकिन दुःख इस बात का है कि लोगों को इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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