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टेक्नोलॉजी

पहले के मुताबिक कोरोना काल में भुगतान ऐप धोखाधड़ी और पहचान चोरी के शिकार बढ़े!

शहरी भारतियों को भुगतान ऐप धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और भुगतान कार्ड धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है। भविष्य में सतर्क रहने के लिए इस रिपोर्ट को पढ़ें।

ऑनलाइन धोखाधड़ी का अधिक शिकार भारत के शहरी लोग बन रहे हैं।(सांकेतिक चित्र, Unsplash)

मंगलवार को आई एक नई रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर शहरी भारतीयों को महामारी के दौरान पहले की तुलना में भुगतान ऐप धोखाधड़ी (24 प्रतिशत), पहचान की चोरी (20 प्रतिशत) और भुगतान कार्ड धोखाधड़ी (18 प्रतिशत) का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी लोगों द्वारा उल्लिखित उल्लंघनों का सबसे आम रूप हैं, जो इंटरनेट आधारित बाजार अनुसंधान और डेटा एनालिटिक्स फर्म यूगोव के नवीनतम अध्ययन के अनुसार, यह बताते हैं कि आधे से ज्यादा शहरी भारतीयों ने पहले भी किसी न किसी रूप में डेटा चोरी का सामना किया है।

पांच में से एक ने पहचान चोरी होने (जैसे सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने या ईमेल पासवर्ड चोरी होने) और एक समान संख्या में डेटा ‘हैकटिविज्म’ और वह जिस कंपनी में काम करते हैं उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली ऑनलाइन सेवा (जैसे ऑनलाइन ऐप का उपयोग करते हैं) के चोरी होने का सामना किया।


रिपोर्ट के मुताबिक, “डेटा उल्लंघनों में पिछले कुछ महीनों से लगातार वृद्धि देखी गई है और कुछ हालिया मीडिया रिपोटरें से पता चला है कि साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं 2021 में और बढ़ सकती हैं। दिलचस्प बात यह है पहले से उल्लिखित रिपोर्टों के अनुसार बाकी लोगों की तुलना में मिलेनियलस इस तरीके की चोरियों से ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

बिना सोचे समझे लोग अपनी गोपनीय जानकारी ऑनलाइन डाल देते हैं जिसका खामियाज़ा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है।(Unplash)

निष्कर्षों से पता चलता है, अधिकांश लोग कुछ हद तक अपनी डेटा गोपनीयता को लेकर चिंतित हैं। दस में से केवल एक (9 प्रतिशत) बिल्कुल चिंतित नहीं हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इसके बावजूद केवल 58 प्रतिशत ने ऐप या वेब सेवा के लिए साइन अप करने से पहले गोपनीयता के नियमों और शर्तों को पढ़ा।”

जब व्यक्तिगत रूप से पहचान योग्य जानकारी की बात आती है, तो अध्ययन में पाया गया कि कुछ लोग व्यक्तिगत जानकारी को दूसरों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं।

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बैंकिंग डेटा जैसे एटीएम पिन और पासवर्ड को सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है, इसके बाद सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेज (76 प्रतिशत और 63 प्रतिशत) उन्हें बेहद महत्वपूर्ण लगते हैं।

आधे से ज्यादा लोग पासवर्ड (59 फीसदी) और फोन नंबर (51 फीसदी) को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, “सात लोगों में से केवल एक का मानना है कि व्यक्तिगत डेटा ई-कॉमर्स साइटों और ऑनलाइन व्यवसायों (14 प्रतिशत) के साथ सुरक्षित है। जब लोगों के व्यक्तिगत डेटा की बात आती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (7 प्रतिशत) और अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य सेवा इकाइयां (6 प्रतिशत) सबसे कम भरोसेमंद मानी जाती हैं।”(आईएएनएस-SHM)

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अल फैज़ान मुस्लिम फंड के मालिक मोहम्मद फैज़ी ने की खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी (wikimedia commons)

बिजनौर के नगीना शहर में मोहल्ला लुहारी सराय में स्थित 'अल फैजान मुस्लिम फंड लिमिटेड' का मालिक मोहम्मद फैज़ी खाताधारकों के साथ ठगी(Fraud) कर करोड़ो रुपए की नगदी के साथ सोने-चांदी जेवरात लेकर फरार हो गया है। पुलिस ने कई लोगों के शिकायत के बाद प्रबंधक मोहम्मद फ़ैज़ी और एक अन्य के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तमाम लोगों के शिकायत के आधार पर पुलिस ने 'अल फैजान म्युचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड' मोहल्ला लाल सराय नगीना के का संचालन के रहे मोहम्मद फैजी पुत्र अहमदुल्ला निवासी शाहजीर नगीना 420 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जाँच शुरू कर दी है। नगीना के मोहल्ला लाल सराय में स्थित 'अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड' का संचालन मोहम्मद फैज़ी बीते पांच साल से कर रहा था। खाताधारकों को बिना कोई सूचना दिए आरोपी मोहम्मद फैज़ी शाखा बन्द कर फरार हो गया।

Bijnor, bijnor police, Bank fraud अल फैज़ान मुस्लिम फंड लिमिटेड तले मोहम्मद फैज़ी ने खाताधारकों को लगाया चूना। करोड़ो ले कर फरार। ( Pixabay )

बता दें कि 'अल फैज़ान मुस्लिम फंड' की शाखा में लोग प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन करते थे। ख़बर है की अल फैजान की शाखा में नगीना व आसपास के लोग के करोड़ों रुपए की नकदी के साथ साथ सोने चांदी के जेवरात भी जमा करते थे। रोज की तरह जब लोग अल फैज़ान फंड लिमिटेड की शाखा में लेन देन के लिए पहुंचे तो उन्हें निर्धारित समय सीमा के बाद भी शाखा बंद मिली। इसके बाद खाताधारकों को शक हुआ तो पता चला कि अल फैजान मुस्लिम फंड शाखा का संचालक मोहम्मद फैज़ी करोड़ों रुपए की नकदी के साथ साथ खाताधारकों के शाखा में जमा सोने-चांदी के जेवरात भी लेकर फरार हो गया। पुलिस की माने तो अब तक 170 से भी अधिक तहरीर दर्ज की जा चुकी हैं और पुलिस खाताधारकों के हुए नुकसान की खोज बीन में जुट गई है ।

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