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थोड़ा हट के

अमेरिका में भारतीय मूल के परिवार ने 1 मिलियन डॉलर का लॉटरी टिकट लौटाया

न्यूयॉर्क, अमेरिका के एक शहर मैसाचुसेट्स (Massachusetts) में रहने वाली एक महिला ने अपना 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लॉटरी टिकट कूड़ेदान में फेंक दिया।

फिएगा ने बताया कि, वह (शाह परिवार) बहुत अच्छे लोग हैं। आप केवल उनसे बात करके बता सकते हैं कि, वह कितने अच्छे हैं। (सोशल मीडिया)

न्यूयॉर्क, अमेरिका (America) के एक शहर मैसाचुसेट्स (Massachusetts) में रहने वाली एक महिला ने अपना 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लॉटरी टिकट कूड़ेदान में फेंक दिया। आप लोग भी सोच रहे होंगे कि, किसी ने अपना 1 मिलियन डॉलर का लॉटरी टिकट आखिर क्यों फेंक दिया? हालांकि एक भारतीय मूल के परिवार ने उस लॉटरी टिकट को उस महिला को वापस कर दिया और अपनी ईमानदारी के लिए उन्होंने खूब प्रशंसा अर्जित की। कह सकते हैं, वह महिला भाग्यशाली थी, जिसे भाग्य ने दूसरा मौका दिया। 

महिला का नाम “ली रोज फिएगा” (Lea Rose Fiega) है जिन्होंने मार्च में साउथविक में भारतीय मूल के परिवार के स्वामित्व वाले लकी स्टॉप से एक डायमंड मिलियन ऑफ स्क्रेच टिकट खरीदा, जहां की वह एक नियमित ग्राहक थीं। 


फिएगा ने बताया कि, में लंच ब्रेक की जल्दी में थी, मैंने वह लॉटरी टिकट (Lottery Ticket) खरीदा और उसे जल्दी में थोड़ा सा खरोंचा, जिसे देख कर मुझे नहीं लगा कि मैं कुछ जीत सकती हूं, इसलिए मैंने उसे फेंक दिया। 

लेकिन उस टिकट को पूरी तरीके से स्क्रैच नहीं किया गया था और वह लगभग 10 दिनों तक स्टोर में पड़ा रहा। कुछ दिनों के बाद स्टोर के मालिक के बेटे अभी शाह ने कूड़ेदान में कुछ 30 अधूरे स्क्रैच किए हुए टिकट को देखा। जिसमें वह विजयी टिकट भी था। 

अभी शाह ने कहा कि, विजयी टिकट उनकी मां अरुणा शाह ने उनकी एक नियमित ग्राहक को बेचा था। उन्होंने कहा कि, जब उन्होंने विजयी टिकट पर लिखे नम्बर को पूरा खरोंचा तो उस टिकट के नीचे 1 मिलियन डॉलर था। अभी ने मजाक करते हुए कहा कि, उस दिन में एक रात के लिए करोड़पति बन गया था। 

स्टोर के मालिक के बेटे अभी शाह ने कूड़ेदान में कुछ 30 अधूरे स्क्रैच किए हुए टिकट को देखा। जिसमें वह विजयी टिकट भी था। (Pixabay)

अभी ने बताया कि, शुरू-शुरू में तो उन्होंने टेस्ला कार खरीदने के बारे में सोचा था। लेकिन बाद में उन्होंने उस विजयी टिकट को वापस लौटाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि, एक तरफ मेरे पास 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, वहीं दूसरी ओर मैं कुछ अच्छा करना चाहता था। 

लकी स्पॉट के मालिक मौनिश शाह ने बताया कि, उस टिकट को वापस करने का फैसला आसान नहीं था, हमें दो रात तक नींद नहीं आई थी। क्योंकि हमारे लिए ग्राहक को ढूंढना भी मुश्किल नहीं था। 

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हमने फिएगा को वहां ढूंढा, जहाँ वह काम करती थीं और अभी ने उनसे कहा कि, उनके माता – पिता उन्हें देखना चाहते हैं। फिएगा ने कहा कि, वह काम कर रही हैं, पर अभी ने कहा तुम्हें आना होगा। तो फिएगा वहां गई और जब उन्हें उस टिकट के बारे में बताया गया तो वह पूरी तरीके से आश्चरचकित हो गई थी। 

फिएगा ने बताया कि, वह (शाह परिवार) बहुत अच्छे लोग हैं। आप केवल उनसे बात करके बता सकते हैं कि, वह कितने अच्छे हैं। 

हालांकि परिवार अब देश भर से खूब बधाई पा रहा है। इस पर अभी शाह ने कहा कि, अगर मैंने वह मिलियन डॉलर टिकट रख लिया होता तो हम इतना प्रसिद्ध नहीं हो पाते। इसलिए मुझे खुशी है कि, मैंने उस 1 मिलियन डॉलर के टिकट को लौटा दिया। 

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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