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दुनिया

भारतीय युवती रिद्दी विश्वनाथन, ग्लोबल इंटरनेशनल एजुकेशन अवार्ड से सम्मानित

रिद्दी विश्वनाथन को उनके योगदान के लिए और यू के विश्वविद्यालयों में घृणा अपराध को संबोधित करने के लिए इस इंटरनेशनल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भारतीय नागरिक रिद्दी विश्वनाथन को ग्लोबल इंटरनेशनल एजुकेशन अवार्ड 2020 से सम्मानित किया गया। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय से स्नातक भारतीय नागरिक रिद्दी विश्वनाथन को ग्लोबल इंटरनेशनल एजुकेशन अवार्ड 2020 से सम्मानित किया गया। विभिन्न छात्र समुदायों में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से अभियान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए और यू के विश्वविद्यालयों में घृणा अपराध को संबोधित करने के लिए इस इंटरनेशनल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रिद्दी ने इस वर्ष के क्यूटिन यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया से थॉमसन चेंग के साथ ‘पायनियर एलुमनी ऑफ द ईयर पुरस्कार साझा किया।

रिद्दी विश्वनाथन एक 23 वर्षीय उद्यमी हैं, जिनका उद्देश्य डिजिटल पहल के माध्यम से स्नातक भर्ती में विविधता को बढ़ाना है। इससे पहले, रिद्दी ने ब्रिटेन में विभिन्न विविधता अधिकारी और मैनचेस्टर छात्र संघ विश्वविद्यालय में प्रथम पूर्णकालिक अंतर्राष्ट्रीय छात्र अधिकारी के रूप में नेतृत्व पदों पर कार्य किया है।


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उन्हें नेशनल यूनियन ऑफ स्टूडेंट्स (ठवर) यूके के लिए प्रवासी प्रतिनिधि 2019-20 के रूप में भी चुना गया है, जहां वह यूके में 192 देशों के 400,000 से अधिक विदेशी छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय हैं।

मूलत पांडुचेरी निवासी रिद्दी उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गईं। हालांकि यहां उन्हें विभिन्न देशों के 4 लाख से अधिक छात्रों के नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त हुआ। ऐसा करने वाली वह प्रथम भारतीय युवती हैं।

पायनियर अवार्डस एकमात्र वैश्विक पुरस्कार हैं जो पूरे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा उद्योग में नवाचार और उपलब्धि का जश्न मनाते हैं। इस वर्ष के पुरस्कारों में भौगोलिक और व्यावसायिक विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रतिष्ठित जज पैनल के साथ कुल 18 श्रेणियां थीं।

पुरस्कार जीतने पर भारतीय मूल की रिद्दी विश्वनाथन ने आईएएनएस से कहा, “मैं वास्तव में मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, अपने छात्रों के संघ, अपने परिवार और दोस्तों के प्रति हमेशा आभारी हूं कि उन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया। यह निश्चित रूप से मेरे लिए एक उत्सव का क्षण है, लेकिन जो चीज इसे कड़वा मीठा बनाती है। वह यह है कि जब हम अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का जश्न मनाते हैं, तो विश्व स्तर पर महामारी के बावजूद, प्रवासी छात्रों को बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें कुछ देशों में वीजा विद्रोह का खतरा भी शामिल है। हम वास्तव में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का जश्न मना सकते हैं, जब सभी छात्र अपने पासपोर्ट के रंग की परवाह किए बिना विश्व स्तर पर समान रूप से शिक्षा का उपयोग कर सकते हैं।”

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मैनचेस्टर विश्वविद्यालय की अध्यक्ष और कुलपति नैंसी रोथवेल ने आईएएनएस से कहा, “मुझे यह सुनकर बेहद खुशी हुई कि रिद्दी ने यह पुरस्कार जीता है। जिस तरह से उसने विविध छात्र समुदायों के सभी कार्यों को संभाला है, मुझे लगता है कि वह इस पुरस्कार की पूरी तरह से हकदार हैं।”(आईएएनएस)

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शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में 76 सत्र मे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एक सकारात्मक और प्रेरक भाषण दिया।

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मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

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पेश हैं मोदी के भाषण की 10 खास बातें:

आकांक्षा: "ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन के टी-स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था, वो आज चौथी बार, भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर यूएनजीए को संबोधित कर रहा है।

लोकतंत्र: सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्मेट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं। हां, लोकतंत्र उद्धार कर सकता है। हां. लोकतंत्र ने उद्धार किया है।"

बैंकिंग: "बीते सात वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जो अब तक इससे वंचित थे। आज 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को भी बीमा सुरक्षा कवच मिला है, जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे।"

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जलापूर्ति: "प्रदूषित पानी, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए हम 17 करोड़ से अधिक घरों तक, पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं।"

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विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

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वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

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